आज की दिल्ली, योगराज शर्मा।
प्रसिद्ध भगवान श्री परशुराम मंदिर पिपरी बाजार अंबाला शहर में निर्जला एकादशी के अवसर पर जरूरतमंदों को प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी मेलकम फार्मा के मालिक दविन्द्र शर्मा ने इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते इस वर्ष मीठे जल की छबील तथा विशाल भंडारे के आयोजन को स्थगित करके जरूरतमंदोंआ को राशन एवं शरबत बांटा तथा मीठे जल से सभी की प्यास बुझाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अंबाला जिला ब्राह्मण सभा के जिलाध्यक्ष प्रदीप शर्मा धर्मपरायणता के साथ-साथ गरीबों के उत्थान के लिए दूसरों को हमेशा प्रेरित करके समाज हित और धर्म के कार्यों में लगाकर रखते हैं। अद्वैत स्वरूप परम पूज्य आरती देवा जी की कृपा और उनकी कार्यकुशलता से मुझे भी धर्म और समाज के कार्यों के लिए मौका दे रहे हैं। जिलाध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने कहा कि जयेष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है यह एक विशुद्ध धार्मिक पर्व प्राय: संपूर्ण भारत में बड़ी धूमधाम एंव श्रद्धा के साथ मनाया जाता है यूं तो हिंदू परिवारों में प्रत्येक मास की एकादशी को व्रत रखने का नियम पुरातन है जो लोग वर्ष भर की अन्य एकादशी तिथियों में उपवास नहीं रख सकते वो केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके शास्त्र दृष्टि से तत्फल के भागी हो सकते हैं पुराणों में वर्णन किया गया है कि भगवान वेदव्यास से इस एकादशी के महत्व को श्रवण करके भीम ने भी इस एकादशी को निर्जल उपवास करने का कष्टपूर्ण साहस किया था तब से इसका अवान्तर नाम भीमसेनी एकादशी भी है जब गर्मी अपनी चरम सीमा पर होती है हाथ से पानी का गिलास छूटे नहीं छूटता लोग तरह-तरह के शीतल जल पीकर अपनी प्यास को शांत करने प्रयत्न करते हैं ऐसे समय में बिना जल के दिन भर उपवास करना तप और सहिष्णुता की परायणता है भारतीय संस्कृति तपोवन की संस्कृति है उसका उदगम तप से हुआ है आत्मविश्वास की प्राप्ति इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता है दिनभर उपवास नियम निभाने से हमारे हृदय में यह विश्वास दृढ़ हो जाता है कि यदि इतने समय तक हमें अन्न जल की प्राप्ति ना हो तो भी हम जीवित रह सकेंगे जीवन में अनेकों बार ऐसी कठिनाइयों के अवसर आने पर मनुष्य घबरा उठता है परंतु एक आस्तिक मानव के लिए उस समय आत्मविश्वास ही महान बल सिद्ध होता है जो उसे कठिनाइयो से उबार देता है उपवास विषय निवृत्ति का अमोघ उपाय है अभी तो आनंदकंद श्रीकृष्णचंद्र ने श्रीमद् भगवत गीता में यह घोषणा की है कि "विषया विनिवर्तंन्ते निराहारस्य देहिन:!" निराहार उपवास व्रत धारण करने से मनुष्य के सब विषय सुगमता से निवृत्त हो जाते हैं। सभा के मुख्य सलाहकार एवं मार्गदर्शक मास्टर वेद प्रकाश कौशिक, सुभाष शर्मा एवं जोगिंद्र पाल कौशल ने दविद्र शर्मा तथा उनके परिवार द्वारा दिए जा रहे भरपूर सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा की उनके सहयोग और सेवाओं को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।

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