‘शतक’ रिव्यू: टेक्नोलॉजी के दम पर उभरी विचारधारा की कहानी, VFX से सजी एक सदी की यात्रा


 फिल्म ‘शतक’ एक विजुअली भव्य और वैचारिक रूप से केंद्रित प्रस्तुति है, जो आधुनिक तकनीक, VFX और CGI के सहारे Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के लगभग सौ वर्षों के सफर को पर्दे पर उतारती है। 1925 में नागपुर से शुरू हुए एक संगठन के विस्तार और प्रभाव को फिल्म सिनेमाई अंदाज़ में दिखाती है।

निर्देशक Ashish Mool ने कहानी को ऐतिहासिक घटनाओं के साथ जोड़ा है—K. B. Hedgewar के दौर से लेकर M. S. Golwalkar (श्री गुरुजी) के नेतृत्व काल और देश विभाजन के उथल-पुथल भरे समय तक। फिल्म में संगठन के विस्तार, चुनौतियों और वैचारिक आधार को नाटकीय और तकनीकी प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया गया है।

‘शतक’ की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी पक्ष है। ऐतिहासिक दृश्यों को CGI और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से जीवंत बनाया गया है। 1920 और 1940 के दशक का माहौल, विभाजन के दृश्य और बड़े जनसमूहों की झलकियां प्रभावशाली लगती हैं।

फिल्म स्पष्ट रूप से एक विचारधारा और संगठन की यात्रा पर केंद्रित है। जो दर्शक आधुनिक भारतीय इतिहास और वैचारिक आंदोलनों को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म दिलचस्प हो सकती है। हालांकि, फिल्म का दृष्टिकोण एकतरफा प्रतीत हो सकता है, इसलिए इसे एक सिनेमाई प्रस्तुति के रूप में देखना अधिक उपयुक्त रहेगा।

कुल मिलाकर, ‘शतक’ तकनीक और राष्ट्रवाद के संगम का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है, जो इतिहास को बड़े परदे पर प्रभावशाली अंदाज़ में पेश करता है।

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