Dhaka में नई सरकार बनते ही सत्ता और सेना के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। प्रधानमंत्री Tarique Rahman ने पद संभालते ही बांग्लादेश सेना में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल कर दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम संभावित तख्तापलट के खतरे को कम करने और सरकार पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
सूत्रों के मुताबिक, सेना प्रमुख Waker-Uz-Zaman से कई अहम मामलों में मिला ‘फ्री हैंड’ वापस ले लिया गया है। अब महत्वपूर्ण नियुक्तियों और रणनीतिक फैसलों पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी बढ़ा दी गई है।
इस मेगा ऑपरेशन के तहत कई वरिष्ठ और प्रभावशाली जनरलों को उनके पदों से हटाकर विदेशों में राजदूत के रूप में भेजा गया है। उनकी जगह खलीलुर रहमान और मैनूर रहमान जैसे अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री का करीबी और भरोसेमंद माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश में सेना लंबे समय से सत्ता समीकरणों में अहम भूमिका निभाती रही है। ऐसे में यह फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल देश की राजनीति में हलचल तेज है और विपक्ष इस कदम को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की रणनीति बता रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव सरकार को स्थिरता देता है या नई चुनौतियों को जन्म देता है।

No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.