फाल्गुन अमावस्या 2026 पितृ तर्पण, दान और आत्मचिंतन का विशेष दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या इस वर्ष 16 फरवरी शाम 05:34 बजे से शुरू होकर अगले दिन 17 फरवरी शाम 05:31 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, मुख्य रूप से 17 फरवरी 2026 को यह दिन मनाया जाएगा।
इस दिन पितरों की आत्मा की शांति और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए स्नान, तर्पण और दान-पुण्य अत्यंत शुभ माने गए हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग अभी भी नदी, तालाब या जलस्रोत के किनारे तिल और जल से तर्पण करते हैं। बुजुर्गों के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या केवल कर्मकांड का दिन नहीं है, बल्कि आत्म-निरीक्षण और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर भी है।
ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि इस दिन छोटे से छोटा दान भी बड़े पुण्य का कारण बनता है। दीपदान करना, जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र देना और शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा करना शुभ माना गया है।
विशेष ध्यान रखने योग्य बात यह है कि इस दिन क्रोध, विवाद और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। यह दिन परिवार और पितरों के लिए सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद लाता है।
फाल्गुन अमावस्या 2026 के अवसर पर, लोग मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां कर रहे हैं। सही विधि और नियमों के पालन से इस दिन किए गए कर्म का पुण्य पूर्ण रूप से प्राप्त होता है।

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