उ.अमीर ख़ां साहब एक ऐसे गायक हुए हैं जिन्होंने अपनी ख़याल गायकी को बहुत ऊंचाई पर लेजाकर,जन जन तक लोकप्रिय बनाया।कई गायकों को सुना समझा मगर अपनी गायकी को अमीर खा़नी रंग दिया ।धीर गम्भीर उन का मिज़ाज ,धीर गंभीर गायन,रिजर्व नेचर उनकी ख़ासीयत व शख्सियत थी ।बहोत कम बोलते थे ,अधिक चिन्तन करते थे।लम्बे पूरे होने के बावजूद ,उनका भोजन सीमित था । खाने में बहोत कम खाते थे ।हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज़्यादा करते थे ।मगर गाना शबाब पर था । फिल्म बेजूबावरा,हंग्री स्टोन,झनक झनक पायल बाजे और शबाब फिल्म में बेतहाशा गाना तैयार गाया ।पहले वो घराने बाज़ी में नहीं मानते थे,मगर सन् 1968 के बाद कई लोगों ने जब ज़ोर दिया तो कहते थे,मैं इन्दौर से गाता हूं।कुछ गायक उन्हें किराना घराने का गायक होने की तोहमत देते थे।मगर किराने की गायकी से उनकी गायकी ध्रुपद बेस्ड थी।उन कख खुद का क्रिएशन था और ला जवाब गाना।जिस पर सब फ़िदा थे।


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