मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित प्राचीन देव सूर्य मंदिर श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण का आरंभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस काल को देवताओं का दिन कहा गया है और इसी वजह से इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व होता है।
मकर संक्रांति के दिन देव सूर्य मंदिर में स्थित पवित्र सूर्य कुंड में स्नान करने के लिए हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से पापों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
यह प्राचीन मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय पूजा की जाती है। मकर संक्रांति और छठ पूजा के दौरान यहां सबसे अधिक भीड़ देखी जाती है। श्रद्धालु पहले कुंड में स्नान करते हैं, फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर परिसर में स्थित यह कुंड पूरे वर्ष जल से भरा रहता है। लोगों का विश्वास है कि इसमें औषधीय गुण हैं और इसके जल से स्नान करने पर शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन यह स्थान विशेष रूप से श्रद्धालुओं से भर जाता है।

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