आरुषि/राधिका शर्मा
नई दिल्ली। साइबर क्राइम की चिंता आज हर किसी
मोबाइल और कंप्यूटर चलाने वाले से लेकर इलेक्ट्रोनिक गेजेटस इस्तेमाल करने वालो को
सता रही है। कब किसका गैजेट हैक हो जाए और कब किसके बैंक खाते से उसकी खून पसीने
की कमाई निकल जाए, ये चिंता भी सबको है। इससे बचने के लिए पुलिस ने भी साइबर सेल
बनाया है और आईटी एक्सपर्टस भी जानकारी दे कर अवेयरनेस की कोशिश करते रहे हैं।
लेकिन जितनी बचाव की कोशिशें होती है, उतने ही नई तकनीक हैकर्स् यूज करने लगे है।
अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से हैकिंग और ठगी के शिकार लोगो की संख्या और बढ
गई है। आईए इसी साइबर क्राइम के कुछ पहलुओ पर चर्चा करते है और आपको बताते है कि
आखिर है क्या साइबर क्राईम।
साइबर क्राइम एक गेरकानूनी गतिविधि है। यह एक बड़ी
समस्या है, जो साइबर अपराधियों द्वारा इंटरनेट या कंप्यूटर
के माध्यम से किया जाता है। काम्प्यूटर और नेटवर्क का उपयोग करके किया गया कोई भी
अवैध गतिविधि जो अन्यथा नहीं होती है, उसे साइबर अपराध कहते हैं। इसमें
हैकिंग, आईडेंटिटी चोरी, फिशिंग और साइबर स्टॉकिंग जैसे उदाहरण
शामिल हैं।बहुत लोग इस का शिकार हो जाते हैं। साइबर अपराध का अर्थ होता है
कंप्यूटर या इंटरनेट के माध्यम से अपराध करना। यह अपराध आजकल बहुत बढ़ रहा है।
इसमें आपकी निजी जानकारी, आर्थिक जानकारी आदि भी चोरी की जा सकती
है। साइबर अपराधियों के द्वारा आपके कंप्यूटर या मोबाइल फोन को हैक करके आपकी निजी
जानकारी चोरी की जा सकती है। साइबर अपराध के खिलाफ बचाव के लिए आपको सावधान रहना
चाहिए और अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखना चाहिए।
साइबर अपराध की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
उदाहरण के लिए, हैकर एक कंप्यूटर या नेटवर्क में घुस जाता है
और उसमें विभिन्न तरीकों से अपनी इच्छा के अनुसार बदलाव करता है। इस तरह से,
वह
अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए उस कंप्यूटर या नेटवर्क का उपयोग करता है। इसके
अलावा, अन्य तरीके भी हैं जैसे फिशिंग, जहां
उपयोगकर्ताओं से विश्वसनीय जानकारी जैसे उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड आदि प्राप्त की
जाती है।
सबसे पहले लोगों को यह समझना होगा कि साइबर
अपराध इतना बड़ चुका है। इनके मामले को सुलझाने ओर ट्रैक करने के लिए जितनी
मैन्पावर चाहिए वह मुमकिन नहीं। पलीस सूत्रों से मिली जनजाति के अनुसार यह पता लग
है की अकेले दवरका मैं २००० से जाड़ा शिकायत दर्ज़ हुई हैं। साइबर अपराध का प्रभाव
बहुत होता है।यह लोगों को नुकसान पहुंचाता है और व्यक्तिगत जानकारी चोरी करता है।
यह लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है और उनकी आत्मविश्वास को भी नुकसान पहुंचाता
है इसलिए यह रोकना या रोकने की कोशिश करना बहुत आवश्यक है और लोगों को अपने साथ
हुए इस तरह के क्राइम की जलद से जलद रिपोर्ट करनी होगी ताकि अपराधी कोई नुक़सान ना
पहुँचा पाए।
साइबर क्राइम से बचने के लिए इन बातो का ध्यान
दे–
• अपने फोन को सिक्योर करे, ताकि
यदि फोन चोरी हो जाए या गुम जाए तो भी फोन के जरिए उनकी पर्सनल जानकारी सुरक्षित
रहे|
• फोन के सेफ्टी फीचर्स का ज्यादा से ज्यादा
इस्तेमाल करे| बहुत से लोग फोन में बार बार लॉक खोलने के झंझट
से बचने के लिए सिक्योरिटी फीचर का कम से कम इस्तमाल करते है जबकि फोन को सुरक्षित
रखने के लिऐ यह बेहद जरूरी है है कि फोन के अलावा अपने व्हाट्सएप, सोशल
मीडिया एप गैलरी आदि मे भी लॉक अप्लाई करे l
• गूगल पर नंबर ढूंढते समय अलर्ट रहे l गूगल
पर पहला नंबर फर्जी निकल रहा है काफी एकाइयार मैं ये साफ हो चुका है| बैंक
मे रजिस्टर्ड नंबर के लिए आप एक अलग नंबर का उपयोग कर सकते है ताकि इस आपको इस
नंबर को सभी को देने की ज़रूर न पढ़े
• लिंक पर क्लिक करते समय या क्यूआर कोड स्कैन कर
हुए अलर्ट रहे यह देख ले की क्यूआर कोड जिस अकाउंट नंबर से लिंक है वह कहा का है |
इसे
आपको काफी जानकारी मिल जाएगी|

No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.