सुपरस्टार अरविंद अकेला कल्लू, शिल्पी राज और श्वेता म्हारा स्टारर गाना 'हद कS के जो' ने मचाया धमाल, रिलीज के साथ हुआ वायरल

 


सुपरस्टार अरविंद अकेला कल्लू, शिल्पी राज और श्वेता म्हारा के नए गाने 'हद कS के जो' ने रिलीज होते ही भोजपुरी म्यूजिक वर्ल्ड में धमाल मचा दिया है। इस गाने ने कुछ ही घंटों में खूब व्यूज बटोर लिए हैं और तेजी से वायरल हो रहा है। गाना टाइम्स म्यूजिक भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल से रिलीज हुआ है। गाने में अरविंद अकेला कल्लू और शिल्पी राज की शानदार आवाज ने फैंस का दिल जीत लिया है, तो श्वेता म्हारा एक बार फिर से अपने दमदार परफॉर्मेंस के बदौलत दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब नज़र आ रही हैं। म्यूजिक वीडियो की बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी और डांस मूव्स भी इसे खास बना रहे हैं।


लिंक : https://www.youtube.com/watch?v=zz_Th1Nj9lg

गाना 'हद कS के जो' को लेकर सुपरस्टार अरविंद अकेला कल्लू ने कहा, "यह गाना मेरे दिल के बेहद करीब है। हमने इसे पूरी मेहनत और दिल से तैयार किया है, और फैंस का प्यार और सपोर्ट देखकर बहुत खुशी हो रही है। शिल्पी राज और श्वेता म्हारा के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा। हमारी पूरी टीम ने गाने को खास बनाने में बहुत मेहनत की है, और आप सभी का प्यार ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उम्मीद है कि यह गाना आप सभी को खूब पसंद आएगा और आप इसी तरह हमारा समर्थन करते रहेंगे।" उन्होंने फैंस से आग्रह किया कि वे गाने को सुनें, एंजॉय करें और अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें।

वहीं, श्वेता म्हारा ने कहा, "इस गाने का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। अरविंद अकेला कल्लू और शिल्पी राज के साथ काम करना एक शानदार अनुभव था। गाने की एनर्जी और म्यूजिक सभी को झूमने पर मजबूर कर देगा। मुझे खुशी है कि यह गाना इतने कम समय में वायरल हो गया है और लोगों से इतना प्यार मिल रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "मैं सभी दर्शकों की आभारी हूं, जो हमें इतना प्यार और समर्थन दे रहे हैं। उम्मीद है कि आप सभी को यह गाना उतना ही पसंद आएगा, जितना हमें इसे बनाने में मजा आया।"

बद्रीनाथ झा ने गाने की सफलता पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मैं सभी दर्शकों और प्रशंसकों का दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने इस गाने को इतना प्यार दिया। इस गाने पर जो प्रतिक्रिया मिली है, वह उम्मीद से कहीं ज्यादा है, और इसके लिए मैं टीम और सभी कलाकारों का आभारी हूं।"

आपको बता दें कि इस गाने के गीतकार निर्मल योगेश, संगीतकार आर्या शर्मा और निर्देशक नितेश सिंह हैं। इस गाने के लिए विशेष धन्यवाद बद्री नाथ झा को दिया गया है, जबकि इसके पी आर ओ रंजन सिन्हा हैं। डी ओ पी रियाज़ अली, कोरियोग्राफर विष्णु कुमार, एडिटर  पी. शुभम् बाबू, डीआई रोहित सिंह और मेकअप ज्योति दास हैं। वहीं, भोजपुरी म्यूजिक के फैन्स इस गाने की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री का नया हिट मान रहे हैं। अगर आपने अभी तक यह गाना नहीं सुना है, तो जरूर देखें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।

ਮਾਮਲਾ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ’ਚ ਦਸਤਾਰਧਾਰੀ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਦੀ ਕੁੱਟਮਾਰ ਦਾ

 ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਲਕਾ ਤੇ ਜਗਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ’ਚ ਵਫਦ ਵੱਲੋਂ


ਡੀ ਸੀ ਪੀ ਉੱਤਰੀ ਸੁਧਾਂਸ਼ੂ ਵਰਮਾ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ

ਮਾਮਲੇ ’ਚ ਐਫ ਆਈ ਆਰ ਦਰਜ, ਸਾਰੇ ਦੋਸ਼ੀ ਜਲਦੀ ਫੜੇ ਜਾਣਗੇ: ਕਾਲਕਾ, ਕਾਹਲੋਂ

ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ, 23 ਸਤੰਬਰ: ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ ਖਾਲਸਾ ਕਾਲਜ ਵਿਚ ਇਕ ਦਸਤਾਰਧਾਰੀ ਨੌਜਵਾਨ ਨਾਲ ਕੁੱਟਮਾਰ ਕੀਤੇ ਜਾਣ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਵਿਚ ਅੱਜ ਦਿੱਲੀ ਸਿੱਖ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸਰਦਾਰ ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਤੇ ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਸਰਦਾਰ ਜਗਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਵਫਦ ਜਿਸ ਵਿਚ ਕਾਲਜ ਦੇ ਖਜਾਨਚੀ ਇੰਦਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਕੋਛੜ ਤੇ ਹੋਰਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਡੀ ਸੀ ਪੀ ਉੱਤਰੀ ਸ੍ਰੀ ਸੁਧਾਂਸ਼ੂ ਵਰਮਾ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਅਤੇ ਦੋਸ਼ੀਆਂ ਖਿਲਾਫ ਸਖ਼ਤ ਕਾਰਵਾਈ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਗਈ।
ਮੀਟਿੰਗ ਮਗਰੋਂ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦਿਆਂ ਸਰਦਾਰ ਕਾਲਕਾ ਤੇ ਸਰਦਾਰ ਕਾਹਲੋਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿਚ ਬੀਤੀ ਰਾਤ ਐਫ ਆਈ ਆਰ ਦਰਜ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਜੋ ਧਾਰਾ 299 (ਧਾਰਮਿਕ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਨੂੰ ਠੇਸ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ), 115, 391 ਅਤੇ 35 (ਭੀੜ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਆ ਕੇ ਭੰਨ ਤੋੜ ਕਰਨੀ) ਤਹਿਤ ਦਰਜ ਹੋਈ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਡੀ ਸੀ ਪੀ ਨੇ ਭਰੋਸਾ ਦੁਆਇਆ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਵਿਚ ਧਾਰਾ 74 ਅਤੇ 75 ਹੋਰ ਜੋੜੀ ਜਾਣੀ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਚਿਨ ਤੋਮਰ ਨਾਂ ਦੇ ਮੁਲਜ਼ਮ ਖਿਲਾਫ ਐਫ ਆਈ ਆਰ ਦਰਜ ਹੋਈ ਹੈ ਜੋ ਫਰਾਰ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਉਸਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਲਈ ਛਾਪੇਮਾਰੀ ਚਲ ਰਹੀ ਹੈ।
ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਚਿਨ ਤੋਮਰ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸਦੇ ਸਾਥੀਆਂ ਖਿਲਾਫ ਵੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਜਿਹਨਾਂ ਨੇ ਕਾਲਜ ਵਿਚ ਆ ਕੇ ਦਸਤਾਰਧਾਰੀ ਨੌਜਵਾਨ ਦਾ ਨਾਮਜ਼ਦਗੀ ਪੱਤਰ ਫਾੜਿਆ ਤੇ ਉਸ ਨਾਲ ਕੁੱਟਮਾਰ ਕੀਤੀ। ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਮਾਮਲੇ ਵਿਚ ਕਾਲਜ ਦੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਵੱਲੋਂ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਤੋਂ ਮਿਲੀਆਂ ਸ਼ਿਕਾਇਤਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਵੱਲੋਂ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਲਗਾ ਕੇ ਪੁਲਿਸ ਨੂੰ ਸ਼ਿਕਾਇਤ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ ਜਿਸ ਮਗਰੋਂ ਐਫ ਆਈ ਆਰ ਦਰਜ ਹੋਈ ਹੈ।
ਸਰਦਾਰ ਕਾਲਕਾ ਤੇ ਸਰਦਾਰ ਕਾਹਲੋਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਬਹੁਤ ਹੀ ਮੰਦਭਾਗੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਕਾਲਜ ਵਿਚ ਚੋਣਾਂ ਦੇ ਨਾਂ ’ਤੇ ਕੁਝ ਲੋਕ ਬੇਹੱਦ ਘਟੀਆ ਰਾਜਨੀਤੀ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿਚ ਐਸ ਓ ਆਈ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਵੱਲੋਂ ਆ ਕੇ ਧਮਕੀਆਂ ਵੀ ਦਿੱਤੀਆਂ ਗਈਆਂ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਿਹਨਾਂ ਨੇ ਪਹਿਲਾਂ ਸਕੂਲਾਂ ਦਾ ਨਾਸ ਮਾਰਿਆ, ਹੁਣ ਉਹ ਕਾਲਜਾਂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅਸੀਂ ਕਦੇ ਵੀ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਚੋਣਾਂ ਦੇ ਹੱਕ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਸੀ ਕਿਉਂਕਿ ਅਸੀਂ ਨਹੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਸੀ ਕਿ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਵਿਚ ਆਪਸੀ ਕੁੜਤਣ ਪੈਦਾ ਹੋਵੇ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹੁਣ ਵੀ ਕੁਝ ਲੋਕ ਆਪਣੀਆਂ ਸਿਆਸੀ ਰੋਟੀਆਂ ਸੇਕਣ ਵਾਸਤੇ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਝੂਠੇ ਤੇ ਬੇਬੁਨਿਆਦ ਬਿਆਨ ਦੇ ਰਹੇ ਹਨ ਤੇ ਘਟੀਆ ਰਾਜਨੀਤੀ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ ਜਿਸਦੀ ਜਿੰਨੀ ਵੀ ਨਿਖੇਧੀ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਥੋੜ੍ਹੀ ਹੈ।
ਉਹਨਾਂ ਇਹ ਵੀ ਭਰੋਸਾ ਦੁਆਇਆ ਕਿ ਇਸ ਮਾਮਲੇ ਵਿਚ ਕਾਲਜ ਦੇ ਆਪਣੇ ਜੋ ਵੀ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਦੋਸ਼ੀ ਪਾਏ ਜਾਣਗੇ, ਨਿਯਮਾਂ ਮੁਤਾਬਕ ਉਹਨਾਂ ਖਿਲਾਫ ਠੋਸ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਕੋਈ ਲਿਹਾਜ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ।

डॉ अनिल मलिक जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन - राजेश भाटिया


 गरीब बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए समर्पित किया गया यह स्कूल -  राजेश भाटिया


आज डॉ अनिल मलिक श्री सनातन धर्म महाबीर दल के संस्थापक स्व0 डॉ रघुनाथ राय के पुत्र डॉ अनिल मलिक की 74वीं जयंती के उपलक्ष पर उनके भाई विनोद कुमार मलिक के द्वारा सिद्धपीठ हनुमान मंदिर श्री सनातन धर्म महाबीर दल मार्केट नंबर 1 फरीदाबाद में हवन का आयोजन किया गया। मंदिर व स्कूल के प्रधान राजेश भाटिया ने उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
मंदिर के प्रधान राजेश भाटिया ने बताया की डॉ अनिल मलिक ने 1972 में इस स्कूल जिसका पुराना नाम श्री सनातन महाबीर दल स्कूल था का निर्माण करवाया तथा गरीब बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए समर्पित कर दिया। किंतु वर्ष 1981 में डॉ अनिल मलिक का दुर्घटना में स्वर्गवास हो गया तत्पश्चात डॉ रघुनाथ राय ने इस स्कूल का नाम अपने पुत्र के नाम से डॉ अनिल मलिक श्री सनातन धर्म महाबीर दल स्कूल रख दिया। लगभग 44 साल के उपरांत भी डॉ अनिल मलिक को उनका परिवार उनके जन्म दिवस एवं मरण दिवस पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करना नहीं भूलते। और इन दोनों दिनों पर हवन व बच्चों के लिए प्रसाद का आयोजन किया जाता है।
आज उनकी जयंती पर स्कूल के अध्यापकगण में सोनिया अरोड़ा, सुमन अरोड़ा, रेखा ज़ोहरा, रजनी बजाज, रेखा वाधवा, सीमा भाटिया, सुनीता गगर, मान्या रतड़ा, संदीप कौर, मोनिका विरमानी, अशोक बैसला, विकास शर्मा, प्रवेश भाटिया, अनु भटिया, नेहा चौहान, चाहत, हिमानी, शोभा शर्मा, सोनिया ठुकराल, नीलम सचदेवा, नीतू भाटिया, आशु अरोड़ा, जतिन गांधी, रिंकल भाटिया व अन्य शामिल रहे।

Women's roles and human Rights are deeply intertwined and crucial for achieving gender equality and social justice. Historically, women have often been marginalized in various spheres—political, economic, and social. However, their roles have evolved significantly over time, especially with movements advocating for women's rights. WORLD HUMAN RIGHTS ORGANIZATION (REGISTERED WITH GOVT. OF INDIA AND EUROPE-BELGIUM) Key Aspects: 1. Political Participation: Women's involvement in politics has increased, leading to greater representation and influence in decision-making processes. Countries with higher female political representation tend to prioritize gender-sensitive policies. 2. Economic Empowerment: Access to education and job opportunities has allowed women to contribute to the economy. Microfinance and entrepreneurship programs have empowered many women, fostering independence and economic growth. 3. Health and Reproductive Rights: Women's health is a crucial aspect of human rights. Access to healthcare, including reproductive rights, is essential for women's autonomy and well-being. 4. Violence Against Women: Addressing gender-based violence is vital for safeguarding women's rights. International frameworks, like the Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination Against Women (CEDAW), aim to combat such violence and discrimination. 5. Intersectionality: Women's experiences are diverse and shaped by factors like race, class, and sexuality. An intersectional approach recognizes these complexities, ensuring that policies address the needs of all women. 6. Education: Education is a powerful tool for empowerment. Promoting girls' education not only benefits individuals but also communities and societies by enhancing economic development and reducing poverty. 7. Global Movements: Movements such as #MeToo and Time's Up have highlighted issues of sexual harassment and gender inequality, sparking global conversations and reforms. Conclusion Promoting women's rights is essential for building equitable societies. Efforts must continue to ensure that women can fully participate in all areas of life, and that their rights are recognized and protected universally. The journey toward gender equality involves challenging existing norms, advocating for policy changes, and fostering a culture of respect and equity for all. WHRO/7011490810/WHATSAPP/JOINING


विनोद कुमार सिंह,स्वतंत्र पत्रकार                            विश्व के विशालत्तम लोकतंत्र भारत के चहूँ दिशाओं में एक ही गरमा गर्म चर्चा व चिन्तन हो रही है।अब यह मुद्दा लोकतंत्र का महापर्व चुनाव तक  सीमित ना रह कर राजनीतिक दलों में बहस का मुद्दा बन गया है।विगत दिनों मोदी कैबिनेट ने वन नेशन वन इलेक्शन के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद वन नेशन-वन इलेक्शन' के लाभ और नुकसान पर गर्मा गर्म बहस छिड़ सी गई है।ऐसे मे *जनता जर्नादन के कई सबाल एक नेशन एक इलेक्शन के कितने लाभ और कितने नुकसान,मोदी सरकार व सतारूढ़ सहयोगी राजनीतिक दलो के लिए यह मोदी मिशन है,वही काँग्रेस समेत 15विपक्षी राजनीतिक दलों व क्षेत्रीय दलों के लिए टेशन है ।*
आप को बता दे कि एक राष्ट्र-एक चुनाव की नीति के तहत लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे।इस संदर्भ में मोदी सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र यानी नवंबर -दिसंबर में इस बारे में बिल पेश करेगी।सर्व विदित रहे कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व वाली कमेटी ने इस पर मार्च में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।कमेटी ने सिफारिश की थी कि लोकसभा और राज्यों के विधान सभा चुनाव एक साथ संपन्न होने के100 दिन के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव हो जाने चाहिए।वन नेशन-वन इलेक्शन का मतलब है कि भारत में लोक सभा और सभी राज्यों के विधान सभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। साथ ही स्थानीय निकायों के चुनाव भी एक ही दिन या एक तय समय सीमा में कराए जाएं।पी एम मोदी लंबे समय से वन नेशन वन इलेक्शन की वकालत करते आए हैं।उन्होंने कहा था कि चुनाव सिर्फ तीन या चार महीने के लिए होने चाहिए,पूरे 5 साल राजनीति नहीं होनी चाहिए। साथ ही चुनावों में खर्च कम हो और प्रशासनिक मशीनरी पर बोझ न बढ़े।इसके पीछे मोदी सरकार का तर्क है कि इससे जनता को बार-बार के चुनाव से मुक्ति व चुनावी खर्च बचेगा और वोटिंग परसेंट में इजाफा होगा।सरकारें बार-बार चुनावी मोड में जाने की बजाय विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।प्रशासन को भी इसका फायदा मिलेगा,
अधिकारियों का समय और एनर्जी बचेगी।इसका बड़ा आर्थिक फायदा भी है।सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी।आप के सबाल होगे कि वन नेशन-वन इलेक्शन का सुझाव किसने व कब दिया।आपको बता दे कि केन्द्र सरकार नें विगत दिनों पूर्व वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को कमेटी बनाई गई थी।कोविंद की कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह,पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद,जाने माने वकील हरीश साल्वे,कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी,15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, पॉलिटिकल साइंटिस्ट सुभाष कश्यप,पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) संजय कोठारी समेत 8 मेंबर हैं।केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कमेटी के विशेष सदस्य बनाए गए हैं।कमेटी ने इसके लिए 62 राजनीतिक पार्टियों से संपर्क किया।इनमें से 32 पार्टियों ने वन नेशन वन इलेक्शन का समर्थन किया।वहीं,15 दलों ने इसका विरोध किया था।जबकि15 ऐसी पार्टियां भी थीं,जिन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।191दिन की रिसर्च के बाद कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी. कमेटी की रिपोर्ट 18 हजार 626 पेज की है।कोविंद समिति के सिफारिशें पर नजर डाल लेते है।               *वन नेशन -वन इलेक्शन की ओर बढ़ने के लिए सरकार को एक बार ही एक बड़ा कदम उठाना होगा।
*इसके तहत केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव 2029 के बाद एक तारीख तय करेगी ।
*इस तारीख पर ही सभी राज्यों की विधानसभाएं भंग हो जाएंगी. 
-इसके बाद पहले फेज में लोकसभा के टर्म के हिसाब से सभी विधानसभाओं के चुनाव कराए जाएंगे ।
*इसके 100 दिन के अंदर दूसरे फेज में नगर निकाय और पंचायत चुनाव कराए जाएंगे ।
*इन सभी चुनावों के लिए एक ही वोटर लिस्ट होगी।
*लोकतंत्र में कोई सरकार गिर भी सकती है. ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के कारण लोकसभा या किसी विधानसभा के भंग होने पर ये सुझाव दिया गया है कि नए चुनाव उतने ही समय के लिए कराए जाएं, जितना समय सदन का बचा हुआ है।                                     *इसके बाद लोकसभा के साथ फिर नए सिरे से चुनाव कराए जाएं ।
*इस कानून को पास कराने के लिए 18 संवैधानिक संशोधन ज़रूरी होंगे ' ज़्यादातर संशोधनों में राज्यों की मंज़ूरी जरूरी नहीं है ।
*इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले देश भर में जनता और अलग-अलग नागरिक संगठनों की राय ली जाएगी 
वन नेशन वन इलेक्शन के रास्ते में सबसे पहले तो संसद में ही चुनौती आएगी।एक देश एक चुनाव के लिए कई संवैधानिक संशोधनों की ज़रूरत होगी।इसके लिए संसद के दोनों ही सदनों में सरकार के सामने दो-तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती है। *राज्यसभा में सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है।245 सीटों में से एन डी ए (NDA)को 112 सीटें ही हासिल हैं,जबकि दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 पर होगा।
*लोकसभा में भी 543 सीटों में से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है,जबकि एनडीए (NDA)के पास 292 सीटें ही हैं।हालांकि,दो-तिहाई बहुमत का फैसला वोटिंग में हिस्सा लेने वाले सदस्यों की संख्या के आधार पर तय होता है।
*वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर संघवाद की चिंता भी है।कुछ जानकारों का कहना है कि इससे भारत की राजनीतिक व्यवस्था के संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा।राज्य सरकारों की स्वायत्तता कम होगी । विधि आयोग भी मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में एक साथ चुनाव की व्यावहारिकता पर सवाल उठा चुका है।
*व्यावहारिक तौर पर देखा जाए तो एक साथ चुनाव कराने में भारी मात्रा में संसाधनों की ज़रूरत पड़ेगी, जिसका इंतजाम करना चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है। एक साथ चुनाव कराने के लिए बड़ी मात्रा में ई बी एम(EVM)और ट्रेंड लोगों की ज़रूरत पड़ेगी.ताकि पूरी चुनावी प्रक्रिया ठीक से पूरी की जा सके ।
*वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का भी सवाल है।अक्सर होने वाले चुनावों के ज़रिए जनता समय-समय पर अपनी पसंद तय कर सकती है, लेकिन अगर सिर्फ 5 साल बाद ऐसा होगा,तो जनता की इस पसंद को ज़ाहिर करने में दिक्कत आएगी.
*इससे एक पार्टी के प्रभुत्व का ख़तरा बढ़ जाएगा।कई अध्ययन बताते हैं कि जब भी एक साथ चुनाव होते हैं,तो एक ही पार्टी के राष्ट्रीय और राज्य चुनावों के जीतने की संभावना बढ़ जाती है।जिससे स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों में घालमेल हो जाता है।                              *वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर कई कानूनी पेचीदगियां हैं।कई जानकारों का कहना है कि एक देश एक चुनाव के कानून को कई संवैधानिक सिद्धांतों पर भी खरा उतरना पड़ेगा।अगर एक देश,एक चुनाव होता है तो ये चुनाव प्रक्रिया पांच साल में एक ही बार होगी या फिर बीच में कुछ विधानसभाएं भंग हुईं,तो उतनी बार चुनाव होंगे।समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि त्रिशंकु स्थिति या अविश्वास प्रस्ताव या ऐसी किसी स्थिति में नयी लोकसभा के गठन के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं।समिति ने कहा कि लोकसभा के लिए जब नये चुनाव होते हैं,तो उस सदन का कार्यकाल ठीक पहले की लोकसभा के कार्यकाल के शेष समय के लिए ही होगा।जब राज्य विधानसभाओं के लिए नए चुनाव होते हैं,तो ऐसी नयी विधानसभाओं का कार्यकाल(अगर जल्दी भंग नहीं हो जाएं)लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल तक रहेगा।समिति ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 83(संसद के सदनों की अवधि)और अनुच्छेद172(राज्य विधानमंडलों की अवधि)में संशोधन की आवश्यकता होगी।समिति ने कहा,'इस संवैधानिक संशोधन की राज्यों द्वारा पुष्टि किए जाने की आवश्यकता नहीं होगी।उसने यह भी सिफारिश की कि भारत निर्वाचन आयोग राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से एकल मतदाता सूची और मतदाता पहचान पत्र तैयार करे। समिति ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए मतदाता सूची से संबंधित अनुच्छेद 325 को संशोधित किया जा सकता है।आप को बता दें कि वन नेशन-वन इलेक्शन व्यवस्था लागू करने में चुनौतियां भी कम नहीं है।एक देश एक चुनाव के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। इसके बाद इसे राज्य विधानसभाओं से पास कराना होगा।वैसे तो लोक सभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल पाँच साल का होता है लेकिन इन्हें पहले भी भंग किया जा सकता है।सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि अगर लोक सभा या किसी राज्य की विधानसभा भंग होती है तो एक देश,एक चुनाव का क्रम कैसे बनाए रखें।अपने देश में ईवीएम और वीवीपैट से चुनाव होते हैं,जिनकी संख्या सीमित है।लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अलग-अलग होने से इनकी संख्या पूरी पड़ जाती है।एक साथ लोक सभा और विधानसभाओं के चुनाव होंगे तो अधिक मशीनों की जरूरत पड़ेगी।इनको पूरा करना भी चुनौती होगी।देश में एक साथ चुनाव के लिए ज्यादा प्रशासनिक अफसरों और सुरक्षाबलों की जरूरत को पूरा करना भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आएगा।
 हम आपको बता दें कि वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए सभी राजनीतिक दलों के अलग-अलग विचार हैं,इस पर एक राय नहीं बन पा रही है।कुछ राजनीतिक दलों का मानना है कि ऐसे चुनाव से राष्ट्रीय दलों को तो फायदा होगा,लेकिन क्षेत्रीय दलों को इससे नुकसान होगा।खासकर क्षेत्रीय दल इस तरह के चुनाव के लिए तैयार नहीं हैं। इनका यह भी मानना है कि अगर वन नेशन-वन इलेक्शन की व्यवस्था की गई तो राष्ट्रीय मुद्दों के सामने राज्य स्तर के मुद्दे दब जाएंगे।
केंद्रीय कैबिनेट ने सर्वसम्मति से ये प्रस्ताव पास किया है।मोदी सरकार के लिए वन नेशन वन इलेक्शन एक मिशन है।वन नेशन वन इलेक्शन का बीजेपी(BJP,)जेडीयू (JDU)ए आई ए डी एम के (AIADMK)ए न पी पी(NPP,)बी जे डी(BJD)अकाली दल,एल जे पी (आर(LJP(R)अपना दल (सोनेलाल)ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन,असम गण परिषद व शिवसेना (शिंदे गुट)ने समर्थन किया है।खास बात ये है कि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी X पर पोस्ट करते वन नेशन वन इलेक्शन का सपोर्ट किया है। मायावती ने इसे पार्टी का पॉजिटिव स्टैंड बताया है।वही सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के संग समाजवादी पार्टी (SP)आम आदमी पार्टी(AAP) सीपीएम(CPM)सी पी आई (CPI)टी एम सी(TMC)डी एम के (DMK)ए आई एम आई एम (AIMIM )व सी पी आई-एम एल (CPI-ML)समेत15दल इसके खिलाफ है।जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा(JMM)इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग(IUML)समेत15दलों ने वन नेशन वन इलेक्शन पर कोई जवाब नहीं दिया।आपके मन में प्रशन उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तविक मे वन नेशन -वन इलेक्सन लागु हो सकता है तो हम आप को बता दे कि कई देशों में  एक साथ चुनाव होते हैं।दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रीय और प्रांतीय चुनाव हर 5 साल पर एक साथ होते हैं।स्थानीय निकाय चुनाव दो साल बाद होते हैं ।
*स्वीडन में राष्ट्रीय,प्रांतीय और स्थानीय चुनाव हर चार साल पर एक साथ होते हैं।
*इंग्लैंड में भी संसद कार्यकल र्निधारित अवधि अधिनियम2011 (Fixed-term Parliaments Act,2011)के तहत चुनाव का एक निश्चित कार्यक्रम है।वही जर्मनी और जापान की बात करें,तो यहां पहले पीएम का सिलेक्शन होता है,फिर बाकी चुनाव होते हैं।इसी तरह इंडोनेशिया में भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव साथ में होते हैं।अपने देश में आजादी के बाद से 1952,1957,1962 और 1967 में दोनों चुनाव एक साथ हुए थे,यानि 1967 तक लोकसभा और विधान सभा के चुनाव एक साथ कराए जाते थे,लैकिन विषम परिस्थितियों उत्पन्न होने के कारण इस व्यवस्था में परिवर्तन किया गया।क्योंकि संघीय व्यवस्था व राज्यो की स्वायता व आश्यकता को ध्यान में रखकर कर किया गया है।परिणाम स्वरूप भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों का जन्म हुआ,कालान्तार में क्षेत्रीय दलों नें स्थानीय मुद्दों को उठाया है तथा कई राज्यों में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को सता से सिंधासन से दुर रखते हुए सरकार बनाई व केन्द्र सरकार बनाने में भी अपनी अंहम भुमिका निभाई है।वही भारतीय राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले राजनीतिक पंडितयों में भी दबी जुबान से चर्चा होने लगी है कि मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सरकार तो किसी तरह बना ली है। लैकिन जनता के मध्य मोदी मैजिक की चमक फीकी हुई उनकी लोक प्रियता में कमी है।जिन के कारण केन्द्र की भाजपा व सहयोगी दलों चिन्ता की लकीरें स्पष्ट नजर आने लगी है।ऐसे मोदी सरकार जनता के समाने चुतराई के चक्र से वन नेशन - वन इलेक्शन च चक्रब्यहु के झाल  फैसा कर केन्द्र के संग राज्यों की सता व सिंधासन आसीन हो का दिवा स्वपन्न देख रही है।क्योंकि इनके पास भोली भाली जनता के शँखों में धुल झोकने के लिए कोई मुद्दे नही रह गये है।वही  देश की जनता महंगाई,बेरोजगारी त्रस्त है।वैसे भी एक राष्ट्र - एक चुनाव की नाव चुनौतीयों  से भरा हुआ है। जिसकी असली पतवार जनता जर्नादन के पास है। जिसकी झलक भारतीय मतदाताओं हाल में ही लोक सभा साधारण चुनाव 24 के दौरान दे कर " अबकी 400 पार का सपना चकना चुर कर दिया है।वन नेशन वन इलेक्शन को लागु करना साहिब के लिए इतना आसान नही है।जितना वे समझ रहे,क्योंकि ये पब्लिक है ,पब्लिक साहिब ये सब जानती है।                         नोट-लेखक स्वतंत्र पत्रकार व स्तम्भकार है।  

Women's roles and human Rights

 


Women's roles and human Rights are deeply intertwined and crucial for achieving gender equality and social justice. Historically, women have often been marginalized in various spheres—political, economic, and social. However, their roles have evolved significantly over time, especially with movements advocating for women's rights.

WORLD HUMAN RIGHTS ORGANIZATION

(REGISTERED WITH GOVT. OF INDIA AND EUROPE-BELGIUM)

Key Aspects:

1. Political Participation: Women's involvement in politics has increased, leading to greater representation and influence in decision-making processes. Countries with higher female political representation tend to prioritize gender-sensitive policies.

2. Economic Empowerment: Access to education and job opportunities has allowed women to contribute to the economy. Microfinance and entrepreneurship programs have empowered many women, fostering independence and economic growth.

3. Health and Reproductive Rights: Women's health is a crucial aspect of human rights. Access to healthcare, including reproductive rights, is essential for women's autonomy and well-being.

4. Violence Against Women: Addressing gender-based violence is vital for safeguarding women's rights. International frameworks, like the Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination Against Women (CEDAW), aim to combat such violence and discrimination.

5. Intersectionality: Women's experiences are diverse and shaped by factors like race, class, and sexuality. An intersectional approach recognizes these complexities, ensuring that policies address the needs of all women.

6. Education: Education is a powerful tool for empowerment. Promoting girls' education not only benefits individuals but also communities and societies by enhancing economic development and reducing poverty.

7. Global Movements: Movements such as #MeToo and Time's Up have highlighted issues of sexual harassment and gender inequality, sparking global conversations and reforms.

Conclusion

Promoting women's rights is essential for building equitable societies. Efforts must continue to ensure that women can fully participate in all areas of life, and that their rights are recognized and protected universally. The journey toward gender equality involves challenging existing norms, advocating for policy changes, and fostering a culture of respect and equity for all.

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World Human Rights Organization


 There is no greater religion than humanity; politics and participation are secondary to this fundamental truth. While we all concern ourselves with rights, do we also talk about our responsibilities? Probably not. We cannot escape our responsibilities. There is always an observer watching our actions. What do we do for society, our country, and humanity? Do we contribute our time, money, effort, and willpower? No judge is greater than our own conscience. If we reflect on ourselves, we will understand what we do, what we should be doing, and what we should avoid.


It is a timeless truth that we come into this world with clenched fists and leave with open hands; nothing goes with us. After death, our possessions may benefit others, but can we not help someone while we are alive? Can we not perform good deeds? It is entirely possible; we just need to have a big heart and a spirit of giving.


Our organization, the World Human Rights Organization, is dedicated to serving humanity in such a manner. To learn more, please visit our website or contact us on WhatsApp for complete information. If you resonate with our mission, we invite you to join us.


WhatsApp: +91 7011490810

तिरुपति धाम के लड्डुओं में पशु चर्बी इस्तेमाल के संदर्भ में सद्बुद्धि आने और राष्ट्र उत्थान के लिए सपना गोयल की अगुआई में रविवार 22 सितम्बर को सामूहिक सुंदरकांड किया गया

 


29 सितम्बर को कृष्णानगर में 3,000 मातृशक्तियों करेंगी सुंदरकाण्ड महायज्ञ

 

तिरुपति धाम के लड्डुओं में पशु चर्बी इस्तेमाल के संदर्भ में सद्बुद्धि आने और राष्ट्र उत्थान के लिए सपना गोयल की अगुआई में रविवार 22 सितम्बर को सामूहिक सुंदरकांड किया गया

 

लखनऊ 22 सितम्बर 2024 रविवार। “ईश्वरीय स्वप्नाशी सेवा समिति” की सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुआई में आगामी रविवार 29 सितम्बर 2024 को कृष्णानगर के उत्तम लॉन में तीन हजार मातृशक्तियों द्वारा सुंदरकाण्ड महायज्ञ किया जाएगा। यह जानकारी रविवार 22 सितम्बर को भूतनाथ मार्केट के बी-209, सावित्री प्लाजा में आयोजित मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी में सपना गोयल ने दी। तिरुपति धाम के लड्डुओं में पशु चर्बी इस्तेमाल के संदर्भ में सद्बुद्धि आने और राष्ट्र उत्थान के लिए, सपना गोयल की अगुआई में रविवार 22 सितम्बर को सामूहिक सुंदरकांड भी किया।

सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल के अनुसार भारत वर्ष, देवों द्वारा निर्मित है और भरत की भूमि, ऋषि मुनियों की जन्मस्थली है। ऐसे में वह सतत प्रयास कर रही हैं कि भारत को उसका पुराना वैश्विक गौरव प्राप्त हो और भारत पुन: विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो। उनके अनुसार इसके लिए सबसे पहले जरूरी है कि संकल्पित होकर प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ और हर मंगलवार और शनिवार को निकट के मंदिर में जाकर सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया जाए। उन्होंने बताया कि अयोध्याजी जन्मभूमि परिसर में मातृशक्तियों द्वारा सामूहिक “मासिक सुंदरकाण्ड पाठ” का सिलसिला 11 सितम्बर से शुरू हो गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से लखनऊ की “ईश्वरीय स्वप्नाशी सेवा समिति” की सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल को इसका दायित्व सौंपा गया है। इस क्रम में दूसरा सामूहिक सुंदरकांड का पाठ आगामी 15 अक्टूबर दिन मंगलवार को अयोध्या में जन्मभूमि परिसर में किया जाएगा। इसके साथ ही संकल्प के अनुसार जल्द ही अयोध्याजी में पांच हजार मातृशक्तियों द्वारा सामूहिक सुंदरकांड पाठ का वृहद आयोजन भी किया जाएगा।

सपना गोयल द्वारा बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के, बीते 10 मार्च को महिला दिवस के उपलक्ष्य में पांच हजार से अधिक मातृशक्तियों द्वारा लखनऊ के झूलेलाल घाट पर सामूहिक सुंदरकांड का भव्य अनुष्ठान सम्पन्न करवाया गया था। सामूहिक सुंदरकांड का अभियान राष्ट्रीय स्तर पर वृहद रूप में निरंतर संचालित किया जा रहा है। इसके तहत नैमिषारण्य तीर्थ और उत्तराखंड कोटद्वार के प्रतिष्ठित प्राचीन मंदिर, सिद्धबली परिसर में भी सामूहिक सुंदरकांड पाठ का अनुष्ठान, सफलतापूर्वक आयोजित करवाया जा चुका है। यह अभियान देश ही नहीं विदेशों तक में संचालित किया जा रहा है।


ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਕਾਲਜ ਆਫ ਕਾਮਰਸ, ਪ੍ਰੀਤਮਪੁਰਾ ਵਿੱਚ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਸੰਘ ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦਿੱਲੀ ਸਟੇਟ ਦੀ ਟੀਮ ਐਸਓਡੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਸਫਲਤਾ: ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਲਕਾ, ਜਗਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ

 


ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ, 22 ਸਤੰਬਰ: ਦਿੱਲੀ ਸਿੱਖ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸਰਦਾਰ ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਲਕਾ ਅਤੇ ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਸਰਦਾਰ ਜਗਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਕਾਲਜ ਆਫ ਕਾਮਰਸ, ਪ੍ਰੀਤਮਪੁਰਾ ਵਿੱਚ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਸੰਘ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦਿੱਲੀ ਸਟੇਟ ਦੀ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਇਕਾਈ ਐਸਓਡੀ ਨੂੰ ਵੱਡੀ ਸਫਲਤਾ ਮਿਲੀ ਹੈ। ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ 6 ਵਿੱਚੋਂ 5 ਬਿਨਾਂ ਮੁਕਾਬਲੇ ਚੁਣੇ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ ਛੇਵੀ ਸੀਟ ਵੀ ਜਲਦੀ ਹੀ ਐਸਓਡੀ ਦੇ ਖਾਤੇ ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਏਗੀ।


ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪ੍ਰਧਾਨ ਦੇ ਅਹੁਦੇ ਲਈ ਗੁਰਸਿਮਰ ਸਿੰਘ, ਉਪ ਪ੍ਰਧਾਨ ਅਹੁਦੇ ਲਈ ਪ੍ਰਭਗੁਣ ਸਿੰਘ, ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਅਹੁਦੇ ਲਈ ਪ੍ਰਭਜੀਤ ਸਿੰਘ, ਸੀਸੀ ਅਹੁਦਿਆਂ ਲਈ ਸੁਬੇਗ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਕਸ਼ਮੀਰਾ ਸਿੰਘ ਬਿਨਾਂ ਮੁਕਾਬਲੇ ਜਿੱਤ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ ਜੁਆਇੰਟ ਸਕੱਤਰ ਦੇ ਅਹੁਦੇ ਲਈ ਵੀ ਜਲਦੀ ਹੀ ਐਸਓਡੀ ਦੇ ਉਮੀਦਵਾਰ ਦੀ ਘੋਸ਼ਣਾ ਹੋਵੇਗੀ।

ਉਹਨਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਅਸੀਂ ਦਿੱਲੀ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਮੇਟੀ ਵਲੋਂ ਨਹੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਸਨ ਕਿ ਚੋਣਾਂ ਹੋਣ, ਪਰ ਵਿਰੋਧੀ ਕਾਲਜ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਖਰਾਬ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਸਨ। ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਆ ਕੇ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦੇ ਨੁਮਾਇੰਦਿਆਂ ਨੇ ਪ੍ਰੈਸ ਕਾਨਫਰੰਸ ਕੀਤੀ। ਸਾਨੂੰ ਮਜਬੂਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ, ਇਸ ਕਰਕੇ ਅਸੀਂ ਫੈਸਲਾ ਲਿਆ, ਅਤੇ ਅੱਜ ਸਾਡੇ ਪੰਜ ਉਮੀਦਵਾਰ ਬਿਨਾਂ ਮੁਕਾਬਲੇ ਚੁਣੇ ਗਏ ਹਨ ਅਤੇ ਛੇਵਾਂ ਉਮੀਦਵਾਰ ਕਰਨ ਸਿੰਘ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਜਲਦੀ ਹੀ ਐਸਓਡੀ ਨੂੰ ਮਿਲੇਗਾ।

ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਚੋਣਾਂ ਲਈ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦਿੱਲੀ ਸਟੇਟ ਦੀ ਸਮੂਹੀ ਟੀਮ ਵਧਾਈ ਦੀ ਪਾਤਰ ਹੈ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਅਤੇ ਸਮੂਹੀ ਸੰਗਤ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕਰਦੇ ਹਾਂ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਾਨੂੰ ਵੱਧ ਚੜ੍ਹ ਕੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।

Sarna caused immense damage to Sikh community while being President of DSGMC due to his proximity with Congress party: Harmeet Singh Kalka, Jagdip Singh Kahlon

 


New Delhi, September 22: 

Akali Vetern Paramjit Singh Sarna has caused immense damage to Sikh community while being President of Delhi Sikh Gurdwara Management Committee (DSGMC) due to his proximity with Congress party. This was stated by DSGMC President Harmeet Singh Kalka and General Secretary Jagdip Singh Kahlon.
In a statement issued here today, Mr. Kalka and Mr. Kahlon said that they categorically reject the baseless allegations made by Akali veteran Paramjit Singh Sarna. Sarna’s recent remarks were aimed to mislead the Sikh community and cover up his own dark history of aligning with those who orchestrated the brutal killings of Sikhs in 1984.
They further said that Sarna, during his tenure as DSGMC President, stood hand in glove with the Congress Party, the very party responsible for the 1984 Sikh genocide. They said that it is well-known fact that under his leadership, Congress leaders Sajjan Kumar, Jagdish Tytler, and other culprits accused of masterminding the anti-Sikh riots were shielded from justice. They said that Sarna’s allegiance to Congress ensured that these killers walked free, while Sikh families continued to suffer in silence. His loyalties have always been with those who sought to suppress and destroy the Sikh community, rather than with the victims who demand justice.
They also said that his recent defence of Rahul Gandhi’s so-called pro-Sikh remarks is nothing more than an opportunistic ploy. Sarna has always acted as a mouthpiece for Congress, a party that has not only refused to take accountability for the 1984 massacres but has continuously insulted the Sikh community’s demand for justice. His selective outrage and support are aimed at protecting his political interests, not the rights of Sikhs.
They said that it is Manjinder Singh Sirsa, who has always stood at the forefront of Sikh rights and justice. They said that unlike Sarna, Sirsa has never wavered in his commitment to fight against the perpetrators of the 1984 massacre and has worked tirelessly to expose those responsible for the genocide. His efforts, both in and out of public office, have been a beacon of hope for countless Sikh families who continue to seek justice for the horrific crimes of 1984. Together, Sirsa and DSGMC work relentlessly to defend Sikh rights and ensure that those who tried to destroy our identity face the consequences of their actions.
They said that their criticism of Rahul Gandhi stems from the Congress Party’s historical betrayal of the Sikh community. Sarna’s attempt to align himself with Gandhi and Congress once again is a reminder of his deep-rooted loyalties to the very people who spilled the blood of innocent Sikhs. He was, and continues to be, a protector of those responsible for our community’s suffering.
They said that the Sikh community deserves leaders who stand firm in their fight for justice, not individuals like Sarna, who are willing to compromise Sikh interests for political gains. His decades-long support of Congress and his direct role in enabling the killers of 1984 to evade justice discredit his recent statements entirely. Sarna has always, and will always, choose the path of self-interest over the welfare of the Sikh people.

भगवान वाल्मीकि शोभायात्रा की बैठक

 


आज दिनांक 22 सितंबर 2024 को भगवान वाल्मीकि मंदिर सेक्टर 24 में भगवान वाल्मीकि शोभायात्रा की बैठक श्री राजेंद्र मकवाना की अध्यक्षता में हुईl जिसमें मुख्य रूप से वाल्मीकि समाज की अनुनायी के साथ साथ- साधु संत भी  उपस्थित हुए1


बैठक को संबोधित करते हुए श्री सुनील बौद्ध मुख्य सलाहकार ने कहा कि 15 अक्टूबर को भगवान वाल्मीकि शोभा यात्रा का आयोजन 18 ओकटुबर को चैयरमेन श्री पवन अटवाल की अध्यक्षता में सेक्टर 32 वाल्मीकि मंदिर से शोभा यात्रा का शुभारंभ करते हुए1 विभिन्न सेक्टरों, सेक्टर से शरू होगी 20, 21, 22, 23, 24, से होते हुए सेक्टर 25  में समाप्त होकर भगवान वाल्मीकि मंदिर के आयोजकों  द्वारा वाल्मीकि समाज के अनुयायियों का स्वागत करेंगे और और वाल्मीकि अनुनायियों के लिए विशाल भंडारा का आयोजन किया जाएगा1  और मंदिर कमेटी दारा शब्द कीर्तन करते हुए भगवान वाल्मीकि का गुणगान किया जाएगा और इस दौरान  देसी घी का प्रसाद भी बांटा जाएगा1

बैठक में मौजूद शोभायात्रा के चैयरमेन पवन अटवाल ने बताया की शोभायात्रा में चंडीगढ़ शहर से सभी वाल्मीकि मंदिरों से इस शोभा यात्रा में लव कुश व भगवान वाल्मीकि और बाबा साहेब की झांकियां के स्वरूप में शोभायात्रा में शामिल होंगे

श्री अटवाल ने कहा कि आज संत समाज और  बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों के  पद अधिकारियों को
  शोभायात्रा के  प्रबंधन के लिए बागडोर संभाल दी गई है1

*इस बैठक में मुख्य रूप से गीता राम,मुख्य सलाहकार, नरेंद्र चौधरी, अध्यक्ष दलित रक्षा दल, श्री समय सिंह, श्री राजेंद्र मकवाना,श्री बंटी गहलोत, श्री लव कुमार, पूर्व अध्यक्ष, रवि आदिवाल पूर्व अध्यक्ष, राजपाल शंभू, महासचिव, श्री सतीश मचल उप चेयरमैन, मोनू बहुत उप चेयरमैन, राजेंद्र मकवाना, राजेंद्र न₹नीटू अध्यक्ष मंदिर समिति, सुरेंदर कुमार कोषाध्यक्ष, तरसेम मचल समाजसेवी, रामवीर सुदई समाजसेवी, अमित खैरवाल, ममता राणा, मीनू मलिक, मीना राणा आदि शामिल हुए

मानव एकता और विश्व शांति की शपथ के साथ

 


28वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन


नई दिल्ली : सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की अध्यक्षता में कृपाल बाग और संत दर्शन सिंह जी धाम, बुराड़ी में एक सप्ताह के लिए 28वां विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन विश्व-एकता का एक विशाल सांझा मंच है, जिसमें विभिन्न धर्मों के नेताओं और विदेशी प्रतिनिधियों ने मानव एकता और विश्व शांति को बढ़ावा देने की शपथ ली। यह सम्मेलन 13 से 20 सितंबर तक आयोजित किया गया। जिसका मुख्य विशय अध्यात्म, एकता और शांति था। इस सम्मेलन में लाखों भाई-बहन ने भी हिस्सा लिया।
सम्मेलन की शुरूआत में पूजनीय माता रीटा जी ने कबीर साहब की वाणी से ”राजन कौन तुम्हारे आवै” (हे राजा, तुम्हारे पास कौन आए?) शब्द का गायन किया।
अपने सारगर्भित संदेश में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक सम्मेलन हमारे जीवन के मुख्य उद्देश्य को पाने का रास्ता दिखाते हैं।
28वें विश्व आध्यात्मिक सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि हमें अपने आपको जानने और पिता-परमेश्वर को पाने के लिए ऐसे सम्मेलनों में भाग लेना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इंसान होने के नाते हम अपने आपको शरीर समझते हैं लेकिन संत-महापुरुश हमें हमारे असली रूप, जोकि आत्मिक है, उसका अनुभव कराते हैं और तभी हम यह जान पाते हैं कि हमारी आत्मा पिता-परमेश्वर की अंश हैं। हम सब सच्ची खुशी और शांति का जीवन जीना चाहते हैं लेकिन हम इस बात से अंजान रहते हैं कि सच्ची खुशी कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे अंदर है। ध्यान-अभ्यास के द्वारा जब हम अंतर्मुख होते हैं तो हम प्रेम की आध्यात्मिक यात्रा पर चलने लगते हैं।
पिता-परमेश्वर सच्चाई के स्रोत हैं, उनके प्रेम और ज्योति का अनुभव केवल हम अंतर्मुख होकर ही कर सकते हैं, तभी हमारी आध्यात्मिक जागृति होगी। पिता-परमेश्वर की यह रोशनी कभी खत्म नहीं होती। जब हम इस ज्योति का अनुभव करते हैं, तब हम सदा-सदा की खुशी को प्राप्त कर लेते हैं। यह अनुभव हमारी आत्मा को पिता-परमेश्वर में लीन कराने के लिए प्रेरित करता है।
संयोगवश इस सम्मेलन के दौरान 20 सितंबर को संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का जन्मदिवस होता है, जिसे दुनियाभर में अंतर्राश्ट्रीय ध्यान-अभ्यास दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
विश्व-विख्यात आध्यात्मिक गुरु संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि हम सभी को इस मानव जीवन के सुनहरे अवसर का सदुपयोग करना चाहिए। संत-महापुरुशों के जन्मदिवस को मानाने का सही तरीका यह है कि हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में ढालें।
सम्मेलन के दौरान 14 सितंबर को सूफी-संत शायर संत दर्शन सिंह जी महाराज की याद में ‘दर्शन’-दिव्य प्रेम और करुणा के मसीहा’ विशय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में विभिन्न धर्मो के नेताओं और 54 देशों से आए विदेशी प्रतिनिायों ने ध्यान-अभ्यास और अध्यात्मक के बारे में अपने विचार रखे। जिनमें महामंडलेश्वर स्वामी देवेन्द्रानंद गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी प्रेमानंद जी महाराज, श्री विवेक मुनि जी महाराज, श्री श्री भगवाना आचार्य जी, रबी एजेकिल इजाक मालेकर, बौद्ध आचार्य यशी फुनसूख, फादर डॉ. एम. डी. थॉमस, नामधारी सत्गुरु श्री उदय सिंह जी महाराज, जगत गुरु विश्वकर्मा शकंराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज जी महाराज, महंत श्री रवि प्रपन्नाचार्य जी, गोस्वामी सुशील जी और स्वामी विनय मुनि जी महाराज आदि भी शामिल थे।
अन्य धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं ने भी सांझे मंच पर अध्यात्म और मानव एकता के बारे में अपने विचार पेश किये।
अमेरिका से आए इज़ाबेल वोल्फ, आस्ट्रेलिया से एटनी डी लावॉक्स, फ्रांस से मेडिलिन बूटोडे ले मोटे और कोलंबिया से आए जुआन केमिलो फलोरेस आदि अंतर्राश्ट्रीय वक्ता के रूप में मौजूद थे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी देवेन्द्रानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि आज के समय में मानवता को बचाने के लिए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज जैसे महापुरुश की आवश्यकता है। जो अपनी रूहानी प्रकाश से संपूर्ण मानवता को रोशन कर देते हैं।
विवेक मुनि जी महाराज ने अपने संदेश में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन्होंने संपूर्ण विश्वभर में लाखों लोगों के अंतर में प्रभु की ज्योति को जागृत किया है। साथ ही साथ आचार्य येशी फुनटोक ने कहा कि संत राजिन्दर सिंह जी महाराज पिछले 35 वर्शों से विश्व शांति और मानव एकता के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
एक और अंतर्राश्ट्रीय वक्ता जुआन फ्लोरेस ने कहा कि संत राजिन्दर सिंह जी महाराज आधुनिक युग में ध्यान-अभ्यास के पितामह हैं। वहीं मेडिलीन ने महाराज जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इन्होंने अपने प्रकाश पर्व के अवसर पर संपूर्ण मानवजाति को ध्यान-अभ्यास का उपहार दिया है।  
सप्ताह भर चलने वाले इस सम्मेलन के दौरान सावन कृपाल रूहानी मिशन ने
15 सितंबर को मुफ्त नेत्र जांच शिविर और मोतियाबिन्द ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में भाई-बहनों ने दृश्टि का उपहार प्राप्त किया। यह शिविर अमेरिका से आए नेत्र चिकित्सकों के साथ भारत के जाने-माने आई केयर अस्पताल नोएडा जोकि नवीनतम उपकरण और सुविधाओं से लैस है, के डॉक्टर्स के सहयोग से आयोजित किया गया।
इसके अलावा 14 सितंबर को रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें
164 भाई-बहनों ने स्वैच्छिक रूप से रक्तदान किया और समाज-कल्याण हेतु 20 सितंबर को जरूरतमंद भाई-बहनों को वस्त्र, जूते, किताबें और दैनिक उपयोगी वस्तुओं का मुफ्त वितरण किया गया।
दयाल पुरुश संत दर्शन सिंह जी महाराज के 103वें और संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के 78वें प्रकाश पर्व के अवसर पर सावन कृपाल रूहानी मिशन द्वारा 7 एनजीओ में आवश्यक उपयोगी वस्तुओं के साथ-साथ दवाईयां वितरित की गईं। इसके अलावा सफदरजंग अस्पताल के विक्लांग भाई-बहनों को सहायतार्थ उपकरण भी वितरित किए गए।
सम्मेलन के अंत में रब्बी इजेकिल इज़ाक मालेकर द्वारा घोशणा पत्र पढ़ा गया, जिसे सभी धर्मों के धर्माचार्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
पिछले 35 से भी ज्यादा वर्शों से संत राजिन्दर सिंह जी महाराज उन भाई-बहनों को जो पिता-परमेश्वर पाना और अपने जीवन को सफल करना चाहते हैं, का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्हें अध्यात्म और ध्यान-अभ्यास के द्वारा अंतरीय और बाहरी शांति के लिए किए गए अथक प्रयासों के लिए अंतर्राश्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

Renowned Singers Sultana Nooran, Mannat Noor & Preet Harpal etc to perform in Aryans Rajni on 24th Sep


 Aryans Group of Colleges to organise 18th Annual cultural extravaganza Rajni in association with MHOne

 

Mohali, 22 September

 

World renowned artist Sultana Nooran, Indian Singer & Actor Mannat Noor & Punjabi Singer Actor Preet Harpal will enthrall the audience during 18th annual cultural extravagnaza "Rajni" at Aryans Group of Colleges, Rajpura, Near Chandigarh to be held on 24th September in association with MH One as event partner. Thousands of Students, Alumni of Aryans Group would attend this mega cultural function.

 

In this cultural extravaganza, more renowned artists including Runbir, Preet Raman, Shavy Vik, RJ Shankyy etc. will also perform. The event would be hosted by Preet Raman Kaur (Artist). Students will also give vibrant performances in this cultural fest.

 

It is to be mentioned that every year Aryans Group hosts two cultural events where Rajni is a celebration for fresher’s welcome and Roshaan is the cultural extravaganza.

PUCA moves an application in the Supreme Court for extension in cutoff dates of admission in India

 


Punjab Unaided Colleges Association (PUCA), an association of Technical Colleges of Punjab, has knocked the door of the Supreme Court and has filed civil appeal for extension of cut-off dates of admission in the county. It is to be mentioned that  as per All India Council of Technical Education (AICTE), New Delhi, the  admission in the entire country has been closed on 15th Sep.

 

Dr. Anshu Kataria, President, PUCA; Chairman, Aryans Group of Colleges, Rajpura, Near Chandigarh said that around 23.3 Lac students were stuck because of the ongoing court case of NEET in the Supreme Court. Due to this court case, not only 23.3 lac but other students were also kept on waiting for the final judgment. Also, due to various other reasons, including late counseling in various states, disturbance in the northeast region, students were not able to secure seats.

 

Adv Amit Sharma Senior Vice President PUCA urged the government to extend the cut-off dates of admission to 30th Oct. As Pharmacy Council of India (PCI) & Indian Nursing Council (INC), New Delhi have also extended cut of dates of admission  to 30th Nov & 30th Oct respectively, on the same term the AICTE should extend cut of dates to 30th Oct, requested Sharma.

 

It is to be mentioned that on 15th September, the admission process of approx 8000 Technical Colleges of India is stopped as per AICTE notification, but lakhs of  seats are lying vacant in technical colleges of country. Lakhs of applicants are there who are seeking admission but are helpless as admission has been stopped.

Sarna’s Congress Loyalties Exposed: Shielding 1984 Sikh Killers Throughout His Tenure as DSGMC President


 New Delhi, September 21: I, Harmeet Singh Kalka, President of the Delhi Sikh Gurdwara Management Committee (DSGMC), categorically reject the baseless allegations made by Akali veteran Paramjit Singh Sarna. Sarna’s recent remarks only serve to mislead the Sikh community and cover up his own dark history of aligning with those who orchestrated the brutal killings of Sikhs in 1984.


Sarna, during his tenure as DSGMC President, stood hand in glove with the Congress Party, the very party responsible for the 1984 Sikh genocide. It is well-known that under his leadership, Congress leaders Sajjan Kumar, Jagdish Tytler, and other culprits accused of masterminding the anti-Sikh riots remained shielded from justice. Sarna’s allegiance to Congress ensured that these killers walked free, while Sikh families continued to suffer in silence. His loyalties have always been with those who sought to suppress and destroy the Sikh community, rather than with the victims who demand justice.

His recent defense of Rahul Gandhi’s so-called pro-Sikh remarks is nothing more than an opportunistic ploy. Sarna has always acted as a mouthpiece for Congress, a party that has not only refused to take accountability for the 1984 massacres but has continuously insulted the Sikh community’s demand for justice. His selective outrage and support are aimed at protecting his political interests, not the rights of Sikhs.

I must also highlight the consistent dedication of Manjinder Singh Sirsa, who has always stood at the forefront of Sikh rights and justice. Unlike Sarna, Sirsa has never wavered in his commitment to fight against the perpetrators of the 1984 massacre and has worked tirelessly to expose those responsible for the genocide. His efforts, both in and out of public office, have been a beacon of hope for countless Sikh families who continue to seek justice for the horrific crimes of 1984. Together, Sirsa and I have worked relentlessly to defend Sikh rights and ensure that those who tried to destroy our identity face the consequences of their actions.

My criticism of Rahul Gandhi stems from the Congress Party’s historical betrayal of the Sikh community. Sarna’s attempt to align himself with Gandhi and Congress once again is a reminder of his deep-rooted loyalties to the very people who spilled the blood of innocent Sikhs. He was, and continues to be, a protector of those responsible for our community’s suffering.

The Sikh community deserves leaders who stand firm in their fight for justice, not individuals like Sarna, who are willing to compromise Sikh interests for political gains. His decades-long support of Congress and his direct role in enabling the killers of 1984 to evade justice discredit his recent statements entirely. Sarna has always, and will always, choose the path of self-interest over the welfare of the Sikh people.

*हरियाणा के लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरेंगे प्रधानमंत्री, ऑडियो ब्रिज तकनीक से करेंगे सीधा संवाद*

 


 26 सितंबर को 4 हजार से अधिक शक्ति केंद्रों पर कार्यकर्ताओं से पीएम मोदी करेंगे सीधी बात*


नई दिल्ली,  21 सितंबर। हरियाणा में विधानसभा चुनाव चरम पर है और भाजपा कार्यकर्ताओं से संवाद करने के लिए लगातार एक के बाद एक कार्यक्रम भी कर रही है। इसी कड़ी में 26 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी "नमो ऐप" की ऑडियो ब्रिज तकनीक के माध्यम से हरियाणा के लाखों कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर ऊर्जा और जोश का संचार करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब भी देंगे, और उनके सुझावों को भी सुनेंगे। हालांकि इससे एक दिन पहले 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोहना में जन-आशीर्वाद रैली कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएंगे।  
कार्यक्रम के बारे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि हरियाणा के 4 हजार  से अधिक शक्ति केंद्रों पर भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री मोदी सीधा जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम 26 सितंबर को दोपहर 12ः30 बजे नमो ऐप के माध्यम से हरियाणा के प्रत्येक बूथ के कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित किया जाएगा। अध्यक्ष बड़ौली ने यह भी कहा कि “मेरा बूथ सबसे मजबूत” कार्यक्रम से एक दिन पहले 25 सितंबर को प्रधानमंत्री गोहाना में जन आशीर्वाद रैली कर जनता का आशीर्वाद लेंगे।
पंडित मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का हरियाणा से अटूट नाता और जुड़ाव है। पीएम मोदी ने संगठन और सरकार में रहते हुए हमेशा हरियाणा और हरियाणावासियों को प्राथमिकता दी है। हरियाणा के लोग भी प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विशेष भाव लगाव रखते हैं। पिछले दिनों कुरुक्षेत्र की जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा में बिताए अपने समय को याद करते हुए हरियाणा से अपने इस विशेष संबंध का जिक्र किया था। बड़ौली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने शुरुआती दिनों में हरियाणा के कार्यकर्ताओं के बीच रहकर संगठन के लिए बहुत समय तक काम किया है। इसी कारण प्रधानमंत्री जी के मन में हरियाणा और हरियाणावासियों के लिए विशेष लगाव और अपनापन है।
पंडित मोहनलाल बड़ोली ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा से ही पार्टी के आखिरी पंक्ति में खड़े कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया है, और यह सुनिश्चित किया है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की आवाज उन तक पहुंच सके। बड़ोली ने कहा कि हरियाणा में चुनाव के लिए दिन-रात अथक मेहनत कर रहे प्रदेश के कार्यकर्ताओं का प्रधानमंत्री से बात कर उत्साह बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की शक्ति है और विशेषता है, कि देश के सबसे बड़े और प्रभावशाली नेता, हम सभी के मार्गदर्शक और एक आम कार्यकर्ता के बीच सीधा संवाद हो सकता है और सुझावों को साझा किया जा सकता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कही मानने से विश्व में होगी खुशहाली डॉ. उमंग खन्ना के संयोजन में गोमती नगर के सौभाग्यम में हुए सत्संग में माँ तुलसी पीठाधीश्वर श्री श्री तुलसी जी महाराज ने दिया संदेश

 


(प्रकाशन के अनुरोध के साथ)

मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कही मानने से विश्व में होगी खुशहाली

डॉ. उमंग खन्ना के संयोजन में गोमती नगर के सौभाग्यम में हुए
सत्संग में माँ तुलसी पीठाधीश्वर श्री श्री तुलसी जी महाराज ने दिया संदेश

लखनऊ 22 सितम्बर 2024 शनिवार। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कही मानने से विश्व में खुशहाली होगी। यह संदेश माँ तुलसी पीठाधीश्वर श्री श्री तुलसी जी महाराज ने शनिवार को वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ.उमंग खन्ना के संयोजन में गोमती नगर के विनीत खंड स्थित "सौभाग्यम्" भवन, 5/147, विनीत खंड भवन में आयोजित सत्संग में कही। इस अवसर पर भक्तों की ओर से ठाकुर महाराज को भोग भी अर्पित किया गया।
स्थानीय चौक स्थित मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर में ब्रम्हलीन पंडित स्वामी दयाल व्यास जी की स्मृति श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का 19वां वार्षिकोत्सव व्यास सत्संग समिति एवं मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। श्रीमद्भागवत कथा में माँ तुलसी पीठाधीश्वर श्री श्री तुलसी जी महाराज कथा के माध्यम से भक्तों को जागरुक कर रहे हैं। शनिवार को गोमती नगर में आयोजित सत्संग में माँ तुलसी पीठाधीश्वर श्री श्री तुलसी जी महाराज ने कहा कि सूर्यवंशी मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम जी का चरित्र वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत है। उनके अनुसार राम को मानना और राम की मानना में भिन्नता है। अगर हम प्रभु राम का अनुसरण करेंगे तो सम्पूर्ण विश्व ही अनुशासित और मर्यादित हो जाएगा। वास्तव में प्रभु राम का चरित्र, विश्व मानव को समस्त विकारों से दूर रहते हुए अपने कर्तव्यों के निर्वाह का संदेश देता है। प्रभु राम का अनुसरण करके ही हम टूटते परिवारों को बचा सकते हैं वहीं उन्नति भी कर सकते हैं। इस सत्संग से पहले सरस भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। उसका आनंद उपस्थित जनों ने झूमते हुए उठाया। इस अवसर पर अनुराग मिश्र पार्षद, सुरेन्द्र मोहन शुक्ल, सुरेश रस्तोगी, संजीव झिंगरान, प्यारेलाल शर्मा, रीता रस्तोगी, सुषमा झिंगरन सहित अन्य भक्तगण उपस्थित रहे।
भवदीय

ਦਿੱਲੀ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਮੇਟੀ ਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਭਾਗਾਂ ਤੋਂ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਮੇਟੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਦੇ ਸਿੱਖ ਵਫਦ ਵੱਲੋਂ ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਰਾਜ ਮੰਤਰੀ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ

 


ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਵੱਲੋਂ ਸਿੱਖਾਂ ਬਾਰੇ ਦਿੱਤੇ ਬਿਆਨ ਬਾਰੇ ਦਿੱਤਾ ਮੰਗ ਪੱਤਰ


ਸਿੱਖਾਂ ਨੂੰ ਕੱਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਦਰਪੇਸ਼ ਮੁਸ਼ਕਿਲਾਂ ਤੋਂ ਵੀ ਜਾਣੂ ਕਰਵਾਇਆ: ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਲਕਾ, ਜਗਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ, ਮਨਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸਿਰਸਾ

ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ, 21 ਸਤੰਬਰ: ਦਿੱਲੀ ਸਿੱਖ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ, ਤਖ਼ਤ ਪਟਨਾ ਸਾਹਿਬ ਕਮੇਟੀ, ਹਰਿਆਣਾ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ, ਤਖਤ ਸ੍ਰੀ ਹਜ਼ੂਰ ਸਾਹਿਬ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਸਮੇਤ ਕੋਲਕਾਤਾ, ਇੰਦੌਰ, ਲਖਨਊ, ਹੈਦਰਾਬਾਦ ਤੇ ਝਾਰਖੰਡ ਸਮੇਤ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਵਾਂ ਤੋਂ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਅਹੁਦੇਦਾਰਾਂ ਸਮੇਤ ਇਕ ਉੱਚ ਪੱਧਰੀ ਸਿੱਖ ਵਫਦ ਨੇ ਅੱਜ ਦਿੱਲੀ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸਰਦਾਰ ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਲਕਾ, ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਸਰਦਾਰ ਜਗਦੀਪ ਸਿੰਘ ਕਾਹਲੋਂ ਅਤੇ ਸਾਬਕਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਤੇ ਭਾਜਪਾ ਦੇ ਕੌਮੀ ਸਕੱਤਰ ਸਰਦਾਰ ਮਨਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸਿਰਸਾ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਕੇਂਦਰੀ ਗ੍ਰਹਿ ਰਾਜ ਮੰਤਰੀ ਸ੍ਰੀ ਨਿਤਿਆਨੰਦ ਰਾਏ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਹਾਲ ਹੀ ਵਿਚ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰ ਆਗੂ ਤੇ ਕਾਂਗਰਸੀ ਨੇਤਾ ਸ੍ਰੀ ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਵੱਲੋਂ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿਚ ਸਿੱਖਾਂ ਦੇ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਨਾ ਹੋਣ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਬਿਆਨ ਪ੍ਰਤੀ ਰੋਸ ਮੰਗ ਪੱਤਰ ਸੌਂਪਿਆ।
ਵਫਦ ਨੇ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਸਿੱਖ ਇਕ ਦੇਸ਼ ਭਗਤ ਕੌਮ ਹੈ ਜਿਸਨੇ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਹੁਣ ਤੱਕ ਦੇਸ਼ ਦੀਆਂ ਸਰਹੱਦਾਂ ਦੀ ਰਾਖੀ ਸਮੇਤ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ ਵੱਡਮੁੱਲਾ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ ਹੈ।
 ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਨੇ ਜੋ ਬਿਆਨ ਸਿੱਖਾਂ ਬਾਰੇ ਦਿੱਤਾ ਹੈ, ਉਸਦਾ ਮਕਸਦ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਸਿੱਖਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਨਫਰਤ ਪੈਦਾ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ 1980ਵਿਆਂ ਵਿਚ ਅਜਿਹਾ ਹੀ ਆਧਾਰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਸੀ ਜਿਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ 1984 ਵਿਚ ਸਿੱਖਾਂ ਦਾ ਕਤਲੇਆਮ ਹੋਇਆ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਿੱਖ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੇ ਤਾਂ ਹਾਲੇ ਉਹ ਵੀ ਜ਼ਖ਼ਮ ਅੱਲ੍ਹੇ ਹਨ ਤੇ ਹੁਣ ਨਵੇਂ ਸਿਰੇ ਤੋਂ ਸਿੱਖਾਂ ਖਿਲਾਫ ਜ਼ਹਿਰ ਉਗਲਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। 
ਉਹਨਾਂ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਕਿ ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਦੇ ਇਸ ਗੈਰ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰਾਨਾ ਬਿਆਨ ਦਾ ਗੰਭੀਰ ਨੋਟਿਸ ਲਿਆ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਇਸ ’ਤੇ ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਖਿਲਾਫ ਬਣਦੀ ਕਾਨੂੰਨੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ।
ਵਫਦ ਨੇ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਇਹ ਵੀ ਬਿਆਨ ਵਿਚ ਲਿਆਂਦਾ ਕਿ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥਾਵਾਂ ’ਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਕੇਂਦਰਾਂ ਦੇ ਬਾਹਰ, ਹਵਾਈ ਅੱਡਿਆਂ ’ਤੇ, ਮੈਟਰੋ ਰੇਲ ਗੱਡੀਆਂ ਵਿਚ ਤੇ ਹੋਰ ਜਨਤਕ ਥਾਵਾਂ ’ਤੇ ਸਿੱਖ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨਾਲ ਸਿੱਖ ਗੁਰੂ ਸਾਹਿਬਾਨ ਵੱਲੋਂ ਬਖਸ਼ਿਸ਼ ਕੀਤੇ ਪੰਜ ਕੱਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਮੰਦਭਾਗੀਆਂ ਘਟਨਾਵਾਂ ਸਾਹਮਣੇ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ, ਇਸ ਲਈ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰਾਲੇ ਸਮੁੱਚੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਕੱਕਾਰਾਂ ਨੁੰ ਧਾਰਣ ਕਰਨ ਦੇ ਸੰਵਿਧਾਨਕ ਹੱਕ ਬਾਰੇ ਸਪਸ਼ਟ ਦਿਸ਼ਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਜਾਰੀ ਕਰੇ ਤਾਂ ਜੋ ਅਜਿਹੀਆਂ ਮੁਸ਼ਕਿਲਾਂ ਨਾ ਆਉਣ।
ਵਫਦ ਦੀ ਗੱਲ ਬਹੁਤ ਹੀ ਗੌਰ ਨਾਲ ਸੁਣਨ ਮਗਰੋਂ ਮੰਤਰੀ ਸ੍ਰੀ ਨਿਤਿਆਨੰਦ ਰਾਏ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਿੱਖ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸਤੇ ਯੋਗਦਾਨ ਦੀ ਜਿੰਨੀ ਵੀ ਸ਼ਲਾਘਾ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਥੋੜ੍ਹੀ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਮੁੱਚਾ ਦੇਸ਼ ਸਿੱਖ ਗੁਰੂ ਸਾਹਿਬਾਨ ਸਮੇਤ ਸਿੱਖ ਕੌਮ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦੇਸ਼ ਵਾਸਤੇ ਘਾਲਣਾ ਘਾਲਣ ਦਾ ਸਤਿਕਾਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੇ ਸਿੱਖਾਂ ਨਾਲ ਕਿਸੇ ਵੀ ਤਰੀਕੇ ਦਾ ਵਿਤਕਰਾ ਨਹੀਂ ਹੋਣ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਉਹਨਾਂ ਇਹ ਵੀ ਭਰੋਸਾ ਦੁਆਇਆ ਕਿ ਪੰਜ ਕੱਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰਾਲਾ ਜਲਦੀ ਹੀ ਵਿਸਥਾਰਿਤ ਦਿਸ਼ਾ ਨਿਰਦੇਸ਼ ਜਾਰੀ ਕਰੇਗਾ।
ਵਫਦ ਵਿਚ ਹੋਰਨਾਂ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹਰਿਆਣਾ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਭੁਪਿੰਦਰ ਸਿੰਘ, ਪਟਨਾ ਕਮੇਟੀ ਤੋਂ ਮੋਹਿੰਦਰ ਪਲ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋ, ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ, ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਜੌਹਲ, ਹਜ਼ੂਰ ਸਾਹਿਬ ਤੋਂ ਵਿਜੈ ਸਤਬੀਰ ਸਿੰਘ, ਤੇ ਹੋਰ ਸਿੱਖ ਸ਼ਖਸੀਅਤਾਂ ਸ਼ਾਮਲ ਸਨ।

Administration and Government Power

 


WORLD HUMAN RIGHTS ORGANIZATION (R)

भारत सरकार व बेल्जियम-यूरोप में रजिस्टर्ड

Definition: Administration refers to the processes and systems through which government policies are executed. Government Power encompasses the authority and ability of government entities to enforce laws, regulate conduct, and manage resources.

Roles:


Administrations are responsible for implementing laws and policies effectively and equitably.

Governments must balance power to prevent abuses, ensuring that authority is used to promote the welfare of citizens.

Human Rights Implementation

Framework:


Human rights are enshrined in various international treaties (e.g., Universal Declaration of Human Rights) and domestic laws.

Implementation involves creating laws, policies, and practices that protect and promote these rights.

Challenges:


Corruption, lack of resources, and political will can hinder effective implementation.

Societal norms and cultural beliefs may also conflict with human rights principles.

Interconnection

Accountability:


A transparent administration is essential for holding the government accountable for human rights violations.

Mechanisms such as independent judiciary systems and human rights commissions play key roles.

Public Participation:


Engaging citizens in governance processes ensures that human rights are prioritized.

Advocacy groups and civil society can pressure governments to uphold human rights standards.

Monitoring and Evaluation:


Regular assessments of human rights practices help identify areas needing improvement.

International bodies can also offer oversight, helping to reinforce commitments.

Conclusion

To effectively implement human rights, administrations must operate within a framework of accountability and transparency, ensuring that government power is used to protect rather than oppress. Continuous engagement with civil society and robust monitoring systems are critical for fostering an environment where human rights are respected and upheld.


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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी‌ ) की हरियाणा राज्य कमेटी ने भाजपा के संकल्प पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हरियाणा की जनता अब भाजपा की जुमले बाज़ी के झांसे में आने वाली नहीं है।

 


पिछले 10 साल से हरियाणा की जनता ने भाजपा के शासन को भुगता है। 2 लाख पक्की नौकरी का वादा किया जा रहा है। जबकि इन्हीं की तो सरकार थी जिसने खाली पड़े 2 लाख पक्की नौकरी के पदों पर भर्ती करने की बजाय कौशल रोजगार निगम बनाकर कच्ची नौकरी भर्ती की पक्की व्यवस्था की है जिसके तहत योग्यता, मेरिट और आरक्षण के प्रावधान खत्म किए गए। 

मोदी सरकार ने 9 साल में गैस, तेल पर टैक्स बढ़ा कर देश की जनता से 28 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की उगाही की है। 
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें 1100 रुपए प्रति सिलेंडर से भी ज्यादा किए गए, अब चुनावी लाभ के लिए 500 रुपए करने के वादे पर कौन विश्वास करेगा। 10 औद्योगिक शहरों के निर्माण का जो आज वादा कर रहे हैं, पिछले 10 साल में इन्हें किसने रोका था ऐसे कितने शहर बने? जबकि सच्चाई यह है कि पहले से स्थापित अनेकों औद्योगिक इकाइयां उनके शासन काल में बंद होने से हजारों लोगों ने रोजगार खोए हैं। स्थानीय युवाओं का उद्योगों में रोजगार की गारंटी पिछले चुनाव में भी 75% स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षण देने के वादे का क्या हुआ ?
इसी तरह सभी अग्निवीरों को सरकारी नौकरी देने का वादा एक छलावा है। हरियाणा की जनता अग्निवीर योजना के लिए इन्हें दंडित करने जा रही है , इनके शासन काल में स्वास्थ्य, बिजली, पानी, परिवहन आदि के निजीकरण को बढ़ावा देकर बर्बाद किया गया है। इनके किसी भी झांसे में हरियाणा के मतदाता आने वाले नहीं है, किसान और ग्रामीण जनता में उनके प्रति आक्रोश की स्थिति तो ऐसी है कि इनके उम्मीदवार मुंह छुपाते फिरते हैं।

ओबीसी के उद्यमियों के लिए बिना गारंटी लोन का वादा असल में पिछड़े वर्ग को लाभ पहुंचाने की बजाय तुच्छ राजनीति हितों की पूर्ति के लिए जातिगत भावनाओं को बनाने की कुचेष्टा है। जिसे वह अब तक प्रयोग करती आई हैं। परंतु भाजपा का यह कार्ड भी अब फेल हो चुका है। लोगों ने अपने व्यवहार से जान लिया है कि यह बात तो गरीब और पिछड़ों की करते हैं लेकिन सेवा बड़े पूंजीपतियों की ही करते हैं।

सुरेंद्र सिंह, 
प्रदेश सचिव, माकपा
9416630806

डबल इंजन की सरकार के राज में दलितों का घर जलकर उजाड़ देना दुर्भाग्यपूर्ण

 


चंडीगढ़ आज दिनांक 20/ 9/2024 दलित रक्षा दल, द्वारा दादू माजरा कॉलोनी मैं बिहार  के मुख्यमंत्री व डबल इंजन की सरकार  के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया गया


श्री नरेंद्र चौधरी दल के अध्यक्ष ने कहा कि बिहार कृष्णा नगर के नवाज गांव में 60 70 दलित विरोधी लोगों ने लगभग 100 घरों में लूटपाट तोड़फोड़ मारपीट कर  गोलियां चलाई जाने के साथ-साथ  घरों में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई गनीमत रही की लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई

श्री चौधरी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जमीर मर चुका है और बिहार में दलित विरोधी लोग दलितों  को अपना निशाना बना रहे हैं और बिहार में जंगल राज जैसा माहौल बनता जा रहा है और नीतीश और  मोदी राज में बिहार के चारों तरफ आग ही आग दिखाई दे रही है

श्री चौधरी ने कहा कि नरेंद्र मोदी द्वारा कहा गया था कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है  बिहार में आपसी भाईचारा और प्रेम कायम रहेगा लेकिन अब इसके विपरीत ही दिखाई दे रहा है और इस डबल इंजन की सरकार के रहते हुए आगजनी की घटना के बाद तो एनडीए की सहयोगी पार्टी के मुंह में तो दही ही जम गया कोई इन दलित परिवारों के इंसाफ दिलाने के लिए बोलने के लिए एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा है और नीतीश की चुप्पी बता रही है कि दलितों को इंसाफ नहीं दिला पाएंगे

श्री चौधरी ने कहा डबल इंजन की सरकार है और वहां आगजनी में सारा सामान जलकर राख हो गया है वहां डबल इंजन की सरकार जानवरों को खिलाने वाला चुरा और गुड पीड़ितों को खिलाने के लिए दे रही है और सरकार कि दलितों के प्रति मंशा साफ दिखाई दे रही है और दलित मानसिकता साफ झलक रही है

श्री चौधरी ने कहा कि बिहार में दलितों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उन्होंने कहा कि दलित का घर जलकर उजाड़ कर उनका जीवन ही उजाड़ देना दुर्भाग्यपूर्ण है उन्होंने सरकार से मांग की है इन दहशत दरिंदों को एससी एसटी के अधीन कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और सभी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजे के साथ-साथ पुनर्वास किया जाए

इस  प्रदर्शन  में अनूप रावत,बबीता, अमर मेहरा,लक्ष्मी, गीत, मंजू देवी, योगिता, गीता रावत, शशि कला, सुनीता देवी, अरुण चौधरी, बाला देवी, जगदीश कुमार आदि शामिल हुए