खाली रहे डीडीए के फ्लैट्स, मेंटेनेंस पर अब खर्च होंगे 25 लाख

 


नई दिल्ली, आरुषि । इतनी स्कीमों मे शामिल होने के बाद भी नेरेला मे बने डीडीए के खाली फ्लैट्स अब तक नही बिक पाए। साथ ही साथ अब डीडीए इन खाली फ्लैट्स की मेंटेनेंस के लिए कर रही है 25 लाख रुपए खर्च। इसके साथ ही कांट्रेक्टर हायर करना भी शुरू कर दिया है।  सूत्रों के अनुसार ये भी पता चला है की पॉकेट–4 और पांच के सेक्टर –G7/G8 मे बने फ्लैट्स के लिऐ कांट्रेक्टर को आवेदन जमा करने का 16 अगस्त तक का समय दे दिया गया है। यह भी जानकारी मिली है की टेक्निकल बीड 17 अगस्त को खुल जाएगी। यह टेंडर 12 महीनो का होगा जिसका अनुमानित बजट 24,85,420 है। 2022 मे डीडीए की खराब हालत की वजह इन फ्लैट्स को बताया गया था। 2014 के बाद से अब tk डीडीए फ्लैट्स 57 हजार के करीब फ्लैट्स हाउसिंग स्कीम में ला चुकी है। इनमें से 15500 करीब फ्लैट्स नही बिक पाए या लोगो ने रिजेक्ट कर्दिये। सिर्फ नरेला के 25,000 फ्लैट्स अलग अलग हाउसिंग पॉकेट मै तयार है। जानकारी के अनुसार यह पता चला है की डीडीए की करंट स्कीम पहले आओ पहले पाओ को काफी बेहतरीन रिस्पॉन्स मिल रहा है। ऐसी स्कीम के चलते और प्रभावित होके कई लोगो ने नरेला मे 660 से अधिक फ्लैट बुक करवा लिऐ है। डीडीए को उम्मीद है की डीएमआरसी के मेट्रो प्रपोजल को मंजूरी मिलने के बाद यह सभी फ्लैट्स लोगो को काफी पसंद आने लगेंगे ।

चिंता का सबब बन रहा है साइबर क्राइम


आरुषि/राधिका शर्मा

नई दिल्ली। साइबर क्राइम की चिंता आज हर किसी मोबाइल और कंप्यूटर चलाने वाले से लेकर इलेक्ट्रोनिक गेजेटस इस्तेमाल करने वालो को सता रही है। कब किसका गैजेट हैक हो जाए और कब किसके बैंक खाते से उसकी खून पसीने की कमाई निकल जाए, ये चिंता भी सबको है। इससे बचने के लिए पुलिस ने भी साइबर सेल बनाया है और आईटी एक्सपर्टस भी जानकारी दे कर अवेयरनेस की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन जितनी बचाव की कोशिशें होती है, उतने ही नई तकनीक हैकर्स् यूज करने लगे है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से हैकिंग और ठगी के शिकार लोगो की संख्या और बढ गई है। आईए इसी साइबर क्राइम के कुछ पहलुओ पर चर्चा करते है और आपको बताते है कि आखिर है क्या साइबर क्राईम।
साइबर क्राइम एक गेरकानूनी गतिविधि है। यह एक बड़ी समस्या है, जो साइबर अपराधियों द्वारा इंटरनेट या कंप्यूटर के माध्यम से किया जाता है। काम्प्यूटर और नेटवर्क का उपयोग करके किया गया कोई भी अवैध गतिविधि जो अन्यथा नहीं होती है, उसे साइबर अपराध कहते हैं। इसमें हैकिंग, आईडेंटिटी चोरी, फिशिंग और साइबर स्टॉकिंग जैसे उदाहरण शामिल हैं।बहुत लोग इस का शिकार हो जाते हैं। साइबर अपराध का अर्थ होता है कंप्यूटर या इंटरनेट के माध्यम से अपराध करना। यह अपराध आजकल बहुत बढ़ रहा है। इसमें आपकी निजी जानकारी, आर्थिक जानकारी आदि भी चोरी की जा सकती है। साइबर अपराधियों के द्वारा आपके कंप्यूटर या मोबाइल फोन को हैक करके आपकी निजी जानकारी चोरी की जा सकती है। साइबर अपराध के खिलाफ बचाव के लिए आपको सावधान रहना चाहिए और अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखना चाहिए।
साइबर अपराध की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए, हैकर एक कंप्यूटर या नेटवर्क में घुस जाता है और उसमें विभिन्न तरीकों से अपनी इच्छा के अनुसार बदलाव करता है। इस तरह से, वह अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए उस कंप्यूटर या नेटवर्क का उपयोग करता है। इसके अलावा, अन्य तरीके भी हैं जैसे फिशिंग, जहां उपयोगकर्ताओं से विश्वसनीय जानकारी जैसे उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड आदि प्राप्त की जाती है।
सबसे पहले लोगों को यह समझना होगा कि साइबर अपराध इतना बड़ चुका है। इनके मामले को सुलझाने ओर ट्रैक करने के लिए जितनी मैन्पावर चाहिए वह मुमकिन नहीं। पलीस सूत्रों से मिली जनजाति के अनुसार यह पता लग है की अकेले दवरका मैं २००० से जाड़ा शिकायत दर्ज़ हुई हैं। साइबर अपराध का प्रभाव बहुत होता है।यह लोगों को नुकसान पहुंचाता है और व्यक्तिगत जानकारी चोरी करता है। यह लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है और उनकी आत्मविश्वास को भी नुकसान पहुंचाता है इसलिए यह रोकना या रोकने की कोशिश करना बहुत आवश्यक है और लोगों को अपने साथ हुए इस तरह के क्राइम की जलद से जलद रिपोर्ट करनी होगी ताकि अपराधी कोई नुक़सान ना पहुँचा पाए।
साइबर क्राइम से बचने के लिए इन बातो का ध्यान दे
अपने फोन को सिक्योर करे, ताकि यदि फोन चोरी हो जाए या गुम जाए तो भी फोन के जरिए उनकी पर्सनल जानकारी सुरक्षित रहे|
फोन के सेफ्टी फीचर्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करे| बहुत से लोग फोन में बार बार लॉक खोलने के झंझट से बचने के लिए सिक्योरिटी फीचर का कम से कम इस्तमाल करते है जबकि फोन को सुरक्षित रखने के लिऐ यह बेहद जरूरी है है कि फोन के अलावा अपने व्हाट्सएप, सोशल मीडिया एप गैलरी आदि मे भी लॉक अप्लाई करे l
गूगल पर नंबर ढूंढते समय अलर्ट रहे l गूगल पर पहला नंबर फर्जी निकल रहा है काफी एकाइयार मैं ये साफ हो चुका है| बैंक मे रजिस्टर्ड नंबर के लिए आप एक अलग नंबर का उपयोग कर सकते है ताकि इस आपको इस नंबर को सभी को देने की ज़रूर न पढ़े
लिंक पर क्लिक करते समय या क्यूआर कोड स्कैन कर हुए अलर्ट रहे यह देख ले की क्यूआर कोड जिस अकाउंट नंबर से लिंक है वह कहा का है | इसे आपको काफी जानकारी मिल जाएगी|


HUMAN RIGHTS AND ME

 

WORLD HUMAN RIGHTS ORGANIZATION

AWARENESS AND JOINING/7011490810


Human rights are fundamental rights and freedoms that every individual is entitled to by virtue of being human. These rights are inherent, universal, and inalienable, meaning they apply to all people regardless of their race, ethnicity, nationality, religion, gender, or any other characteristic. Human rights are protected by laws, treaties, and declarations at the international, regional, and national levels.

The concept of human rights is essential because it recognizes the inherent dignity and worth of every human being and establishes a set of standards for the treatment of individuals by governments, organizations, and society as a whole. Human rights encompass a wide range of civil, political, economic, social, and cultural rights, including but not limited to:

Right to Life: Everyone has the right to life, and no one shall be arbitrarily deprived of their life.

Freedom of Expression: The right to express opinions, ideas, and information freely, without censorship or fear of punishment.

Right to Education: Everyone has the right to access education, and primary education should be free and compulsory.

Right to Equality: All individuals are equal before the law and entitled to equal protection without discrimination.

Freedom from Torture and Cruel, Inhuman, or Degrading Treatment: No one shall be subjected to torture or cruel, inhuman, or degrading treatment or punishment.

Right to Privacy: Everyone has the right to privacy and protection against unlawful interference with their personal life.

Right to Work and Fair Wages: The right to work, choose one's employment, and receive fair wages for labor.

Freedom of Religion or Belief: The right to hold and practice any religion or belief without discrimination or coercion.

Right to Health: The right to access healthcare and enjoy the highest attainable standard of physical and mental health.

Right to Freedom of Assembly and Association: The right to peacefully assemble and form associations or organizations.

Understanding human rights is crucial for every individual because they provide a framework for promoting justice, equality, and respect for all. It means acknowledging the dignity and worth of each person and treating others with fairness and compassion. It also means being aware of our responsibilities towards protecting the rights of others and standing up against human rights violations.

As a person, you have the right to enjoy these human rights and are entitled to seek remedies and justice if your rights are violated. Additionally, you have the responsibility to respect the rights of others and contribute to creating a just and inclusive society where human rights are upheld for everyone. Remember that human rights are not just abstract concepts; they have a significant impact on the way we live, interact, and coexist as individuals and as a global community.

बच्चो का दिन भर मोबाइल का शौक बना पेरेंटस का सिरदर्द

 


दिशा देसवाल/आरुषि

बच्चो में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की बढती लत से सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के माता-पिता परेशान है सबसे बड़ी परेशानी यही है कि बच्चे रोज पूरा-पूरा दिन मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं और माता-पिता इसके रोक नहीं लग पा रहे परंतु चीन बढ़ती बच्चों में मोबाइल की तेजी देखकर एक कानून बनाने जा रहा है जिसमें मोबाइल फोन के इस्तेमाल को सीमित किया जाएगा जिसमें यह बताया जा रहा है कि 16 से 18 साल के बच्चों को पूरी दिन में केवल 2 घंटे मोबाइल चलाने की इजाजत होगी जबकि 8 से 16 साल के बच्चों को एक घंटा मोबाइल इस्तेमाल करने की इजाजत होगी वही 8 साल से छोटे बच्चों को केवल 40 मिनट की इजाजत मिलेगी परंतु भारत में फिलहाल इस बारे में कोई नियम नहीं बनाया गया है

पेरेंट्स है परेशान

बच्चों की लगातार मोबाइल की आदत को देखकर तमाम पेरेंट्स हुए परेशान लिए इसे समझते हैं एक उदाहरण के जरिए एक दसवीं कक्षा के छात्र शगुन, उसके पेरेंट्स का मानना है कि स्कूल और कोचिंग आजकल सबसे बड़ी फोन चलाने की लत की वजह बन गई क्योंकि आजकल तमाम स्कूलों के ग्रुप जैसे डांस भारत मोबाइल फोन पर होते हैं कोचिंग टीचर खुद बच्चों को रिफरेंस के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के लिए बोलते हैं पेरेंट्स का कहना है कि हमारे बच्चों के पास इतनी किताबें होने के बाद भी वह फोन का इस्तेमाल करके पढ़ना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें फोन से ज्यादा जानकारी मिलती है इसी कारण से हम उन्हें चाह कर भी रोक नहीं सकते

2 घंटे में हो जाता है

जानकारी के अनुसार बच्चों का कहना है कि करीब 2 घंटे के समय में ही उनका कोई भी कम मोबाइल से पूरा हो जाता है प्रीतमपुरा स्थिति सचदेवा पब्लिक स्कूल की आठवीं क्लास में पढ़ने वाले एक छात्रा का कहना यह भी है कि हम अपना होमवर्क मोबाइल से 1 घंटे में खत्म कर सकते हैं वही बाकी के 1 घंटे हम सोशल मीडिया के अपडेट्स चेक कर सकते हैं इसलिए अगर दिन में 2 घंटे मोबाइल मिल जाए तो काफी है

टमाटर और सब्जियों के बाद अब महंगा हुआ जीरा और दाल का तड़का


आरुषि/दिशा देसवाल

नई दिल्ली, 6 अगस्त। महंगाई की मार इन दिनो दालो पर भी पड रही है।  सब्जियों और मसाले के बाद दाल की भी अब अलग महंगाई देखने को मिल रही है कुछ दालों के रेट्स तो स्थिर है लेकिन अरहर की दाल 20 से 30 प्रतिशत बढ़ चुकी है जानकारी के अनुसार व्यापारियों का कहना है कि सितंबर की शुरुआती दिनों में डाल के दाम गिरने की संभावना है सूत्रों के अनुसार पता लगा है राजस्थान और गुजरात राज्य के द्वारा दिल्ली में जीरे की सप्लाई की जाती है परंतु भारी बारिश के कारण जीरे की फसल बर्बाद हो गई है जहां जीरे के दाम 200 से 300 रुपए किलो थे अब वह बाढ़ के ₹700 प्रति किलो हो गए हैं जबकि रिटेल दुकानों पर जरा 750 से 850 रुपए किलो बिक रहा है इसके साथ-साथ हल्दी के दामों में भी महंगाई देखने को मिला जहां 2 महीने पहले यह 70 से 80 रुपए किलो बिक रहे थे वहीं इसके दाम बढ़ के 140 से 150 रुपए किलो हो गए हैं इसके अलावा बड़ी इलायची और लाल मिर्च के दाम बढ़ चुके हैं जहां पहले इलायची की कीमत 1050 वहीं अब इसकी कीमत ₹650 किलो हो चुकी है साथ ही लाल मिर्च की कीमत में ₹40 किलो की बड़ोती हुई है सूत्रों के साथ यह भी पता चला है कि बीते तीन महीना में दलों में 20% बड़ोती हुई है जानकारी के अनुसार अफ्रीकी देशों में डाल की सप्लाई अगस्त के अंत व सितंबर के शुरुआती दिनों में शुरू हो जाएगी जिस डाल के दामों की कम होने की संभावना है।

जानलेवा साबित हो सकती है सोशल मीडिया की लत


 आरुषि/राधिका शर्मा

सोशल मीडिया पर लोगों की नजरों में आना और फैन फॉलोइंग को प्राप्त करने के लिए युवा कुछ भी करने को तैयार हैं। सोशल मीडिया पर खुद को पोपुलर करने का जूनून युवाओं के सिर चढ कर बोल रहा है. इंस्टाग्राम फेसबुक यूट्यूब के लिए रील बनाने के लिए नए नए तरीके, लोकेशन और रिस्क लेना आम बात हो रही है। एक दूसरे से आगे निकलने की इस होड से काफी नुक्सान भी हो रहा है., कई जगह तो लोगो की जान तक जाने की खबरें हैं। कुछ लोग इससे डिप्रेशन के शिकार हो रहे है तो कुछ काम काज छोडकर इसकी लत में पड चुके हैं। ऐसा नहीं कि इससे शिकार लोगो में केवल युवा ही है, बल्कि हर उम्र के लोग इसके आदि होते जा रह हैं। ऐसे में, सोशल मीडिया से दूरी बनाने की जरूरत है।

सोशलिस्टस का कहना है कि युवाओं के लिए लोगों की नजरों में आना और फैन फॉलोइंग के बारे में बात करना युवाओं को आकर्षित करने का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है हालांकि सोशल मीडिया ने बहुत लोगों की सहायता भी की हैं किसी कारण से आजकल के युवा इस और आकर्षित हो रहे हैं

इन्हीं आदतों से युवाओं में डिप्रेशन के मामले दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि जब युवाओं की रील वायरल नहीं होती तो वह फ्रस्ट्रेटेड हो जाते हैं जो कि आगे जिनके डिप्रेशन में बदल जाता है आजकल लोग रियल देखकर प्रभावित होकर वैसे ही जिंदगी जीना चाहते हैं और अगर वह मुमकिन न हो तो वो निराश हो जाते हैं दूसरे साइकोलॉजिस्ट सुशांत ठाकुर बताना चाहते हैं कि इन्हीं कारणों से लोगों का ऑफलाइन सपोर्ट सिस्टम समाप्त हो जाता है इससे सोशल ब्रेन हाइनोप्सोस बोला जाता है चाचा इसे सोशल समस्याएं खड़ी हो जाती है

अगर आप डिप्रेशन में पहुंच जाते हैं क्योंकि आपके नाम और पैसा नहीं मिला जो आप चाहते थे तो आप उसे बाहर निकलने में देरी न करें इसके साथ हे साइकोलॉजिस्ट ऐश्वर्या राज का कहना है कि आपको सोशल मीडिया से दूरी बनानी चाहिए जो कि आज के समय में बहुत मुश्किल कार्य है लेकिन यदि हम प्रयास करें तो सब संभव है इसके लिए सबसे पहले खुद को तैयार करना होगा हफ्ते में दो दिन गैजेट वह मोबाइल से दूरी बनानी होगी इससे आप मोबाइल फ्री दे भी कह सकते हैं आप बाहर भी जा सकते हैं वह किताबों का सहारा भी ले सकते हैं परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत कर सकते हैं परंतु मोबाइल खुद से दूर रखें।


राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में एनईपी-2020 कार्यान्वयन की अंतर्दृष्टि


राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (NIT दिल्ली) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP - 2020) की तीसरी वर्षगांठ मनाई है। एनआईटी दिल्ली के माननीय निदेशक ने एनआईटी दिल्ली परिवार को आमंत्रित किया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) - 2020 के कार्यान्वयन में किए गए प्रगतिशील उपायों पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर अजय के शर्मा ने शिक्षा को अधिक पहुंच योग्य, सुलभ और अभिनव बनाने के लिए आधुनिक शिक्षण और शिक्षण पद्धति पर जोर दिया। प्रोफेसर शर्मा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि संस्थान को वर्ष 2023 के लिए एनआईआरएफ रैंकिंग की इंजीनियरिंग श्रेणी में 51वां स्थान दिया गया है। प्रोफेसर शर्मा ने जोर देकर कहा कि संस्थान इंजीनियरों और शोधकर्ताओं के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने का इरादा रखता है और कई नई योजनाएं और अतिरिक्त कार्यक्रम लागू किए हैं।


संस्थान ने कुशल शिक्षा के अवसर प्रदान करने के लिए निर्धारण वर्ष 2022-23 से बीटेक और एमटेक कार्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम को संशोधित किया है। छात्रों को अपने पाठ्यक्रम/कार्यक्रम की शुरुआत से ही प्रयोगशाला एकीकृत पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने का लाभ मिलेगा। संस्थान छात्रों के ज्ञान उन्नयन के लिए नियमित रूप से उद्योग विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित करता है। एनईपी-2020 को यूजी और पीजी कार्यक्रमों के लिए एकाधिक निकास/प्रवेश विकल्प के साथ लागू किया गया है। एक छात्र उस चरण में कार्यक्रम में पुनः प्रवेश ले सकता है जिस चरण में उसने कार्यक्रम छोड़ा था।

संस्थान ने बीटेक परियोजनाओं के लिए माइनर डिग्री के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।संस्थान ने बीटेक परियोजनाओं के लिए माइनर डिग्री के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छात्र चौथे सेमेस्टर के बाद छोटी डिग्री का विकल्प चुन सकता है। एक छात्र एक सेमेस्टर में अधिकतम 2 विषय पढ़ सकता है। संस्थान ने एआईएमएल, एसओसी डिजाइन और विश्वसनीयता इंजीनियरिंग आदि में माइनर डिग्री कार्यक्रम लागू किए हैं। भविष्य में उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार समय-समय पर नई माइनर डिग्री जोड़ी जाएंगी।

संस्थान ने एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) लागू किया है। पात्र उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) से संबंधित छात्र एबीसी की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। संस्थान द्वारा निर्धारण वर्ष 2022-23 से यूजी और पीजी कार्यक्रमों के छात्रों के लिए क्रमशः 3 महीने से 6 महीने/1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप लागू की गई है। छात्र की इंटर्नशिप से जुड़े किसी भी आईपीआर/व्यावसायिक विकास के कारण होने वाले किसी भी वित्तीय लाभ को संस्थान के साथ समान रूप से साझा किया जाएगा।

संस्थान ने 20% क्रेडिट तक की सीमा के साथ MOOC/ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से अध्ययन लागू किया है। माइनर डिग्री के 50% पाठ्यक्रम एमओओसी/एनपीटीईएल/कोर्सेरा आदि के माध्यम से सीखे जा सकते हैं। संस्थान सेवारत टेक्नोक्रेट्स को कौशल प्रदान करने के लिए उद्योग उन्मुख विषयों/महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जल्द ही ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू करने का इरादा रखता है।

संस्थान द्वारा अकादमिक-उद्योग-अनुसंधान (एआईआर) सिंक्रोनाइजेशन लागू किया गया है, जहां छात्रों को सह-पर्यवेक्षक के रूप में अनुसंधान संगठन/उद्योग सलाहकार की भागीदारी के साथ पीएचडी/एमटेक/बीटेक परियोजना कार्य के एक भाग के रूप में वास्तविक समय उद्योग की समस्याओं पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। एनआईटी दिल्ली का इरादा आकाशवाणी संपर्क और सहयोग के लिए संकायों की भागीदारी को अनिवार्य करने का है।

एनआईटी दिल्ली ने पिछले वर्षों में यूजी / पीजी थीसिस और अकादमिक और उद्योग / आर एंड डी विशेषज्ञों द्वारा डॉक्टरेट पर्यवेक्षण के लिए संयुक्त रूप से पर्यवेक्षण किया है. हमने पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप प्रोग्राम भी शुरू किया है. संस्थान ने छात्रों के शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए IITs / NIT / GFTI / Overseas के साथ कई समझौता ज्ञापनों में प्रवेश किया है।

संस्थान ने मेरिटोरियस छात्रों के लिए Earn While Learn स्कीम (EWL ) को भी लागू किया है, जहां जरूरतमंद छात्रों को अंशकालिक अवसर प्रदान किए जाएंगे। यह सीखने की आर्थिक कठिनाइयों को कम करने और सीखने वाले की अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास करता है. यह छात्रों को उनके व्यक्तित्व को विकसित करने, तकनीकी कौशल हासिल करने और उनकी उद्यमशीलता की क्षमता का निर्माण करने के अवसर प्रदान करता है।

संस्थान अनुसंधान प्रकाशनों / पेटेंट / परियोजनाओं के लिए संकाय / छात्रों को प्रेरित कर रहा है. हम वास्तविक समय की समस्याओं के संपर्क के लिए उद्योग / आर एंड डी संगठनों के साथ सहयोग कर रहे हैं. संस्थान प्रतिष्ठित विदेशी शैक्षणिक संस्थान (QS रैंकिंग 500) के साथ सहयोग करने के लिए भी उत्सुक है। 

NIT दिल्ली शिक्षा मंत्रालय द्वारा सुझाए गए AY 2023-24 से NCRF को लागू करने का इरादा रखता है. UG और PG कार्यक्रमों के लिए NEP-2020 के साथ पाठ्यक्रम को संशोधित और इन-लाइन किया गया है।  प्रेस कॉन्फ्रेंस ने एनईपी - 2020 के कार्यान्वयन में अब तक हुई प्रगति को उजागर करने के लिए पैनल के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों द्वारा सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाया गया इसके उद्देश्यों को प्राप्त करना।