एक पत्र- चित्रा मुद्गल जी के नाम





( 27 जून2021)तिल भर जगह नहीं पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में मैं भी शामिल थी। ऐसे ही , अचानक से ही ये सौभाग्यशाली क्षण मेरी झोली में आ गिरे अनिल जोशी जी के कारण । मैं उनकी तहेदिल से आभारी हूँ जिनके कारण ये खुशी के अनमोल क्षण मुझे मिले। कार्यक्रम के बाद मैंने अनुरोध कर के आपका और ममता कालिया दी का नंबर लिया कि आपको बधाई दे सकूँ, फिर लगा मैं शायद फोन पर अपनी बात ठीक से समझा नहीं पाऊंगी क्योंकि दूर संचार है न।तब सोचा अपने दिल की बात पत्र द्वारा आप तक पहुँचाई जाये। इस अच्छा विकल्प और कोई नहीं पुराने समय में भी ऐसे ही पत्र चलते थे , फोन पर तो संक्षिप्त सी बात ही हो पाती है, मैं वैसे भी संकोचवश अपनी भावनायें व्यक्त नहीं कर पाती ठीक से ( इसी कारणवश कार्यक्रम में होते हुये भी बोल नहीं पाई) । आप पत्र कितने संभाल कर रखतीं हैं ये भी कार्यक्रम के माध्यम से आप द्वारा पता चला तो सोचा अपने मन की बात, आप के लिये मेरी भावनायें पत्र के माध्यम से ही व्यक्त कर दूँ ।पुराने जमाने में तो पत्र कबूतर ले जाते थे, अब न्यूज़ पेपर ले जाते हैं, इस लिये योगराज शर्मा जी को कहा कि आप मेरी भावनायें मेरी प्रिय दी को पहुँचाने में मेरी मदद करें तो वो सहर्ष तैयार हो गये और ये पत्र अपने न्यूज़ पेपर आज की दिल्ली में छाप दिया।

  दी कार्यक्रम में मैं मंत्रमुग्ध आपको देखती और सुनती रही। आप को सब बधाईयाँ दे रहे थे और आप के साथ बिताये हुये पल याद कर रहे थे पर मैं क्या बोलती, जिसने आपको सिर्फ़ तस्वीरों में देखा और पुस्तकों में पढ़ा था। मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई दिव्या स्वप्न देख रही हूँ । अंत तक पूरी कोशिश कर के भी एक शब्द नहीं बोल पाई ।आपकी आवाज़, आपकी बातें अब भी मेरे कानों में गूंज रही हैं , बड़ी उम्र के छोटे छोटे चोचले कह कर कैसे आप ने अपनी तबियत की बात को उड़ा दिया था । विद्वानों की संगत का सौभाग्य कभी-कभी मिलता है .. सच कहा था आपने और मैं उस संगत का एक क्षण भी नहीं गवाना चाहती थी। दी मैं कॉलेज से ही आपको पढ़ती आई थी, लेकिन यहाँ विदेश में पूरी बुक्स कहाँ मिल पाती हैं। मुझे 31 वर्ष हो गये यहाँ जापान में आ कर रहते हुए, इसलिए आपको मिलने का कभी सौभाग्य नहीं मिला , लेकिन अब के जब भारत आऊंगी तो आपसे जरूर मिलूँगी, ये मेरा वादा है बस आप मना मत कर देना। अप जब भी जापान आयें तो मेरे यहाँ ही रुकना, मेरी कुटिया पवित्र हो जायेगी। मैं आपसे मिलने के क्षणों का बेताबी से इंतज़ार करूँगी और अगर आपने पत्र के जवाब में दो शब्द कहे तो आपको कॉल भी करूँगी, नहीं जानती उस समय मेरे दिल की धड़कनें बढ़ जायेगी या रुक जायेगी, बहुत बेताबी से आप के उत्तर की प्रतीक्षा है

आपकी

रमा शर्मा, जापान

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