भारत ने कैसे बचाई थी एक विदेशी राष्ट्रपति की जान? ऑपरेशन कैक्टस की साहसिक कहानी


 साल 1988 में भारत ने अपनी सैन्य ताकत और तेज़ फैसले से मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी भारत की सबसे सफल विदेशी सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

दरअसल, नवंबर 1988 में मालदीव की राजधानी माले में तख्तापलट की साजिश रची गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को मारने या बंदी बनाने की योजना थी, लेकिन वे किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

हालात बेकाबू होते देख राष्ट्रपति गयूम ने सीधे भारत से मदद मांगी। उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैरा कमांडो को रातों-रात माले भेजा गया।

भारतीय सैनिकों ने लैंड करते ही एयरपोर्ट को अपने कब्जे में लिया और दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे। कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को काबू में कर लिया गया और राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पूरा ऑपरेशन 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और ताकतवर शक्ति के रूप में स्थापित किया।

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