मिड डे मील वितरण व्यवस्था की प्रक्रिया संदेह के घेरे में, शिक्षा निदेशक को मिली शिकायतें

 


नई दिल्ली दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पीएम-पोषण (मिड-डे मील) टेंडर प्रक्रिया को लेकर कुछ गंभीर सवाल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं। विश्व मानवाधिकार संगठन (WHRO) की ओर से इस संबंध में एक शिक्षा निदेशक दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर शिकायत की है जिसमें टेंडर प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगठन ने 14 नवंबर 2025 को जारी मिड डेल मील वितरित करने वाली एनजीओ को दिए जाने वाले टेंडर प्रक्रिया में काफी नाम लीक हो गए है और कई संस्थाओ ने इसकी लिखित शिकायत भी डायरेक्टर एजुकेशन दिल्ली सरकार को दी है। इन शिकायतो में कुछ ऐसे तथ्यों की ओर इशारा किया है, जैसे कुछ एनजीओ की टेकनीकल कमियां है, तो कुछ की बैलेंसशीट आदि में,  जिनसे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। हालांकि इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है। इन शिकायतो के बाद इस टेंडर को घोषित करने में विभाग ने रोक लगा रखी है। इतना ही नहीं कुछ एनजीओ ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन विभाग में विजिलेंस जांच के लिए भी दी है जिनमें कुछ निचले स्तर के अधिकारियो और एक रिटायर्ड अधिकारी के नाम भी मिलीभगत करने के आरोप के साथ दिए गए हैं।

प्रतिनिधित्व में संकेत दिया गया है कि कुछ एनजीओ द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और योग्यता संबंधी दावों में समानताएं देखी गई हैं, जिससे प्रक्रिया में समन्वय या गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। साथ ही, कुछ मामलों में बुनियादी ढांचे से जुड़े मानकों में ढील दिए जाने की बात भी सामने आई है।

शिकायत में ये भी लिखा है कि कुछ सूत्रों के हवाले से यह भी संकेत मिला है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए वित्तीय लेन-देन हो सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं, तो इसका असर मिड-डे मील की गुणवत्ता पर पड़ सकता है, जिससे स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

विश्व मानवाधिकार संगठन ने संबंधित प्राधिकरण से आग्रह किया है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही, जांच पूरी होने तक टेंडर प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने की भी मांग की गई है। इस मामले में शिक्षा विभाग या अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

 

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