स्वर्ग में चलती है पुण्य की दौलत, कमा लो

 


जब आपको अमेरिका जाना हो तो आप सबसे पहले क्या करते हैं। आप अपने रुपयों को डालर में चेंज करवाते हैं। क्योंकि वहां केवल डॉलर चलते हैं। इसी तरह जब आपको अपनी दौलत को अपने मरोपरांत साथ ले जाना हो तो क्या करेंगे। आपको उस दौलत को पुण्य में चेंज करना होगा। क्योकि कुछ साथ जाएगा तो वो केवल पुण्य कार्य होंगे। पुण्य का रास्ता निकलता है परोपकार से। परोपकार के लिए दिल बडा होना चाहिए, जेब नहीं। किसी एक जरुरतमंद की आज सहायता करना हमारे दिल को वो खुशी दे सकता है, जो लाखों खर्च करके भी नहीं मिल सकती। ऐसे ही परोपकार के कामों में जुडना है तो ज्वाइन करें- वर्ल्ड ह्यूमन राइटस ओर्गेनाइजेशन व आलंबन चेरीटेबल ट्रस्ट। हमारा संकल्प वाक्य है- विश्व का कल्याण हो। आओ हम मिलकर विश्व भर में मानव अधिकारों की सुरक्षा व जागरुकता के सुकार्य में एकजुट हों। मिल कर टीमवर्क में काम करें। जिलों से राज्य तक और देश के विश्व तक की बनाई जा रही संगठन की टीम का हिस्सा बनें। डब्लूएचआरओ से जुडने के लिए वटसअप पर भेजें अपना प्रोफाइल, आईडी, एक फोटो व सहयोग राशि।

वटसअप 7011490810 WHRO

WHRO TEAM WORKING IN GOA



Today we have gone to Pernem and take view solved the case of old man. Babalu Amerkar about his daughter-in-law's harassment of him to staying at home. Now the decision has taken to give a complaint to SDM in presence of RHB National in charge & Goa state director Mrs. Amisha. S vice president Mr. Surya Kant Chodanker,  & North Goa secretary  Mrs Nilima Mestry & special member of shri Prasad Panchal. In this our RHB  National in charge Mrs Amisha s has started a tiffin & breakfast to the old man in Hotel Lokpriya from Pernem  who use to serve him sometimes

Veterans Day on 19th February


 

Crpf celebrated it's first Veterans Day on 19th February... Dg crpf Dr Anand Maheshwari invited the veterans and honored them.. Had a Photograph with the veterans..



आखिर अंतर फिर भी रह ही गया!



बचपन में जब हम रेल की यात्रा करते थे, माँ घर से खाना बनाकर  साथ ले जाती थी, पर रेल में कुछ लोगों को जब खाना खरीद कर खाते देखते, तब बड़ा मन करता था कि हम भी खरीद कर खाएँ!* 

पिताजी ने समझाया- ये हमारे बस का नहीं! ये तो  बड़े व अमीर लोग हैं जो इस तरह पैसे खर्च कर सकते हैं, हम नहीं! 

      बड़े होकर देखा,  अब जब हम खाना खरीद कर खा रहे हैं, तो "स्वास्थ सचेतन के लिए", वो बड़े लोग घर का भोजन ले जा रहे हैं...आखिर अंतर रह ही गया.



बचपन में जब हम सूती कपड़े पहनते थे, तब वो लोग टेरीलीन पहनते थे! बड़ा मन करता था, पर पिताजी कहते- हम इतना खर्च नहीं कर सकते!*   

       बड़े होकर जब हम टेरीलीन पहने लगे, तब वो लोग सूती कपड़े पहनने लगे!  अब सूती कपड़े महँगे हो गए! हम अब उतने खर्च नहीं कर सकते थे!

 

आखिर अंतर रह ही गया...


बचपन में जब खेलते-खेलते हमारा पतलून घुटनों के पास से फट जाता, माँ बड़ी कारीगरी से उसे रफू कर देती, और हम खुश हो जाते थे। बस उठते-बैठते अपने हाथों से घुटनों के पास का वो रफू वाला हिस्सा ढँक लेते थे!* 

          बड़े होकर देखा वो लोग घुटनों के पास फटे पतलून महँगे दामों में बड़े दुकानों से खरीद कर पहन रहे हैं!

आखिर अंतर रह ही गया...


बचपन में हम साईकिल बड़ी मुश्किल से  खरीद पाते, तब वे स्कूटर पर जाते! जब हम स्कूटर खरीदे, वो कार की सवारी करने लगे और जब तक हम मारुति खरीदे, वो बीएमडब्लू पर जाते दिखे!*

और हम जब रिटायरमेन्ट का पैसा लगाकर BMW खरीदे, अंतर को मिटाने के लिए, तो वो साईकिलिंग करते नज़र आए, स्वास्थ्य के लिए।


 *आखिरअंतर फिर भी  रह ही गया...


हर हाल में हर समय दो  विभिन्न लोगो में "अंतर" रह ही जाता है। 

"अंतर" सतत है, सनातन है, 

अतः सदा सर्वदा रहेगा। 

कभी भी दो  भिन्न व्यक्ति और दो विभिन्न  परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं।  

कहीं ऐसा न हो  कि कल की सोचते-सोचते  हम आज को ही खो दें और फिर कल इस आज को याद करें।

इसलिए जिस हाल में हैं... जैसे हैं... प्रसन्न रहें।*


अपना व अपनों का ख्याल रखे*


आप मुस्कुराइए ,जिंदगी मुस्कुराएगी* 


Suresh Sharma

बेईमानी का पैसा शरीर के एक एक अंग फाड़कर निकलता है।*

एक सच्ची कहानी



रमेश चंद्र शर्मा जो पंजाब के 'खन्ना' नामक शहर में एक मेडिकल स्टोर चलाते थे,उन्होंने अपने जीवन का एक पृष्ठ खोल कर सुनाया जो पाठकों की आँखें भी खोल सकता है और शायद उस पाप से,जिस में वह भागीदार बना, उससे भी बचा सकता है।

रमेश चंद्र शर्मा का मेडिकल स्टोर जो कि अपने स्थान के कारण काफी पुराना और अच्छी स्थिति में था। लेकिन जैसे कि कहा जाता है कि धन एक व्यक्ति के दिमाग को भ्रष्ट कर देता है और यही बात रमेश चंद्र जी के साथ भी घटित हुई।

रमेश जी बताते हैं कि मेरा मेडिकल स्टोर बहुत अच्छी तरह से चलता था और मेरी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी थी। अपनी कमाई से मैंने जमीन और कुछ प्लॉट खरीदे और अपने मेडिकल स्टोर के साथ एक क्लीनिकल लेबोरेटरी भी खोल ली। लेकिन मैं यहां झूठ नहीं बोलूंगा। मैं एक बहुत ही लालची किस्म  का आदमी था क्योंकि मेडिकल फील्ड में दोगुनी नहीं बल्कि कई गुना कमाई होती है।

शायद ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते होंगे कि मेडिकल प्रोफेशन में 10 रुपये में आने वाली दवा आराम से 70-80 रुपये में बिक जाती है। लेकिन अगर कोई मुझसे कभी दो रुपये भी कम करने को कहता तो मैं ग्राहक को मना कर देता। खैर, मैं हर किसी के बारे में बात नहीं कर रहा हूं, सिर्फ अपनी बात कर रहा हूं।

वर्ष 2008 में, गर्मी के दिनों में एक बूढ़ा व्यक्ति मेरे स्टोर में आया। उसने मुझे डॉक्टर की पर्ची दी। मैंने दवा पढ़ी और उसे निकाल लिया। उस दवा का बिल 560 रुपये बन गया। बूढ़े ने उसने अपनी सारी जेब खाली कर दी लेकिन उसके पास कुल 180 रुपये थे। मैं उस समय बहुत गुस्से में था क्योंकि मुझे काफी समय लगा कर उस बूढ़े व्यक्ति की दवा निकालनी पड़ी थी और ऊपर से उसके पास पर्याप्त पैसे भी नहीं थे।

बूढ़ा दवा लेने से मना भी नहीं कर पा रहा था। शायद उसे दवा की सख्त जरूरत थी। फिर उस बूढ़े व्यक्ति ने कहा, "मेरी मदद करो। मेरे पास कम पैसे हैं और मेरी पत्नी बीमार है। हमारे बच्चे भी हमें पूछते नहीं हैं। मैं अपनी पत्नी को इस तरह वृद्धावस्था में मरते हुए नहीं देख सकता।"

लेकिन मैंने उस समय उस बूढ़े व्यक्ति की बात नहीं सुनी और उसे दवा वापस छोड़ने के लिए कहा। यहां पर मैं एक बात कहना चाहूंगा कि वास्तव में उस बूढ़े व्यक्ति की दवा की कुल राशि 120 रुपये ही बनती थी। अगर मैंने उससे 150 रुपये भी ले लिए होते तो भी मुझे 30 रुपये का मुनाफा ही होता। लेकिन मेरे लालच ने उस बूढ़े लाचार व्यक्ति को भी नहीं छोड़ा।

फिर मेरी दुकान पर खड़े एक दूसरे ग्राहक ने अपनी जेब से पैसे निकाले और उस बूढ़े आदमी के लिए दवा खरीदी। लेकिन इसका भी मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। मैंने पैसे लिए और बूढ़े को दवाई दे दी।

समय बीतता गया और वर्ष 2009 आ गया। मेरे इकलौते बेटे को ब्रेन ट्यूमर हो गया। पहले तो हमें पता ही नहीं चला। लेकिन जब पता चला तो बेटा मृत्यु के कगार पर था। पैसा बहता रहा और लड़के की बीमारी खराब होती गई। प्लॉट बिक गए, जमीन बिक गई और आखिरकार मेडिकल स्टोर भी बिक गया लेकिन मेरे बेटे की तबीयत बिल्कुल नहीं सुधरी। उसका ऑपरेशन भी हुआ और जब सब पैसा खत्म हो गया तो आखिरकार डॉक्टरों ने मुझे अपने बेटे को घर ले जाने और उसकी सेवा करने के लिए कहा। उसके पश्चात 2012 में मेरे बेटे का निधन हो गया। मैं जीवन भर कमाने के बाद भी उसे बचा नहीं सका।

2015 में मुझे भी लकवा मार गया और मुझे चोट भी लग गई। आज जब मेरी दवा आती है तो उन दवाओं पर खर्च किया गया पैसा मुझे काटता है क्योंकि मैं उन दवाओं की वास्तविक कीमत को जानता हूं।

एक दिन मैं कुछ दवाई लेने के लिए मेडिकल स्टोर पर गया और 100 रु का इंजेक्शन मुझे 700 रु में दिया गया। लेकिन उस समय मेरी जेब में 500 रुपये ही थे और इंजेक्शन के बिना ही मुझे मेडिकल स्टोर से वापस आना पड़ा। उस समय मुझे उस बूढ़े व्यक्ति की बहुत याद आई और मैं घर चला गया।

👉मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि ठीक है कि हम सभी कमाने के लिए बैठे हैं क्योंकि हर किसी के पास एक पेट है। लेकिन वैध तरीके से कमाएं,ईमानदारी से कमाएं । गरीब लाचारों को लूट कर कमाई करना अच्छी बात नहीं है क्योंकि नरक और स्वर्ग केवल इस धरती पर ही हैं,कहीं और नहीं। और आज मैं नरक भुगत रहा हूं।

पैसा हमेशा मदद नहीं करता। हमेशा ईश्वर के भय से चलो। उसका नियम अटल है क्योंकि कई बार एक छोटा सा लालच भी हमें बहुत बड़े दुख में धकेल सकता है।

जीवन शतरंज के खेल की तरह है और यह खेल आप  ईश्वर के साथ खेल रहे हैं ...

आपकी हर चाल के बाद अगली चाल ईश्वर चलता है।

जैसी करनी वैसा फल,आज नहीं तो निश्चित कल।


सौजन्य- सुरेश शर्मा, पूर्व आईजीपी, पंजाब पुलिस

यौन शोषण के आरोपी ने लडकी के पिता को गोली मारकर हत्या की। हाथरस की घटना।...

सलीम सुलेमान के धुन पर पवन सिंह मचायेंगे धमाल

 भोजपुरी सुपर स्‍टार पवन सिंह संगीतकार सलीम सुलेमान के साथ मिलकर इस होली एक धमाका करने वाले हैंजिसकी घोषणा उन्‍होंने बीते दिनों की थी। मगर आज उन्‍होंने एक वीडियो जारी कर बता दिया कि वो धमाका क्‍या होने वाला है। पवन के वीडियो के अनुसारवे जल्‍द ही सलीम सुलेमान सिंह के साथ ए‍क धमाकेदार होली सौंग कर रहे हैंजिसका टायटल है बबुनी तेरे रंग में


होली गीत बबुनी तेरे रंग की इन दिनों शूटिंग चल रही हैजिसमें उनके साथ इस बार त्रिधा चौधरी नजर आने वाली हैं। यह पवन सिंह का सह दूसरा होली गीत हैजिसे वे बॉलीवुड के लोगों को साथ लेकर बना रहे हैं। बीते साल भी होली पर उनका एक गाना कमरिया हिला रही है’ आयी थीजिसमें उन्‍होंने पायल देव के साथ मिलकर धमाल मचा दिया था। तब उनके साथ सुपर डांसर लॉरेन गु‍टबिल नजर आयीं थींलेकिन इस होली पवन के साथ त्रिधा चौधरी नजर आयेंगी। यानी लॉरेन के बाद त्रिधा के साथ होली खेलेंगे पवन सिंह।

पवन सिंह ने सलीम सुलेमान के साथ आने वाले इस गाने को लेकर कहा कि इस बार होली में चमत्‍कार होने वाला है। हम सलीम सुलेमान के साथ मिलकर बबुनी तेरे रंग में’ कर रहे हैं। यह गाना होली के मौके पर रिलीज होगा। इसकी शूटिंग हम जोर शोर से कर रहे हैं। बस सबों से इतना कहना है कि गाना जब रिलीज होगीतब आप सभी इस गाने को और अपने भाई को भरपूर प्‍यार दें।