मंदिरों को फिर से शांति का केंद्र बनाने के लिए, युवा पीढ़ी को फिर से मंदिरों में वापस लाने के लिए, भारतीय संस्कृति व सनातन सभ्यता को युवा पीढ़ी में डालने के लिए कल एक बहुत ही अद्भुत पहल करी गयी उड़ान ‘कला का महाकुंभ’ द्वारा जिसका नाम रखा गया कला गुरुकुल ।
संस्था के ट्रस्टी व विश्व प्रसिद्ध कवि श्री राजेश चेतन ने कला गुरुकुल को बदलते भारत की ज़रूरत बताया । उन्होंने कहा कि पहले के मंदिर केवल मन्नत माँगने की जगह नहीं होते थे बल्कि कला, ज्ञान और शक्ति का केंद्र होते थे । मंदिरों को फिर से कला का केंद्र बनाने के लिए भारत के हर मंदिर में कला गुरुकुल अनिवार्य कर देना चाहिए ।
वहीं दूसरी ओर संस्था के ट्रस्टी व संरक्षक और एक बड़े व्यवसायी श्री पवन कंसल ने कहा कि लोगों को फिर से जीना का ढंग सिखाएगा कला गुरुकुल ।
इस भव्य उद्घाटन में सोनोटेक म्यूज़िक कम्पनी के एम.डी श्री हंसराज रलहन व लाइयंज़ दिल्ली वेज के संस्थापक श्री गौरव गुप्ता भी मौजूद रहे ।
कला जगत की कई हँसतियों व गुरुओं की प्रस्तुतियाँ हुई व उन्हें कला गुरुकुल की ज़िम्मेदारी दी गयी ।
कार्यक्रम में संस्था के संरक्षक श्री प्रकाश चंद्र जैन, ट्रस्टी सीए डा रजनीश गुप्ता, निगम पार्षद अंजु जैन, कवियित्री बलजीत कौर भी शामिल रही । अंत में भव्य आरती के साथ कार्यक्रम का समापन करा गया ।
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