उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी इलाकों को लेकर एक नई रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। Indian Institute of Technology Kanpur (IIT कानपुर) की एक स्टडी के मुताबिक, अगर भविष्य में बड़ा भूकंप आता है तो राज्य के कुछ प्रमुख शहरों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। खास तौर पर गंगा के किनारे बसे शहरों में ज़मीन के लिक्विफेक्शन (Liquefaction) का खतरा बताया गया है।
आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार, साल 1803 और 1934 में आए बड़े भूकंपों के बाद गंगा के मैदानी क्षेत्रों में लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। लिक्विफेक्शन वह स्थिति होती है जब भूकंप के झटकों के कारण पानी से संतृप्त ढीली मिट्टी अपनी मजबूती खो देती है और तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। इससे इमारतों की नींव कमजोर हो सकती है और बड़े पैमाने पर ढांचागत क्षति हो सकती है।
स्टडी में यह भी बताया गया है कि ये इलाके भूकंपीय फॉल्ट लाइन के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी योजना, मजबूत निर्माण मानकों और जागरूकता के जरिए संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने घबराने के बजाय सतर्क रहने और भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है।

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