भारत ने कैसे बचाई थी मालदीव के राष्ट्रपति की जान? ऑपरेशन कैक्टस की पूरी कहानी


  1988 में भारत ने एक साहसिक सैन्य कार्रवाई के ज़रिये मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह मिशन इतिहास में ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से दर्ज है। उस समय मालदीव की राजधानी माले में तख़्तापलट की कोशिश की गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर सरकारी इमारतों, रेडियो स्टेशन और एयरपोर्ट पर कब्ज़ा कर लिया था।

राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम किसी तरह जान बचाकर छिपने में सफल रहे, लेकिन हालात बेहद ख़तरनाक थे। मालदीव की सेना छोटी थी और विद्रोहियों के सामने टिक नहीं पा रही थी। ऐसे संकट के समय राष्ट्रपति गयूम ने भारत से तत्काल मदद की गुहार लगाई।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बिना देरी किए सैन्य हस्तक्षेप का फैसला लिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैराशूट रेजिमेंट के जवानों को रातों-रात माले भेजा गया। भारतीय कमांडो ने एयरपोर्ट पर नियंत्रण हासिल किया और कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को पीछे धकेल दिया।

भारतीय सैनिक दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस पूरे ऑपरेशन को 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। विद्रोही या तो मारे गए या गिरफ्तार कर लिए गए।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य क्षमता और विश्वसनीयता को भी साबित किया। यह मिशन आज भी भारत की तेज़, निर्णायक और जिम्मेदार विदेश नीति का प्रतीक माना जाता है।

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