नई दिल्ली: विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने ‘पीस बॉन्ड’ पर हस्ताक्षर करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और संविधान लोगों को अपनी बात रखने तथा विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है।
अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, नेहा बोरा ने कहा कि विरोध करना उनके मौलिक अधिकारों में शामिल है, लेकिन इसी अधिकार को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी कीमत पर इस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी।
नेहा बोरा ने विरोध प्रदर्शन करने वालों से शांति भंग नहीं करने संबंधी लिखित आश्वासन लिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विरोध करने के अधिकार पर इस तरह की शर्तें लगाना उचित नहीं है।
इस बयान के साथ एक बार फिर विरोध प्रदर्शन के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस सामने आई है।

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