दिल्ली सरकार युवाओं की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है-दिनेश प्रताप

नई आबकारी नीति के खिलाफ महिला मोर्चा ने मनीष सिसोदिया के निवास पर किया प्रदर्शन

दिल्ली सरकार युवाओं की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है-दिनेश प्रताप

नई आबकारी नीति दिल्ली को पूरी तरह से खोखला करने के लिए बनाई गई है-योगिता सिंह

केजरीवाल सरकार दिल्ली को पानी की जगह शराब परोस रही है







नई दिल्ली, 20 जनवरी। दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के खिलाफ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर के बाहर प्रचंड रोष प्रदर्शन करते हुए कई महिलाओं ने गिरफ्तारी दी। हिरासत में ली गई महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को मंदिर मार्ग से पुलिस ने तीन घंटे बाद रिहा किया। प्रदर्शन में प्रदेश महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह और प्रदेश मीडिया प्रमुख नवीन कुमार उपस्थित रहे।

प्रदेश महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि नई आबकारी नीति के पीछे केजरीवाल सरकार .युवाओं की ज़िंदगी से खिलवाड़ करना चाहती है और पैसा कमाने के चक्कर में दिल्ली को बर्बाद करने पर तुली है। शराब पीने पर जहां दिल्ली सरकार को रोक लगानी चाहिए वहीं उल्टा सरकार ही इसको और बढ़ावा दे रही है।

महिला मोर्चा की अध्यक्ष योगिता सिंह ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केजरीवाल सरकार को नई आबकारी नीति का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर ही पड़ेगा। जब रात तीन बजे तक शराब की दुकाने खुलेंगी और 21 साल के उम्र में ही बेटा हो या बेटी को शराब पीने की छूट होगी तो परिवार कैसे बचेगा? उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार बढ़ेंगे और सड़क पर दुर्घटनाएं भी बढ़ेंगी। आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया को अपने ही बच्चों की तरफ देखकर ही नई आबकारी नीति बनानी चाहिए। क्या वे अपने बच्चों को इक्कीस साल की उम्र में शराब पिने की छूट देंगे?

प्रदेश मीडिया प्रभारी नवीन कुमार ने कहा कि केजरीवाल दिल्ली के नलों में पीने का साफ पानी तो मुहैया करा नहीं पाये, लेकिन उनकी सरकार हर चौराहे पर शराब का ठेका खोलना चाहती है। एक तरफ आम आदमी पार्टी महिलाओं की हितैषी बनने का ढ़ोंग करती है और दूसरी तरफ उनके उत्पीड़न की सेज सजा रही है। केजरीवाल सरकार नई आबकारी नीति को तुरंत वापस लें। प्रदर्शन में महिला मोर्चा नेता अरुणा रावत, श्यामबाला, मोनिका पंत, फुलवंत कौर, पुष्पा राजपूत, रेणू सिंह, जिलाध्यक्ष दीपिका जैन, सारिका गुप्ता, कुसुम तोमर, ज्योत्सना सोलंकी, शोभा शुक्ला, अनिता शर्मा सहित सैकड़ों महिला कार्यकर्ता मौजूद थी।

पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ के साथ 'सुस्वागतम खुशामदीद' में नजर आएंगे जमशेदपुर के प्रशांत सिंह

 पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ के साथ 'सुस्वागतम खुशामदीदमें नजर आएंगे जमशेदपुर के प्रशांत सिंह

अभिनेता पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ स्‍टारर हिंदी फिल्म 'सुस्वागतम खुशामदीदमें छोटे शहर जमशेदपुर के प्रशांत सिंह भी नजर आने वाले हैंजिन पर सबकी निगाहें हैं। इस फिल्‍म को धीरज कुमार डायरेक्‍ट करेंगेजो इससे पहले शरमन जोशी के साथ फिल्‍म काशी इन सर्च ऑफ गंगा’ बना चुके हैं। वे अब फिल्म 'सुस्वागतम खुशामदीदलेकर आ रहे हैं। यह दो ऐसे लोगों की कहानी हैजो प्यारदोस्ती और हमदर्दी का संदेश देने में यकीन करते हैं।



इस फिल्‍म की शूटिंग इन दिनों मुंबई में चल रही है। इसमें प्रशांतइनाम के किरदार में नजर आयेंगेजो अपने दोस्‍त सलमान के साथ हमेशा साये की तरह खड़े रहते हैं। प्रशांत इस फिल्‍म को लेकर एक्‍साइटेड हैं। इस बारे में उन्‍होंने बताया कि फिल्‍म की कहानी इसाबेल कैफ कैफ के इर्दगिर्द घूमती है। इसमें अमन (पुलकित) और उसका दोस्‍त एक तरफ है। सलमान और इनाम एक तरफ। पुलकित और इसाबेल कैफ कैफ एक दूसरे से प्‍यार करते हैंजबकि सलमान इसाबेल कैफ से। यह एक अनोखी फिल्‍म हैजो दर्शकों को नया एक्‍सपीरियंस देगी। यह एक रोमांटिक फिल्म हैजो सभी को हंसाते हुए एक सामाजिक संदेश देने की कोशिश करती नजर आएगी।

उन्‍होंने बताया कि फिल्म 'सुस्वागतम खुशामदीदके लिए प्रशांत को तीन – तीन ऑडिशन देने पड़े। तब जाकर उनका सलेक्‍शन इस फिल्‍म में हुआ। मैं खुद को सौभाग्‍यशाली मानता हूं कि मुझे पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ के साथ ब्रेक मिला। मेरे यहां तक पहुंचने में निशांत दयाल और गुरजीत सिंह का योगदान बहुत रहा है। इसलिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। उन्‍होंने कहा कि छोटे शहर से आने के बावजूद मैं कुछ मुकाम पाने की कोशिश कर रहा हूं। इसमें सबों का सहयोग चाहिए। मैं हमेशा अपने काम में फोक्‍स्‍ड रहता हूं और मैं यह कहना चाहता हूं कि बिना फोक्‍स्ड हुए कोई भी काम आसान नहीं होता है।

आपको बता दें कि प्रशांत सिंह जमशेदपुर से आते हैं और वे बीते 4 सालों से मुंबई में स्‍ट्रगल कर रहे हैं। उन्‍होंने एक कन्‍नड़ फिल्‍म भी की हैजो कोविड की वजह से रिलीज नहीं हो पायी थी। लेकिन अब वह फिल्‍म भी रिलीज को तैयार है। इसके अलावा वे चार – पांच म्‍यूजिक वीडियो भी कर चुके हैं। प्रशांत रायटर भी हैंइस वजह से वे जल्‍द ही दो वेब सिरीज भी लेकर आने वाले हैं। इसमें एक जमशेदपुर की कहानी पर आधारित होगा। 

दिशान्तर थिएटर ग्रुप - नटरंग प्रतिष्ठान के संग्रहालय से ऑनलाइन प्रसारण की ‘रंग स्मरण’

 नटरंग प्रतिष्ठान के संग्रहालय से ऑनलाइन प्रसारण की रंग स्मरण’ (दिल्ली की रंग संस्थाओं के इतिहास पर केन्द्रित कार्यक्रम) श्रृंखला में अगली संस्था है दिशान्तर थिएटर ग्रुपजिसका प्रसारण आप कल यानि दिनांक 22 जनवरी 2021 (शुक्रवार)शाम बजे से देखेंगे।

 


जैसा कि आप जानते हैं नटरंग प्रतिष्ठान अपने सभी कार्यक्रमों को रंग विस्तार’ योजना के तहत हर हफ्ते एक नया कार्यक्रम यूट्यूब और फेसबुक पर प्रसारित कर रहा है।

 

 

सन 1967 में ओम शिवपुरी, सुधा शिवपुरी, रामगोपाल बजाज, मोहन महर्षि, वामदेव सिंहा तथा अंजला महर्षि आदि ने मिलकर दिशान्तर का गठन किया। दिशान्तर का प्रमुख उद्देश्य स्तरीय प्रस्तुतियों का नियमित मंचन करके रंगमंच के लिए दर्शकों को तैयार करना था।

कोरोना काल के योद्धा को सलाम

आज की दिल्ली, योगराज शर्मा।



“हमे सीमित निराशा को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन असीमित आशा को कभी नहीं भूलना चाहिए।” मार्टिन लूथर किंग जूनियर की ये बातें कोरोना वायरस से लड़ते समय शायद बहुतों को याद नहीं आयी होंगी लेकिन कोरोना वॉरियर्स ने पूरी दुनिया में ये साबित किया कि हमें इस महामारी को अचानक से आयी बड़ी विपदा के रुप में नहीं देखना चाहिए। हमें इसे एक ऐसी चुनौती मानने की जरुरत है जिसे पार पाने के लिए कुछ अलग तरह से कोशिश करने होंगे। कमरकस कर लड़ने होंगे। जिसे हराने के लिए हार नहीं मानने वाले हौसले हमेशा साथ रखने होंगे। 

फ्रंट लाइन वॉरियर्स से लेकर कई ऐसे योद्धाओं ने इस महामारी से लड़ने में अपना योगदान दिया जिसका प्रभाव कईयों के जीवन पर पड़ा। वो सामने ना आते तो समस्या इतनी बड़ी बनी रहती जिसका सामना करना मुमकिन नजर नहीं आता।

भारत भर में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा याद कीजिए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जब इसका ऐलान क्या किया, बाजारों में एक भगदड़ सी मचने लगी। लोगों को लगने लगा कि उनके जरुरत के सामान आज के बाद नहीं मिलने वाले। जिसे जितना बन पड़ा इकट्ठा करता गया। लेकिन उनका क्या जिनके पास इतने संसाधन नहीं कि वो महीने, दो महीने का सामान एक बार में जमा कर सकें। 

चुनौती और विपत्ति की इस घड़ी में वो नेकदिल लोग नायक नजर आए जिनके एक एक प्रयास ने हजारों को इस मुश्किल समय में बचाए रखा। सड़कों पर रहने वाले, अस्पतालों में ईलाज कराने वाले, प्रतिदिन की मजदूरी से अपना पेट पालने वाले को किसी के सहारे की जरुरत थी। 




रौशनी और चकाचौंध से भरे दिल्ली जैसे महानगर में जब चारों ओर अंधेरा सा छाया नजर आने लगा तब श्री मनोज के जैन ने लॉकडाउन में भी घर में लॉक रहने की बजाए, बिना डरे, कोविड-19 जैसी महामारी से संक्रमित हो जाने का खतरा मोलते हुए घर से बाहर निकले और लोगों के पेट भरने का काम करने लगे। लेकिन ये लड़ाई सिर्फ पेट भरने की नहीं थी। लोगों में छाई निराशा, डूबती उम्मीदें, ध्वनि जैसी तेज गति से पांव पसारता कोरोना, कई मोर्चों पर बहुत कुछ करने की जरूरत थी। आइए आपको कोरोना वॉरियर मनोज जैन के एक एक प्रयास को विस्तार से बताते हैं। “संपूर्ण बंदी की घोषणा हुई तो मैंने देखा कि लोगों को अस्पतालों के बाहर खाने और पीने की सुविधा नहीं मिल रही है। निराश और मुर्झाए चेहरे देख कर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने खुद के पैसे से ही सबसे पहले LNJP अस्पताल के बाहर करीब तीन सौ लोगों के खाने पीने की सुविधा की शुरुआत की और इसके साथ ही कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में मैं कूद पड़ा,” उत्साह और आशा से भरे मनोज जैन ने कहा। खाने की क्वालिटी और बेहतर हो इसलिए मनोज जी शुद्ध खाने के लिए मशहूर फूडचेन ‘बिकानेर’ वालों के साथ भी जुड़े। फिर क्या था रुखा-सूखा खिलाने की बजाये उन्होंने लोगों को स्वाद के साथ सेहतमंद खाना खिलाना शुरु कर दिया।  

इस कार्य की शुरुआत में ही उन्होंने मन बना लिया था कि जब तक संभव हुआ लोगों को खाना खिलाते रहेंगे। नेताजी सुभाष मार्ग पर भोजन के पैकेट को बांटने का कार्य प्रतिदिन संपन्न किया जाता था। जिसमें करीब 1000 पैकेट सुबह के समय और करीब 300 पैकेट शाम के समय लोगों के बीच बांटे जाते थे। 

तीन सौ लोगों से बढ़ाकर 1000-1500 भूखे लोगों को पेट भरने का काम करना मनोज जी और उनकी टीम पूरे सिद्दत से करती रही। लेकिन जब लॉ एण्ड ऑर्डर के प्रबंधन में दिक्कत आने लगी, तब दिल्ली पुलिस और वहाँ के स्थानीय RWA के निवेदन करने पर करीब डेढ़ महीने बाद इस परोपकार के कार्य को स्थगित करना पड़ा।  

लेकिन मनोज जी यहीं नहीं रुके। महामारी ने आम जीवन को अस्त-व्यस्त किया तो उसे ठीक करने में मनोज जी की भागेदारी और बढ़ चढ़ कर नजर आने लगी। इसी का नतीजा है कि उन्होंने ना सिर्फ लोगों के भोजन की व्यवस्था की, उन्होंने करीब तीन लाख मास्क और बीस हजार सैनिटाइजर की बोतलें भी बांटी। 

ऐसा करने की प्रेरणा कहाँ से मिली और धन कैसे जुटाए इस सवाल पर मनोज जी कहते हैं, “व्यक्ति जब तक व्यक्तिगत चिन्ताओ के दायरे से ऊपर उठकर पूरी मानवता की वृहद चिंताओं के बारे में नहीं सोचता तब तक उसने जिंदगी जीना ही शुरू नहीं किया है।” 

महामारी के कारण जब कारोबार ठप होते जा रहे थे, लोगों की नौकरियाँ छीन रही थीं, व्यवसाय पर प्रतिकूल असर दिखने लगा था, अर्थव्यस्था चरमरायी सी नजर आ रही थी, ऐसे में अपनी जेब से औरों के भले के लिए लड़ना तथा दूसरों को भी साथ में जोड़ने की कला कोई मनोज जी से सीखे। 

वो कहते हैं कि जीवन में जब दौड़ना मुश्किल लगने लगे तो चलते रहने की कोशिश करनी चाहिए, जब चलना चुनौतीपूर्ण हो जाए तो रेंगने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन स्थिर रहना ठीक नहीं। हमें लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए और दूसरों में ऊर्जा भरते रहना चाहिए। निराशा से घिरे कोविड काल में मनोज जी लगातार यही करते रहे। जब हाथ धोने, मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में भी लोग कतरा रहे थे तब उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जागरुकता के अभियान को फ्रंट से लीड किया।कविता कहानियों के माध्यम से वो सोशल मीडिया में तरह तरह के संदेश देते रहे और WMD यानी कि वाश-Wash, मास्क-Mask डिस्टेंस-Distance का पाठ पढ़ाते रहे। महामारी के खिलाफ लड़ाई में कभी वो मास्क वॉरियर बन जाते तो कभी सोशल डिस्टेंसिंग के फायदे की बात बताते। जिस महामारी के खिलाफ दुनिया भर मे लोगों ने घुटने टेके, जहाँ यूरोपियन देशों ने भी हार मान ली, वहीं भारतवर्ष में मनोज जी जैसे योद्धाओं के अथक प्रयासों ने हजारों लोगों में जीवन की उम्मीद बनाए रखी। 

लोगों को जागरुक करने की कोशिश करने के साथ, लोगों के रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने की भी उन्होंने भरपूर कोशिश की। अर्सेनिक एल्बम-30 की दवा कोविड के खिलाफ जंग में जब कारगार होती दिखी तो उन्होंने इस दवा की हजारों बोतलें मुफ्त में बांटी। 

“कोविड से बचने के लिए सेफ्टी मेजर्स का पालन करना तो जरुरी था, साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना भी उतना ही जरुरी था। इसलिए जैसे ही चिकित्सकों ने इस दवा के जरिए हमारे एम्यूनिटी में सुधार की बात कही हम इसको नि:शुल्क बांटने का बीडा उठा लिये”, मनोज के जैन ने कहा। 

एम्यूनिटी को सुरक्षित और मजूबत बनाए रखने के लिए उनकी संस्था ने ‘अनार रस’ नाम के काढ़ा के पैकेट भी तैयार करवाए। इसमें घर की रसोई में मिलने वाली गुणकारी चीजों से लेकर जरूरी आयुर्वेदिक सामानों का इस्तेमाल किया गया था जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया।

नयू नॉर्मल में हमारा व्यवहार कैसा हो और हम कैसे खुद को और दूसरों को बचाए इसके लिए सहयोग दिल्ली, राजधानी के लोगों का खूब सहयोग करती नजर आयी। जब उनकी टीम ने इसी काम को सोशल मीडिया के जरिए करना चाहा तो इससे राजधानी क्षेत्र से बाहर केलोगोें को भी इसका फायदा मिला। 

 ‘मास्क नहीं तो टोकेंगे, कोरोना को हम रोकेंगे’, ‘बदलकर अपना व्यवहार करें कोरोना पर वार’ जैसे स्लोग्नस को क्रिएटिवली यूज कर के वो और उनकी टीम जनमानस को जागरुक करने का काम करती रही।अगर मनोज जी कोरोना योद्धा की तरह अलग अलग तरीके से लड़ते रहे तो उनके इस कार्य से सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं प्रेरणा लेती रहीं और सराहती रहीं। उन्हें किसी ने कोरोना वॉरियर का सर्टिफिकेट दिया तो किसी ने कोरोना योद्धा का सम्मान। लेकिन सामाजिक कार्यों को अपना लक्ष्य बना चुके मनोज जी को कभी किसी सम्मान की चाहत नहीं रही। उनकी इच्छाएं लोगों के जीवन में जिंदादिली और जीने के हौसले को भरना है और इसके लिए वो अथक प्रयास करने का प्रण ले चुके हैं।

कुर्सी मिलने के बाद वाल्मिकी समाज की अहमियत को भूल गए हैं केजरीवाल-हंसराज हंस

 कुर्सी मिलने के बाद वाल्मिकी समाज की अहमियत को भूल गए हैं केजरीवाल-हंसराज हंस



किसी भी सूरत में वाल्मिकी समाज के साथ हो रहे अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा-हंसराज हंस

केजरीवाल सरकार निगम का पैसा देने की प्रक्रिया को लंबा खींचने में लगी है-हर्ष मल्होत्रा
 
नई दिल्ली, 19 जनवरी। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सांसद हंसराज हंस ने वाल्मिकी समाज के साथ हो रहे अन्याय पर केजरीवाल सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। उन्होंने केजरीवाल को याद दिलाया कि जिस कोरोना काल में आप पूरी तरह से गायब रहे, उस वक्त यही वाल्मिकी समाज के लोग घर का कचड़ा उठाकर यह सुनिश्चित कर रहे थे कि दिल्ली साफ रहे। प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश महामंत्री हर्ष मल्होत्रा और मीडिया प्रमुख नवीन कुमार मौजूद थे। 


हंसराज हंस ने कहा कि पिछले कई दिनों से जिस प्रकार दिल्ली सरकार वाल्मिकी समाज के लोगों को धोखा दे रही है और अपमानित कर रही है, वह जगजाहिर है। उन्होंने कहा कि यह समझने की जरुरत है कि सुबह अपने बच्चों को घर पर सोता छोड़ सफाई कर्मचारी दूसरों के घर में कूड़ा उठाने आते हैं, लेकिन सरकार सफाई कर्मचारियों और कोरोना योद्धाओं का मासिक वेतन भी नहीं दे रही है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने जिन पैसों को संवैधानिक तौर पर निगमों को देने के लिए दिल्ली विधानसभा में पारित किया था यानि 13,000 करोड़ रुपये भी अभी तक नहीं दिय़ा। बीजेपी सांसद हंसराज हंस ने कहा कि केजरीवाल सरकार के मंत्री जो घोषणा करते हैं वो पूरी नहीं करते। आखिर केजरीवाल सरकार को हमारे समाज से इतनी नफरत क्यों है? वाल्मिकी समाज को बार-बार हाथ में कटोरा लेकर भीख मांगते हुए आम आदमी पार्टी क्यों देखना चाहती है?

प्रदेश महामंत्री हर्ष मल्होत्रा ने केजरीवाल से सवाल पूछा कि आखिर निगम का पैसा कब मिलेगा? केजरीवाल सरकार इस प्रक्रिया को लंबा खींचने में क्यों लगी है। तीनों निगमों की एक माह की सेलरी लगभग 650 करोड़ रुपये है, लेकिन केजरीवाल सरकार ने पिछले चार महीने से एक भी पैसा निगम कर्मियों को नहीं दिया। यहां तक कि 14 जनवरी को दिल्ली सरकार ने निगम को 938 करोड़ रुपये देने की बात कही थी लेकिन अभी तक एक भी रुपया दिल्ली सरकार द्वारा नहीं दिया गया है।

MAYOR CALLS A HIGH LEVEL MEETING OF MUNICIPAL FUNCTIONARIES TO DISCUSS SALARY ISSUE OF THE SANITATION STAFF

 MAYOR CALLS A HIGH LEVEL MEETING OF MUNICIPAL FUNCTIONARIES TO DISCUSS SALARY ISSUE OF THE SANITATION STAFF




            North Delhi Mayor, Mr. Jai Prakash  today convened a high level meeting of the senior Corporation functionaries to discuss salary issue of the sanitation staff which was attended by Chairman Standing Committee, Mr. Chhail Bihari Goswami; Leader of the House, Mr. Yogesh Verma; Dy. Chairman Standing Committee, Mr. Vijendra Yadav; DEMS Committee, Chairman, Mr. Surjeet Thakur, Narela Ward Committee Chairman, Mr. Jayender Dabas, Keshavpuram Ward Committee Chairman, Mr. Jogi Ram Jain, Karol Bagh Ward Committee Chairman, Mr. Tejram Four, Rohini Ward Committee Chairman, Mr. Alok Verma, Municipal Commissioner, Mr. Gyanesh Bharti Addl. Cmrs. , Ms. Swati Sharma, Mr. Sandip Jacques and Mr. Sunil Bhadu and other senior officials were also present.

            During the meeting Mayor discussed all the issue pertains to the Sanitation workers. He said that were are trying very hard to full fill all the demands of the sanitation workers in a phase manner. 

The financial situation was discussed at length.  It was desired that the revenue generation be further intensified and all due recoveries be given due care. The defaulters be given opportunity to pay their dues in due time. Mayor, Mr. Jai Prakash appealed the striking staff to resume their duties as they are trying arrange for the finances to pay the due salaries. He said that the salary will be disbursed as per the availability of funds Group wise. He hoped that permanent solution to the situation will certainly come.


अरविन्द सरकार ने पिछले 7 वर्षों में दिल्लीवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के नाम पर केवल गुमराह किया है।- अरविन्द सरकार ने भ्रष्टाचार करके जलबोर्ड को घाटे में पहुॅचाया है- कांग्रेस

 अरविन्द सरकार ने पिछले वर्षों में दिल्लीवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के नाम पर केवल गुमराह किया है।- अरविन्द सरकार ने भ्रष्टाचार करके जलबोर्ड को घाटे में पहुॅचाया है- कांग्रेस


दिल्ली के लगभग आधे गांवों में ही सीवर पड़ा हैबाकि गांवों का सीवेज सीधा यमुना में जाता है। कांग्रेस





अरविन्द सरकार ने यमुना सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये भ्रष्टाचार की भेट चढाऐ-यमुना आज भी भीषण प्रदूषित है- अनिल भारद्वाज


नई दिल्ली, 19 जनवरी, 2021 - दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय मे आयोजित संवाददाता सम्मेलन को मुख्यमंत्री के पूर्व संसदीय सचिव एवं पूर्व विधायक श्री अनिल भारद्वाजदिल्ली बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष चौमतीन अहमद और पूर्व विधायक श्री विजय सिंह लोचव ने दिल्ली की अरविन्द सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में दिल्लीवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के नाम पर गुमराह किया है। उन्होंने कहा कि अरविन्द सरकार ने पर्यावरण सुधारने के लिए कुछ नही कियाकरोड़ो रुपये यमुना सफाई के नाम पर खर्च किएदिल्ली जल बोर्ड घाटे में पहुॅचा दियाइसकी सीबीआई जांच की जानी चाहिए।


श्री अनिल भारद्वाज ने कहा कि यह दिल्ली की अरविन्द सरकार के लिए शर्म की बात है सुप्रीम कोर्ट को यमुना में अत्यधिक अमोनिया की मात्रा के कारण प्रदूषित पानी के कारण दोबारा संज्ञान लेना पड़ायमुना का पानी इतना प्रदूषित है जो संयत्रित भी नही किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अरविन्द सरकार यमुना के प्रदूषित जल को संशोधित करने की बजाय केन्द्र सरकारहरियाणा सरकार और भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम पर आरोप लगा रहे है। श्री भारद्वाज ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने एन.जी.टी. को निर्देश दिए है कि यमुना की देखरेख के लिए एक कमेटी गठित की जाए जबकि इससे पहले भी एनजीटी के निर्देशों पर सरकारों ने संवेदनशीलता नही दिखाई है।


श्री अनिल भारद्वाज ने कहा कि यमुना के जल में अमोनिया की मात्रा नार्मल 0.5-0.75 से लेकर पीपीएम वाटर ट्रीटमेंन्ट के बाद उसे पीने योग्य बनाया जा सकता है परंतु आज यमुना जल अमोनिया की मात्रा 10-12 पीपीएम जिसे भविष्य में यमुना जल को संशोधित करने के लिए टेक्नोलॉजी को वाटर ट्रीटमेंट करने की योजना हैवह संयत्र भी यमुना जल को संशोधित नही कर सकतेइनके लिए पूरी तरह से मुख्यमंत्री अरविन्द के आधीन दिल्ली जल बोर्ड जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जल में अमोनिया की इतनी अधिक मात्रा के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए खतरा हो सकता है।

 

श्री अनिल भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में जल प्रदूषित होने कारण सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी 2020 को स्वयं संज्ञान लिया और एनजीटी को कार्यवाही के लिए भी कहापरंतु एनजीटी के तमाम आदेशों के बावजूद भी सरकारें सोई हुई है।  दिल्ली सरकार ने स्वयं के अध्ययन में यह पाया है कि वर्ष 2020 में 33 दिन अमोनिया का स्तर उच्चतम मानक से अधिक रहा जिसके कारण ओखलाचंद्रवाल व वजीराबाद प्लांट जो दिल्ली की एक तिहाई सप्लाई के कारक हैपूर्णतः प्रभावित हुई।  उन्होंने कहा कि भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम और दिल्ली की अरविन्द सरकार दिल्ली में 56 एसटीपी योजना के जमीन की उपलब्धता को लेकर नूराकुश्ती कर रहे है, 1739 अनाधिकृत कॉलोनियों में से मात्र 434 कॉलोनियों में ही सीवर लाईन बिछी है। भाजपा और आम आदमी पार्टी जिम्मेदारी निभाने की बजाय एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।


श्री अनिल भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस के शासन में दिल्ली जल बोर्ड फायदे में चल रहा था और अरविन्द केजरीवाल टैंकर माफिया के आरोप लगाते थे परंतु आज पिछले तीन बार से शासित अरविन्द के नेतृत्व में दिल्ली जल बोर्ड घाटे में चल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की शीला सरकार के 15 वर्षों के दौरान 1998-99 के 284 एमजीडी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को 2012-2013 में दुगना करके 545 एमजीडी किया।


पूर्व विधायक चौमतीन अहमद ने कहा कि वजीराबाद से ओखला के बीच यमुना का कुल 75 प्रतिशत जल प्रदूषित होता हैपानी में आक्सीजन की बेहद कमी से यमुना में मछलियां जीवित नही रह सकती। उन्होंने कहा कि यमुना को दूषित करने में 96 प्रतिशत योगदान दिल्ली के नालों का है जिनमें सीवेजऔद्योगिक वेस्ट और सोलिड वेस्ट सीधा आता है। उन्होंने कहा कि नवम्बर 2020 में सीपीसीबी ने 22 नालों की मानिटरिंग कराई जिनमें 14 नाले खुले पाए गए और सब-ड्रेनों का 140 एमजीडी जलमल अभी तक इन्टरसेप्टेड नही रहा है।


चौमतीन अहमद ने कहा कि दिल्ली में 744 एमजीडी सीवेज उत्पन्न होता है जिसमें मात्र 500 एमजीडी सीवेज ही ट्रीट होता है बाकी सीवेज सीधा यमुना में जाता हैजो यमुना को प्रदूषित करने में मुख्यतः सहायक है। उन्होंने कहा कि अरविन्द केजरीवाल सरकार ने पिछले वर्षों में एसटीपी क्षमता बढ़ाने की दिशा में कोई काम नही किया जबकि 2015 और 2020 के चुनाव घोषणा पत्रों में दिल्ली की जनता से बड़े-बड़े वायदे किए थे। चौमतीन ने कहा कि 2019-20 के जल बोर्ड बजट के हिसाब से आज जल बोर्ड 3828.21 करोड़ घाटे में है। उन्होंने कहा कि जल बोर्ड को अरविन्द केजरीवाल ने घाटे में पहुचाया हैजिसका मुख्य कारण भ्रष्टाचार है।


पूर्व विधायक श्री विजय लोचव ने कहा कि वर्तमान में जल संयत्र से करीब 500 एमजीडी पानी को साफ करके नालों डाला जाता है जिसका केवल 20 प्रतिशत ही उपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि शोधित जल का इस्तेमाल निर्माण कार्यछिड़कावफसलों की सिंचाई व पार्कों के लिए किया जा सकता हैजिससे पीने के पानी की डिमांड सप्लाई को के अंतर को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस पानी का इस्तेमाल दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के 69 एकड़ में बने 132 में किया जा सकता है जबकि इनके पास 6822 पार्क है। पूर्वी दिल्ली के 444 पार्क में और उत्तरी दिल्ली के 401 पार्कों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि पूर्वी दिल्ली के 1338 पार्क हैं और उत्तरी दिल्ली के 640 पार्क है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लगभग 50 प्रतिशत शहरीकृत गांवों में ही सीवर पड़ा हैबाकि गांवों का सीवेज सीधा यमुना में जाता है।