2020 को दक्षिण दिल्ली नगर निगम सदन सत्र में एक प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस, मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा अवैध रूप से सील किए गए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को डी-सील करने की मांग करती है-अभिषेक दत्त

 Ø  21-12-





2020 
को दक्षिण दिल्ली नगर निगम सदन सत्र में एक प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेसमॉनिटरिंग कमेटी द्वारा अवैध रूप से सील किए गए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को डी-सील करने की मांग करती है-अभिषेक दत्त

 

नई दिल्ली, 17 दिसम्बर, 2020 - दक्षिण दिल्ली नगर निगम में कांग्रेस के नेता श्री अभिषेक दत्त ने कहा कि मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा अवैध तरीके से हजारों दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया हैजिसके कारण लाखों लोगों की आजीविका पिछले तीन वर्षों से प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग कि की इन प्रतिष्ठानों को तुरंत डी-सील कर दिया जाना चाहिए ताकि व्यापारी जिसे सीलिंग और कोविड -19 महामारी के दौरान हुऐ लॉकडाउन के कारण दोहरी मार झेलनी पड़ीअपने व्यवसायों को फिर से शुरू कर सकें और दिल्ली की सिकुड़ती अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर सकें।

 

डीपीसीसी कार्यालयराजीव भवन में आज एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुएश्री अभिषेक दत्त ने कहा कि कांग्रेस 21 दिसंबर, 2020 को दक्षिण दिल्ली नगर निगम सदन सत्र में एक प्रस्ताव पेश करेगी उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि हम सभी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक स्वर में व्यापारियो के हितों के लिए  अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करे और उसे फिर से संशोधित के लिए केन्द्र सरकार को भेजा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कन्वर्जन चार्ज और पार्किंग शुल्क का भुगतान नहीं करने के लिए दुकानों को सील करने पर केन्द्र सरकार एक अधिसूचना जारी करे कि कोई भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान तब तक सील नहीं किया जाएगा जब तक कि सर्वोच्च न्यायालय अंतिम निर्णय नहीं  जाता। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों को सील किया गया हैउन्हें व्यापारियों से शपथ पत्र लेने के बाद डी-सील किया जाना चाहिएऔर व्यापारियों को दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारा जारी किए गए नोटिसों को भी रद्द किया जाना चाहिए। आज की इस प्रैस वार्ता में व्यापारियों के प्रतिनिधि श्री मंदीप कोहली और श्री अजय गुप्ता भी मौजूद थे।

 

श्री अभिषेक दत्त ने कहा कि 6-11-2019 को एस.डी.एम.सीके एक सत्र में सदन में एक प्रस्ताव पारित किया गया था कि कन्वर्जन चार्ज और पार्किंग शुल्क का भुगतान नहीं करने के लिए स्थानीय व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उनकी परिसंपत्तियों को कोई सीलिंग नोटिस जारी नहीं किया जाएगालेकिन एस.डी.एम.सीअपने इस प्रस्ताव का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि एस.डी.एम.सी मई 2008 में नागरिक निकाय द्वारा पारित प्रस्ताव का भी उल्लंघन कर रही है कि शहर में किसी भी अनधिकृत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने से पहले 48 घंटे का नोटिस देना होता है।

 

श्री अभिषेक दत्त ने कहा कि यह एक आश्चर्य की बात है कि एम.सी.डीद्वारा मॉनिटरिंग कमेटी का खर्च वहन किया जा रहा हैपिछले तीन वर्षों में हजारों व्यापारियों और लाखों लोग जो अपनी आजीविका के लिए केवल व्यवसायों पर ही निर्भर हैके जीवन को बर्बाद करने के लिएबिना किसी पूर्व सूचना के अवैध रूप से कई बाजारों को सील करने के लिए एम.सी.डीहर प्रकार के हथकंडे अपना रहा है।

 

 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश I.A.NOS.2260-61 में निर्दिष्ट किया था कि जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कन्वर्जन चार्ज और पार्किंग शुल्क का भुगतान  करने के लिए सील कर दिया गया हैउन्हें जब तक शीर्ष अदालत मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं देता है तब तक व्यापारियों से एक हलफनामा लेने के बाद डी-सील कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एलएससी मार्केटपुरानी डबल मंजिलाआई- मार्केटके अधिकार क्षेत्र में एक हजार से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान बने हुए हैंऔर इन बाजारों के व्यापारियों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

 

श्री अभिषेक दत्त ने कहा कि जो व्यापारी बैंकों और निजी वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋणों को चुकाने में विफल रहे उनमें से कई व्यापारियों ने आत्महत्या कर ली है और कई बीमार पड़ गए हैं।

 

श्री अभिषेक दत्त ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले का पालन करते हुए आवासीय क्षेत्रों में मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा सील किए गए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक हलफनामा लेने के बाद डी-सील कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को व्यापारियों को राहत देने के लिए एक संशोधन लाना चाहिए जैसा कि 2008 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने किया थाउन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली में हालांकि बहुत कम उद्योग हैं लेकिन फिर भी अधिकांश आबादी व्यापारियों की है।

 

मुख्य संवाददाता,

..........................नई दिल्ली।

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