राज्यसभा चुनाव को लेकर पूर्वोत्तर और मध्य भारत में राजनीतिक समीकरण तेजी से बन रहे हैं। असम में इस बार तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें दो सीटें Bharatiya Janata Party और एक निर्दलीय सांसद के पास थी। मौजूदा विधानसभा गणित को देखते हुए इस बार भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट पर Indian National Congress के प्रत्याशी के चुने जाने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम में भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और सहयोगी दलों का समर्थन उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं कांग्रेस भी एक सीट निकालने की रणनीति पर काम कर रही है।
उधर, छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं और दोनों ही कांग्रेस के पास थीं। दोनों सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने संख्या बल के आधार पर दोनों सीटें बरकरार रख पाती है या समीकरण में कोई बदलाव होता है।
राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष मतदान से अलग प्रक्रिया से होते हों, लेकिन इनका राजनीतिक संदेश दूरगामी होता है। असम और छत्तीसगढ़ के नतीजे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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