विवादित नक्शे पर अब नेपाल को चीन की ही चाल से घेरेगा भारत!

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नेपाल सरकार ने देश के नए राजनीतिक नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को शामिल किया है। इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक रविवार को नेपाली संसद में पेश किया गया। भारत ने नेपाल के इस कदम पर सख्त नाराजगी जताई है। नेपाल को कड़ा संदेश देने के लिए भारत अब इस मुद्दे पर नेपाल को चीन की ही चाल से घेरना चाहता है।
भारत का मानना है कि नेपाल इस बात को नजरअंदाज कर रहा है कि भारत और चीन के बीच हुए समझौतों के मुताबिक लिपुलेख 1991 से बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा पर कारोबार का पॉइंट रहा है। नेपाल लिपुलेख पर अपना दावा कर रहा है।

संसद से मुहर लगने की उम्मीद
दोनों देशों के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए तेजी से राजनयिक प्रयास जारी है लेकिन इस विधेयक को नेपाली संसद की मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है। नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने ही सबसे पहले लिपुलेख को भारत के नए नक्शे में शामिल किए जाने का विरोध किया था। इसके बाद सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत विरोधी राष्ट्रवाद को हवा देने के लिए इस पर सख्त रवैया अपनाया।

नेपाल पर नजर रखने वालों का कहना है कि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार के इस कदम से दोनों देशों के लोगों के संबधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस पूरे मामले में चीन की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

भारत-चीन समझौतों की अनदेखी
हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को सूत्रों ने बताया कि भारत नेपाल के समक्ष यह बात रखेगा कि नक्शे में बदलाव के उसके फैसले में भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को नजरअंदाज किया गया है। हैरानी की बात है कि नेपाल नें 1990 के दशक से इन समझौतों पर कभी आपत्ति नहीं जताई है।


दिसंबर 1991 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ली पेंग की भारत यात्रा में दोनों देशों ने सीमा पर व्यापार बहाल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें आपसी सहमति से लिपुलेख को बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट बनाया गया था। इससे अगले साल यानी जुलाई 1992 में भारत और चीन ने सीमा पर कारोबार के लिए प्रोटोकॉल फॉर एंट्री एंड एक्जिट प्रोसीजर पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भी लिपुलेख को आपसी सहमति से बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट बनाया गया था।

बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट है लिपुलेख
11 अप्रैल, 2005 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके आर्टिकल 5 में कहा गया कि दोनों देश बॉर्डर मीटिंग पॉइंट्स के मैकेनिज्म को बढ़ाने के ईस्टर्न सेक्टर में किबिथू-दमाई और मिडल सेक्टर में लिपुलेख पास/कियांग ला को इसमें शामिल करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं।

भारत को शनिवार को उस समय झटका लगा जब नेपाली कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए संसद में संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने का फैसला किया। इस विधेयक को पिछले बुधवार को संसद में पेश किया जाना था लेकिन नेपाली कांग्रेस ने कहा कि इस मुद्दे पर वह पार्टी के भीतर चर्चा करना चाहती है। इसके बाद इस विधेयक को कार्यसूची से हटा दिया गया था।

वाइट हाउस का वो बंकर जहां हर संकट में सेफ किये जाते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

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वाशिंगटन
अमेरिका में एक अश्‍वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत से माहौल गर्मा गया है। हिंसा की आग में वहां के 30 शहर झुलसने लगे हैं। रविवार को हिंसक प्रदर्शनों की आग राष्‍ट्रपति निवास वाइट हाउस तक पहुंच गई। भारी संख्‍या में प्रदर्शनकारी वाइट हाउस के बाहर जुटे तो राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की सीक्रेट सिक्‍योरिटी को खतरा महसूस हुआ। फौरन ट्रंप को ऐसे ही हालात के लिए बिल्डिंग के नीचे बने प्रेसिडेंशियल इमर्जेंसी ऑपरेशंस सेंटर (PEOC) में ले जाया गया। हालांकि कुछ समय बाद, उन्‍हें वहां से बाहर निकाल लिया गया।
क्‍यों वाइट हाउस के नीचे बनाना पड़ा बंकर?दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान अमेरिका को डर था कि कहीं दुश्‍मन हवाई हमलों के जरिए वाइट हाउस को निशाना न बना ले। तब राष्‍ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्‍ट थे जिनकी सुरक्षा के लिए वाइट हाउस के नीचे ही 1942 में बंकर तैयार किया गया। अगर वाइट हाउस की सिक्‍योरिटी में कोई ब्रीच होता है तो राष्‍ट्रपति समेत सभी जरूरी हस्तियों को PEOC के बिल्‍कुल बगल में स्थित, एक्‍जीक्‍यूटिव ब्रीफिंग रूम ले जाया जाता है। यहां पर टीवी, फोन, हाईस्‍पीड इंटरनेट समेत कम्‍युनिकेशन के लेटेस्‍ट इक्विपमेंट्स मौजूद रहते हैं ताकि राष्‍ट्रपति अपना काम जारी रख सकें। PEOC में मिलिट्री और नान-कमिशंड ऑफिसर्स लगातार तैनात रहते हैं।
9/11 के बाद खूब चर्चा में आया था यह बंकर11 सितंबर 2001 को अमेरिका में वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर को अल-कायदा के आतंकियों ने निशाना बनाया था। दो विमान सीधे जाकर इन इमारतों से टकरा गए थे। इतिहास के सबसे भीषणतम आतंकी हमले के दौरान, तत्‍कालीन उपराष्‍ट्रपति डिक चेने, राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोजिला राइस समेत कई वरिष्‍ठ अधिकारी इसी बंकर में ले जाए गए थे। तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जॉर्ज बुश उस वक्‍त फ्लोरिडा में थे। बाद में PEOC के भीतर से उनकी भी एक तस्‍वीर सामने आई थी।

इस बंकर में क्‍या है खासचूंकि यह राष्‍ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ा मामला है इसलिए PEOC से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। विभिन्‍न रिपोर्ट्स के मुताबिक, PEOC इतना मजबूत है कि न्‍यूक्लियर धमाके को भी झेल सकता है। वाइट हाउस की ईस्‍ट विंग के नीचे स्थित यह बंकर 9/11 कमिशन की रिपोर्ट के बाद फिर से बनाया गया था। इसके कॉन्‍फ्रेंस रूप में वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग का सेटअप है। कॉन्‍फ्रेंस टेबल के ड्रॉर में टेलीफोन छिपाकर रखे जाते हैं।


अमेरिका में क्‍यों फैली है हिंसा?एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद कई शहरों में हिंसा भड़की है। वाइट हाउस के पास विरोध प्रदर्शन को देखते हुए वाशिंगटन डी.सी में कर्फ्यू लगा दिया गया है। राजधानी में फ्लॉयड की मौत के विरोध में रविवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन हुआ। मामला 25 मई का है जब एक श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन ने 46 वर्षीय फ्लॉयड को उसकी गर्दन पर घुटना रखकर पकड़ा। इस दौरान वह बार-बार कहता रहा, "मैं सांस नहीं ले सकता..प्लीज, मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं। मुझे छोड़ें।" हालांकि, बाद में पुलिस अधिकारी को थर्ड डिग्री देने और हत्या के आरोप में शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया था।

राष्ट्रपति ट्रंप की जी-7 वाला दांव चला तो बदल जाएगा दुनिया का नक्शा

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप अपने बयानों के लिए मशहूर हैं। यह दुनिया के देशों में निर्भर करता है कि वह अपने हिसाब से उसकी वैल्यू निकाल लें। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को अमीर देशों के मजबूत संगठन जी-7 में भारत की इंट्री कराने का संकेत दे दिया है। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। भारत ने राष्ट्रपति के इस कदम पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हां, राष्ट्रपति ट्रंप ने इसके जरिए एक बार चीन को नया संकेत दे दिया है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप चीन को अलग-थलग करने के लिए भारत के साथ-साथ रूस की भी जी-7 में इंट्री करा सकते हैं।

अभी जी-7 के सदस्य देशों में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी और जापान हैं। जी-7 दुनिया के अमीर और ताकतवर देशों का संगठन है। पहले यह जी-7+1 था। अमेरिका ने बाद में रूस को इस संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

राष्ट्रपति ट्रंप चाहें तो कर सकते हैं : शशांक

पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति चाहें तो ऐसा कर सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के रूख से यही लग रहा है कि अमेरिका भारत को अपनी तरफ खीचना चाह रहा है। शशांक कहते हैं कि पहले जी-7+1 (रूस) था। बाद में अमेरिका ने उसे निकाल दिया था। अब यदि राष्ट्रपति ऐसा चाहें तो कर सकते हैं। इससे भारत के लोगों को लगेगा कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी से हाथ ही नहीं मिलाते, गले ही नहीं लगाते बल्कि दिल से रिश्ता रखते हैं।

हालांकि शशांक का कहना है कि इससे चीन कुछ ज्यादा चिढ़ सकता है। लेकिन इसमें भारत को क्या करना? सदस्य बनने में कोई बुराई नहीं है। जी-7 में जापान है। आस्ट्रेलिया है। इस तरह से जापान के साथ दो देश एशिया के हो जाएंगे और अमेरिका, आस्ट्रेलिया, भारत, जापान का समूह भी कारगर हो जाएगा। शशांक का कहना है कि जी-7 में रूस को अमेरिका अनुमति दे सकता है। निश्चित रूप से इसका भी चीन पर असर पड़ेगा।

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव है, आसान नहीं: रंजीत

रंजीत कुमार का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप कुछ भी बोल देते हैं। वह जो कह देते हैं, उसमें सब सही नहीं होता। वह इस समय चीन को चिढ़ा रहे हैं। वह चीन को घेरने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे हैं। यह वक्तव्य भी उसका हिस्सा हो सकता है। वैसे भी अमेरिका में यह राष्ट्रपति का चुनावी साल है। रंजीत कुमार विदेश मामलों के गंभीर पत्रकारों में हैं। वह कहते हैं कि कदाचित ऐसा हो जाए तो अच्छा रहेगा। भारत की साख बढ़ेगी। हालांकि चीन ज्यादा चिढ़ने लगेगा।

रंजीत कुमार एक सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं जी-7 में इटली और कनाडा भी हैं। इटली चीन का बेहद करीबी देश है। भारत से रिश्ते इस समय अच्छे नहीं हैं। कनाडा भी इसी तरह से अच्छे रिश्ते नहीं रखता। कनाडा सरकार में कई खालिस्तानी नेता मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में ये दोनों देश जी-7 के विस्तार के प्रस्ताव को टाल सकते हैं।

ऐसा हुआ तो चीन की मुश्किल बढ़ेगी

रंजीत कुमार कहते हैं रूस और भारत दोनों जी-7 से जुड़ जाएं तो चीन की समस्या बढ़ सकती है। क्योंकि रूस के जुड़ने के बाद वह यूरोपीय देशों और अमेरिकी प्रतिबंधों से मुक्त हो जाएगा। उसकी शिकायत भी यही है। इसके बाद रूस को चीन के साथ खड़े रहने की मजबूरी कम दिखाई देगी। दूसरी तरफ भारत के जी-7 से जुड़ने के बाद हमारे देश का प्रभाव बढ़ जाएगा। चीन की पकड़ ढीली पड़ने लगेगी। हालांकि रूस, चीन, भारत तीनों एससीओ, ब्रिक्स, आरआईसी के भी सदस्य हैं।

कोविड 19: नहीं रहे सलमान खान के फेवरेट म्यूजिक डायरेक्टर Wajid Khan

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बॉलिवुड का सितारा वाजिद अब हमारे बीच नहीं रहे। अभिनेता सलमान खान के सबसे करीब रहे म्यूजिक डायरेक्टर वाजिद खान का निधन हो गया है। वाजिद को मुंबई के चेम्बूर स्थित अस्पताल में किडनी की गंभीर समस्या के चलते एडमिट किया गया था। वाजिद वेंटिलेटर पर थे, 31 मई की दोपहर वाजिद की तबीयत बेहद सीरियस हो गई थी और उनकी गंभीर तबीयत को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। वाजिद, पिछले कई सालों से किडनी के अलावा हार्ट की समस्या से भी जूझ रहे थे।
हालांकि वाजिद के निधन की वजह उनके किडनी की समस्या बताई जा रही है। किडनी के इलाज के दौरान जब वाजिद खान का कोरोना टेस्ट किया गया तो उनकी रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव आया था। वह एक हफ्ते से कोरोना पॉजिटिव थे।
वाजिद खान के निधन की खबर से पूरा बॉलिवुड शॉक में हैं। प्रियंका चोपड़ा, सोनू निगम, सलीम मर्चेंट सहित बॉलिवुड के तमाम अन्य कलाकारों ने ट्विटर पर वाजिद खान के निधन पर शोक व्यक्त किया है। साजिद-वाजिद के नाम से फेमस जोड़ी ने सलमान खान के साथ खूब काम किया है, हाल ही में सलमान खान के रिलीज़ हुए 2 गाने भाई-भाई और प्यार करोना को भी साजिद-वाजिद की जोड़ी में संगीतबद्ध किया था।
वाजिद खान ने सलमान खान की फिल्म 'दबंग', 'वांटड', 'वीर', 'नो प्रॉब्लम', 'गॉड तुस्सी ग्रेट हो', 'पार्टनर' सहित कई और फिल्मों में गाना भी गाया है। साजिद-वाजिद की जोड़ी ने 'एक था टाइगर', 'दबंग', 'दबंग2', 'दबंग 3', 'पार्टनर', 'सन ऑफ सरदार', 'राउड़ी राठौर', 'हाउसफुल 2' जैसी तमाम बेहतरीन फिल्मों को संगीत से सजाया है। साजिद-वाजिद की जोड़ी को सलमान खान ने अपनी फिल्मों में खूब मौके दिए थे।

लद्दाख सीमा पर तनाव: ..तो चीन की चाल के पीछे है 'सोने वाली घाटी' का खजाना

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कोरोना महामारी पर पूरी दुनिया में घिरे चीन लद्दाख सीमा के करीब नए-नए पैंतरे आजमा रहा है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच मई के शुरू से ही यहां तनातनी जारी है। चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब महज 7 दिन में ही एक नई सड़क बना ली है जो उसे उन दुर्गम इलाकों में पहुंचना आसान बना दिया है जहां माना जाता है कि काफी खनिज संसाधन हैं।

सोना जैसी कीमती धातुओं का खजाना
इस पक्की सड़क पर भारी वाहन आसानी से आ-जा सकते हैं। इस सड़क के कारण चीन की पहुंच LAC के बेहद करीब हो गई है और वह भारत को गोगरा पोस्ट के करीब तक पहुंच गया है। सैटलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि यहां सोना जैसे कीमती खनिजों का भंडार है।

3 हफ्ते में ही बना ली सड़क

चीन ने इस सड़क का निर्माण महज 3 हफ्ते में कर लिया। यह सड़क 4 किलोमीटर लंबा है और इसके जरिए चीन LAC के करीब पिछले कुछ सालों में बनाए गए सड़कों के नेटवर्क से कनेक्ट हो सकता है।

सीमा पर हथियारों का जमावड़ा
लद्दाख सीमा के करीब चीन के मंसूबे ठीक नहीं लग रहे हैं। सैटलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि इस सड़क से 10 किलोमीटर दूर चीन ने भारी हथियार जमा कर रखे हैं। सूत्रों ने बताया कि यहां एक छोटी सड़क बनी हुई है और चीन ने यहां पिछले कुछ सप्ताह में LAC तक लगती दो ब्रिज और पक्की सड़क बना ली है। इसका इस्तेमाल वाहनों और जवानों के जल्दी से आवागमन के लिए किया जा सकता है। भारतीय सीमा के भीतर पहाड़ों की छातियों में कीमती धातुओं का खजाना है।

भारत ने भी कर रखी है तैयारी

भारत ने गोगरा पोस्ट में सतर्क है और सुरक्षा बढ़ा दी है। लेकिन खनिज संसाधन से भरे इस इलाके में पहुंचने के लिए भारत के पास इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव है। सैटलाइट तस्वीरों के विशेषज्ञ कर्नल विनायक भट्ट (रिटायर्ड) का मानना है कि इस पहाड़ों में सोना हो सकता है। भट्ट ने सैटलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के बाद अनुमान लगाया है कि यहां सोना के अलावा और भी कीमती धातुएं हो सकती हैं।

गोगरा की सड़क के अलावा चीन ने पैंगोंग शो झील के करीब फिंगर-4 के नजदीक स्थायी बंकर भी बना लिए हैं। चीन इस इलाके पर लगातार दावा करता रहा है लेकिन यहां अभी तक दोनों पक्ष केवल पेट्रोलिंग करते रहे हैं। चीन के इस कदम के बाद ऐसा लग रहा है कि वह यहां कब्जा करना चाहता है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए पिछले 26 दिन से बातचीत जारी है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। गलवान घाटी और पैंगोंग शो झील के करीब चीन ने हजारों सैनिकों को तैनात कर रखा है।

अमेरिका में सड़कों पर कोहराम, 25 शहरों में लगा कर्फ्यू; इन 3 शब्दों ने लगाई लाग

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वॉशिंगटन: इस वक्त जहां अमेरिका कोरोना की महामारी से जूझ रहा है, वहीं रंगभेद से उभरे आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया है. अमेरिका में हिंसक भीड़ कई जगह दुकानों में तोड़फोड़ करके वहां पर रखा सामान लूट रही है. कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है. जिस अमेरिका में कोरोना एक लाख लोगों की जान ले चुका है, वहां ऐसी हिंसा का भड़क जाना अपने आप में गंभीर बात है. 
तीन शब्दों ने लगाई अमेरिका में आग!
दरअसल ये पूरा विवाद अब रंगभेद से जुड़कर देखा जाने लगा है. जिसकी शुरुआत एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत हुई थी जिसका वीडियो भी वायरल हो गया था. जॉर्ज फ्लॉयड नाम के व्यक्ति को पुलिस धोखाधोड़ी के आरोप में पकड़ने गई थी. जॉर्ज को देखते ही पुलिस ने उसे हथकड़ी लगाकर पकड़ने की कोशिश की. जॉर्ज ने इसका विरोध किया. विरोध के जवाब में डेरेक चॉविन नाम के एक पुलिस अधिकारी ने जॉर्ज के साथ ज़बरदस्ती की और उन्हें ज़मीन पर पटक दिया. सड़क पर खड़ी एक कार के पिछले पहिये के पास ज़मीन पर जॉर्ज पड़े थे. और उनके ऊपर चढ़े डेरेक चॉविन ने अपने बायें पैर से जॉर्ज का गला दबाया हुआ था और वो भी पूरे सात मिनट तक.  
इस दौरान जॉर्ज रोतो रहे. छटपटाते रहे और बोलते रहे कि उन्हें सांस नहीं आ रही है. मुझे छोड़ दो (I CANT BREATHE). 
इस पूरे वाकये को एक महिला ने कैमरे में कैद कर लिया. पुलिसकर्मी के लगातार गर्दन दबाए रखने की वजह से जॉर्ज की मौत हो गई और तभी से अमेरिका में शुरू हो गया.  
अमेरिका में ये पहला वाकया नहीं जब रंगभेद की वजह से ऐसा आंदोलन देखने को मिला हो. 2014 में भी ठीक इसी तरह का एक कत्ल पुलिस की हिरासत में हुआ था, तब भी मारे गए व्यक्ति के आखिरी तीन शब्द 'I CANT BREATHE' ही थे और अब ऐसा लग रहा है मानो अमेरिका में पुराना इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है. 
अमेरिका में हालात बेहद तनावपूर्ण
अब अमेरिका में हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं. मिनिपोलिस से शुरू हुआ आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है. लोगों ने उन पुलिस थानों को आग लगा दी, जहां पर आरोपी पुलिसकर्मी काम करते थे. आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन अश्वेत समुदाय के लोग आरोपियों पर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग रहे हैं. लोग चार दिन से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन इसमें दंगाइयों को भी मौका मिल गया, वो जगह जगह आग लगा रहे हैं। सिर्फ यही नहीं वो आतिशबाज़ी और डांस करके जश्न भी मना रहे हैं. 
कई जगहों पर सुपरमार्केट्स में लूटपाट
इन दंगों के बीच मिनिपोलिस शहर में कई जगहों पर सुपरमार्केट्स में लूटपाट भी हुई. दंगाइयों ने दुकानों में तोड़फोड़ करके वहां पर रखा सामान लूट लिया. अश्वेत समुदाय के लोगों ने पुलिस पर भी हमले किए. उनकी गाड़ियों को तोड़ दिया. हालत ये है कि मिनिपोलिस शहर में अमेरिका को नेशनल गार्ड लगाना पड़ा है. ये अमेरिका की सेना का अतिरिक्त सैन्यबल है, जिसे वहां पर घरेलू आपातकाल की स्थितियों में उतारा जाता है.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भी कह दिया है कि लूटमार करने पर गोली मार दी जाएगी. 
ये हालात सिर्फ मिनिपोलिस में ही नहीं है. लुईविल और अटलांटा में भी इस मूवमेंट को लेकर कई हिंसा की घटनाएं देखने को मिली जबकि पूरे अमेरिका में इस आंदोलन के तहत विरोध प्रदर्शन शुरु हो चुका है जो कि अमेरिका की इस वक्त एक और सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है. अमेरिका के लॉस एंजेलिस में भी भीड़ ने दुकानों पर धावा बोला. दंगाई लूटे हुए सामान को अपनी कारों में भरकर भी ले गए. सड़कों पर आग लगा दी गई. लूटपाट के बाद दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया.  

जानें कैसे, चीन की घेरेबंदी के बीच बढ़ रही भारत की कूटनीतिक ताकत

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भारत की कूटनीतिक ताकत लगातार बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ चीन की घेरेबंदी का संदेश दुनिया के प्रभावी देश दे रहे हैं। वहीं भारत नई वैश्विक व्यवस्था का संकेत देती दुनिया में अहम भूमिका में उभरता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी - 7 देशो के समूह को जी - 11 मे बदलने का संकेत देते हुए इसमें भारत को शामिल करने को कहा है। भारत इस ताकतवर समूह में शामिल हुआ, तो उसकी कूटनीतिक अहमियत काफी बढ़ जाएगी।
अमेरिका के सहयोग से भारत पहले भी कई अहम रणनीतिक समूहों में शामिल हो चुका है। जी - 7 मे अभी अमेरिका के साथ कनाडा, फ्रांस जर्मनी, इटली, जापान और यूके शामिल हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह जी-7 सम्मेलन को फिलहाल सितंबर तक टालने जा रहे हैं। इससे पहले वह भारत, ऑस्ट्रेलिया, रूस और दक्षिण कोरिया को बैठक के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं। बता दें कि 46वां जी-7 शिखर सम्मेलन का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 10 जून से 12 जून तक प्रस्तावित था। चीन जी - 7 और जी - 8 जैसे समूहों में शामिल नहीं है।
चीन को संदेश
अमेरिका से आए संदेश के बीच एक दूसरा प्रभावी संकेत ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने समोसा डिप्लोमेसी के जरिए दिया। उन्होंने भारतीय समोसा बनाकर ट्विटर पर पोस्ट किया। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने रविवार (31 मई) को समोसे के साथ तस्वीर पोस्ट की और कहा कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इसे साझा करना चाहेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब में कहा है कि वह कोविड-19 को हराने के बाद उनके साथ समोसे का आनंद लेंगे। ऑस्ट्रेलिया का भारत के साथ बढ़ता रुझान चीन के लिए संदेश भी है।
रणनीतिक मोर्चेबंदी बढ़ेगी
माना जा रहा है कि क्वाड में शामिल भारत और ऑस्ट्रेलिया अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करेंगें। भारत ने कोविड 19 के स्रोत की जांच के ऑस्ट्रेलियाई प्रस्ताव का समर्थन किया था। दोनों देश दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दादागिरी के खिलाफ रणनीतिक चर्चाओं में शामिल रहे हैं।
क्वाड के सदस्यों की आपसी समझ बढ़ी
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया चार देशों के समूह क्वाड के सदस्य हैं। अमेरिका इस समूह को भी ज्यादा ताकत और सैन्य स्वरूप देने की इच्छा जाहिर करता रहा है। चीन क्वाड को हमेशा अपने खिलाफ मोर्चाबंदी के रूप में देखता रहा है।
चार जून को दोनों नेताओं के बीच होगी वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन चार जून को एक वीडियो-लिंक के माध्यम से द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन में आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा होगी।
यहां भी होगा मजबूत
भारत को अगले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पांच अस्थाई सीटों में से एक मिलना करीब करीब तय है। अगले महीने नई चुनाव प्रक्रिया के तहत चुनाव होने हैं और एशिया प्रशांत सीट से इकलौता दावेदार भारत ही है। हालांकि भारत संयुक्त राष्ट्र की स्थाई सदस्यता की दावेदारी करता रहा है, लेकिन चीन सहित कुछ देश यहां भारत की राह में रोड़ा खड़ा करते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका भारत के बीच सामरिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत अमेरिका के साथ तमाम रणनीतिक वैश्विक समूहों में शामिल है।