नई दिल्ली, योगराज शर्मा। आईए आज परिचय करवाते है आरएसएस प्रमुख डा. मोहन भागवत से, जिन्हे यू तो देश का बच्चा बच्चा जानता है, लेकिन उनके पदभार संभालने के बाद देश भर में जैसे आरएसएस का विस्तार हुआ है उस पर भी कुछ चर्चा करेंगे। देखते है उनका नागपुर से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर
मोहन भागवत का जन्म 11 सितंबर 1950 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर में हुआ। उनका परिवार प्रारंभ से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा रहा। उनके पिता मधुकरराव भागवत भी संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे।
मोहन भागवत ने पशु चिकित्सा विज्ञान (Veterinary Science) की पढ़ाई की, लेकिन युवावस्था में ही उन्होंने सामाजिक और राष्ट्र निर्माण के कार्यों को जीवन का उद्देश्य बना लिया। इसके बाद वे पूर्णकालिक प्रचारक बने और संघ के विभिन्न दायित्वों को निभाते हुए संगठन में आगे बढ़ते गए।
2009 में बने RSS के सरसंघचालक
साल 2009 में मोहन भागवत को RSS का सरसंघचालक नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में संघ ने आधुनिक तकनीक, युवाओं और सामाजिक अभियानों पर विशेष ध्यान दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, भागवत के नेतृत्व में RSS ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सक्रिय एवं व्यापक बनाया। देश के छोटे कस्बों, ग्रामीण क्षेत्रों और महानगरों में शाखाओं की संख्या में वृद्धि देखी गई।
युवाओं और समाज के बीच बढ़ा प्रभाव
मोहन भागवत ने अपने भाषणों में कई बार सामाजिक समरसता, राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति को प्राथमिकता दी।
उनके नेतृत्व में संघ ने—
शिक्षा,
सेवा कार्य,
पर्यावरण जागरूकता,
ग्राम विकास,
और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विशेष अभियान चलाए।
संघ से जुड़े स्वयंसेवकों ने कोविड-19 महामारी, बाढ़ और अन्य आपदाओं के समय राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे संगठन की सामाजिक पहचान और मजबूत हुई।
देशभर में RSS का विस्तार
RSS के समर्थकों का कहना है कि मोहन भागवत के नेतृत्व में संगठन ने नई पीढ़ी तक अपनी पहुंच बढ़ाई।
डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ा।
युवाओं और पेशेवर वर्ग को जोड़ने के प्रयास हुए।
सेवा और राष्ट्र निर्माण के अभियानों को गति मिली।
आज संघ से प्रेरित कई संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।
सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट विचार
मोहन भागवत समय-समय पर सामाजिक सद्भाव, भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय एकता पर अपने विचार रखते रहे हैं।
उनके वक्तव्यों को देशभर में व्यापक चर्चा मिलती है और समर्थक उन्हें संगठन को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाने वाला नेतृत्व मानते हैं।
निष्कर्ष
करीब एक सदी पुराने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को नए दौर में व्यापक पहचान दिलाने में मोहन भागवत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उनके नेतृत्व में संगठन ने सेवा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के संदेश को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।



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