चार पैरों पर चलने वाले रोबोट, जिन्हें आमतौर पर ‘रोबोडॉग’ कहा जाता है, अब सिर्फ टेक्नोलॉजी शोकेस का हिस्सा नहीं रहे। ये उन्नत सेंसर, कैमरा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मोटर सिस्टम से लैस स्वायत्त (Autonomous) या रिमोट कंट्रोल रोबोट होते हैं, जो इंसानों की तरह कठिन इलाकों में चल-फिर सकते हैं।
हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान रोबोडॉग को लेकर विवाद सामने आया, जब Galgotias University द्वारा प्रदर्शित रोबोट को लेकर सवाल उठे। इसके बाद सोशल मीडिया पर इन रोबोट्स की तकनीक और मौलिकता को लेकर चर्चा तेज हो गई।
रोबोडॉग आमतौर पर औद्योगिक निरीक्षण, आपदा प्रबंधन, रक्षा अभियानों और रिसर्च कार्यों में उपयोग किए जाते हैं। ये खतरनाक या दुर्गम स्थानों—जैसे सुरंग, बॉर्डर एरिया या रासायनिक संयंत्र—में बिना मानव जोखिम के निगरानी और डेटा संग्रह कर सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में ये बारूदी सुरंगों की पहचान, संदिग्ध वस्तुओं की जांच और निगरानी जैसे कार्यों में मददगार साबित हो सकते हैं।
भारत जैसे बड़े और विविध भौगोलिक परिस्थितियों वाले देश के लिए रोबोडॉग का महत्व रणनीतिक है। सीमा सुरक्षा, आपदा राहत और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग में इनकी भूमिका अहम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनका स्वदेशी विकास और उत्पादन मजबूत किया जाए, तो यह तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है

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