नकली मालिक, नकली आधार कार्ड, नकली खाता खोला, किसी का मकान बेच गए
कोर्ट के आदेश पर एफआईआर, आरोपियों को पकड़ नही रही है द्वारका पुलिस
नई दिल्ली। द्वारका इलाके में जालसाजी करके प्रोपर्टी बेचने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों के एक गिरोह ने एक मकान को नकली कागजों, पहचान पत्रों और नकली खाते से पैसे लेकर बेच दिया। यहां तक कि रजिस्ट्रार ओफिस ने उसकी रजिस्ट्री तक कर दी, लेकिन पोल तब खुली जब खरीददार ने सरकारी वेबसाइट से चेक किया तो पता चला कि, ये मकान तो किसी और का है, और उसने पहले से ही बेचा हुआ है।
शिकायतकर्ता आजाद भूषण जैन, सौरभ जैन, अशोक जैन आदि ने कोर्ट मे दी अपनी शिकायत में कहा है कि विनोद गुप्ता और अंकित जैन नाम के दो लोगो ने उनको बार बार कहा कि एक द्वारका सेक्टर 23 की प्रोपर्टी जिसकी कीमत करीब 5.50 करोड़ है, लेकिन वो चार करोड़ तक मिल जाएगी। काफी दिन विचार करने के बाद जब वो प्रोपर्टी देखने गए तो वहां मकान के मालिक कह कर कुछ महिलाओ और केयरटेकर वगैरा को मिलवाया, पूरा मकान दिखाया और सौदा शुरु हो गया। बयाना टोकन आदि की राशि करीब 50 लाख देकर सेल टू एग्रीमेंट बनाया गया और रजिस्ट्री की तारीख तय कर दी गई। तय तारीख को बाकि के पोस्ट डेटेड चेक देकर रजिस्ट्री के लिए कापसहेडा स्थित रजिस्ट्रार ओफिस गए, वहां बाकायदा फोटो खिंच कर रजिस्ट्री होने की स्लिप भी दे दी गई। तभी लोकड़ाउन लग गया। इस बीच खरीददार शिकायत कर्ता जैन परिवार ने सरकारी वेबसाईट को देखा तो पता चला कि ये प्रोपर्टी को किसी और को बिकी हुई है। उन्होने बिचौलिए विनोद गुप्ता और अंकित जैन को पूछा तो पहले तो वो टालमटोल करते रहे और जब मामला पुलिस के पास गया तो उन्होने फोन बंद कर दिए और गायब हो गए। पुलिस ने भी शिकायत कर्ताओ को कभी गुडगांव कभी मानेसर थाने में जाने को कहा और एफआईआर दर्ज नही की तो उन्होने द्वारका कोर्ट में शिकायत की, वहां से पुलिस को आदेश जारी किया कि एफआईआर दर्ज करें और आरोपियों को पकडा जाए। पुलिस में दलालों के अलावा बेचने वाली नकली महिलाओं के के नाम फोटो आदि सब दिए गए है, लेकिन अब तक पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है। जैन परिवार ने पुलिस कमिश्नर व डीसीपी द्वारका से मांग की है कि आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्यवाह की जाए।
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