उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में विंध्य पर्वतमाला की ऊंची पहाड़ी पर स्थित Kalinjar Fort भारतीय इतिहास का एक अद्भुत और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दुर्ग रहा है। समुद्र तल से करीब 1200 फीट की ऊंचाई पर बना यह किला सदियों तक अजेय माना जाता रहा।
इसी किले की प्राचीरों के सामने 16वीं सदी के महान शासक Sher Shah Suri की आखिरी सांसें थमी थीं। शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में प्रशासनिक सुधार, सड़क निर्माण (ग्रैंड ट्रंक रोड) और मजबूत सैन्य नीति के कारण उत्तर भारत में अपनी विशेष पहचान बनाई थी।
साल 1545 में कालिंजर किले को जीतने के अभियान के दौरान उन्होंने किले पर तोपों से हमला करने का आदेश दिया। किंवदंतियों और इतिहासकारों के अनुसार, एक तोप के गोला-बारूद में अचानक विस्फोट हो गया। इस धमाके में शेरशाह गंभीर रूप से घायल हो गए। कहा जाता है कि मौत की आहट से अनजान सम्राट ने आखिरी समय तक युद्ध जारी रखने का आदेश दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई।
शेरशाह सूरी का अंत जितना अचानक था, उतना ही ऐतिहासिक भी। उनके निधन के साथ ही सूरी शासन की शक्ति कमजोर पड़ने लगी। कालिंजर का किला आज भी उस निर्णायक क्षण का साक्षी बना खड़ा है, जहां इतिहास ने करवट ली और एक महान शासक का अध्याय समाप्त हो गया।

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