येस बैंक को मार्च की तिमाही में 2,629 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है. हालांकि पूरे वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान बैंक को 16,418 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ है. वित्त वर्ष 2018-19 में बैंक को 1,720.27 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था.
एनपीए में बढ़त
बैंक का बहीखाता चिंताजनक बना हुआ है. बैंक का 63 फीसदी कॉरपोरेट निवेश नॉन-परफॉर्मिंग निवेश में बदल चुका है. वित्त वर्ष के दौरान बैंक का कुल एनपीए बढ़कर 32,877.59 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो कि उसके कुल कर्ज वितरण का 16.8 फीसदी है.
कैसे हुआ मार्च तिमाही में मुनाफा
असल में मार्च की तिमाही में बैंक को दिख रहा यह मुनाफा किसी कारोबारी चमत्कार की वजह से नहीं बल्कि राहत योजना के तहत मिलने वाली मदद की वजह से है. बैंक को अपने 6,296.94 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 बॉन्ड निवेश को राइट-ऑफ करने की छूट दी गई. इसकी वजह से यह रकम उसके बहीखाते से हटा दी गई और मार्च की चौथी तिमाही में बैंक को कुल 2,628.61 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दिख रहा है. अगर ऐसा नहीं होता तो बैंक को 3,668 करोड़ रुपये का घाटा होता.
वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान बैंक का नेट इंट्रेस्ट इनकम (NII-अर्जित ब्याज और दिए गए ब्याज का अंतर) घटकर महज 6,805 करोड़ रुपये रह गया.
येस बैंक को बचाने का है ये है प्लान
गौरतलब है कि येस बैंक को मार्च में भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले एक कंसोर्शियम के द्वारा डूबने से बचाने के प्लान पर काम किया गया. बैंक को दिसंबर की तिमाही में 18,560 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था. अब एसबीआई के पूर्व सीएफओ प्रशांत कुमार येस बैंक के प्रमुख बनाए गए हैं.
गत 13 मार्च को सरकार ने रिजर्व बैंक द्वारा तैयार राहत प्लान को अधिसूचित किया था. इसके तहत एक 'येस बैक लिमिटेड रीकंस्ट्रक्शन स्कीम 2020' जारी की गई. इस प्लान के मुताबिक एसबीआई और अन्य निवेशकों ने बैंक में करीब 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली है. इसके अलावा ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक, बंधन बैंक, फेडरल बैंक जैसे निजी बैंकों और एचडीएफसी लिमिटेड ने भी बैंक में करीब 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है.

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