दिल्ली की जागृत सामाजिक संस्था 'चेतना' ने अपना 71वाँ व्याख्यान समारोह 2 अक्टूबर 2024 को आयोजित किया। रोहिणी के क्राउन प्लाजा होटल के सेमिनार हॉल में लाला स्व. राधेश्याम गोयल जी की स्मृति में आयोजित इस व्याख्यान समारोह में साधु संतो एवं देशभक्त वक्ताओं ने अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए। चेतना के अध्यक्ष श्री राजेश चेतन ने इस कार्यक्रम की महत्ता और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म संस्कृति पर जिस प्रकार से इस्लामी जेहादी प्रहार हो रहें हैं तब भागवत एवं राम कथाओं के स्थान पर हिंदू जागृति के ऐसे कार्यक्रमों की बड़ी आवश्यकता है।
आंध्र प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी श्री सुनील विश्वनाथ देवधर ने भारत के क्रुर इस्लामिक मुगलकालीन इतिहास के उदाहरण देते हुए समझाया की हिंदुओ को जातियों - वर्णों में ना बाट कर देशहित में एकजुट होना होगा। श्री सुनील विश्वनाथ ने इस कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दू समाज को चेताया की अगर हिंदू संगठित नहीं हुए तो उनकी संतान, परिवार, समाज और अंतत हिंदुस्तान नामक उनका देश जिहादियों की भेंट चढ़ जाएगा। जहां ना महिलाएं स्वतंत्रता पूर्वक सर उठाकर कही आ-जा नही पाएगी और ना ही हिंदू नाच गा और हंस कर अपने पर्व त्योहार बना पायेंगे।
राम राज्य और राष्ट्रवाद नामक इस व्याख्यान माला को और भी अधिक प्रासंगिक बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता और भारत PIL Man के नाम से प्रसिद्ध श्री अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ जी का कहना कि हिंदू बटेगा तो कटेगा, सही कैसे है, मैं समझता हूं- उन्होंने कहा कि वर्तमान विपक्षी पार्टियां खुलकर मुसलमानों के हित में काम कर रही हैं। हिंदुओं का आरक्षण खुले आम मुसलमानों को दिया जा रहा हैं। देश के तटवर्ती इलाकों में हिंदू अल्पसंख्यक होगये है। ऐसे में केवल और केवल भारतीय जनता पार्टी ही एक मात्र ऐसा राजनीतिक दल बचा हैं जो हिंदुओं और सनातन संस्कृति को बचाने का प्रयास कर रहा हैं। समारोह में मुख्यवक्ता गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज भी चेतना के सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकार वाले आयोजनों की महत्ता को कथा-कीर्तनों से अधिक उपयोगी बताया। स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान हिंदू समाज को गीता के अनुरूप आचरण करना ही होगा, अन्यथा गीता, गंगा, गायत्री और गौमाता कुछ भी नही बचेगा। राम राज्य और राष्ट्रवाद में काव्यपाठ करते हुए राष्ट्रवाद एवं राष्ट्र जागरण पर केंद्रित अपनी नवीनतम कविता "वैष्णव जन को नहीं छोड़ा और ना ही रघुपति राजा राम को, जिसको देखो बेच रहा हैं बस बापू के नाम को" प्रस्तुत किया, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
चेतना के राम राज्य और राष्ट्रवाद कार्यक्रम में संगीत का भी कार्यक्रम रखा गया था। सुप्रसिद्ध भजन गायक स्वामी संजय प्रभाकरानंद ने तमिल, तेलगु, उड़िया, गढ़वाली एवं हरियाणवी भाषाओं में राम जी के भजन गाए। उन्होंने भारत की विविध लोक भाषाओं में राम जी के भजन गा कर यह बताने का प्रयास किया कि भारत के कण कण में भगवान श्री राम संगीत के रूप में भी विराजमान हैं। कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन TRV के चेयरमैन श्री त्रिलोकी नाथ गोयल एवं लाला महेंद्र बंसल ने किया। स्वर्गवासी लाला राधेश्याम गुप्ता प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी एवं धर्म प्रेमी थे। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीना गुप्ता अपने दोनो सुपुत्र श्री विष्णु गुप्ता एवं श्री अरूण गुप्ता के साथ उपस्थित थीं। चेतना के 71वें व्याख्यान समारोह को सफल बनाने में चेतना के श्री राजकुमार अग्रवाल, श्री एन आर जैन, श्री दिनेश गुप्ता, श्री जे एस गुप्ता, श्री सतभूषण गोयल, श्री अशोक बंसल, श्री भारत भूषण अलाबादी का विशेष योगदान रहा।
चेतना के कार्यक्रम में हर बार नए एवं व्यक्ति, परिवार, समाज, देश और अन्तत: विश्व कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत होते हैं। चेतना ने "रामराज्य और राष्ट्रवाद" नामक इस व्याख्यान माला के द्वारा हिंदू समाज को इस्लामिक कट्टरता से सचेत रहने हेतु चेताया हैं। इस विचार को अब समाज और राष्ट्र के हर व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता हैं।

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