नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' का उद्घाटन किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत की सराहना की और दो टूक कहा कि हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मस्थली तथा समग्र अस्तित्व का मूल आधार है। पीएम मोदी ने समाज को विभाजित करने वाली ताकतों के प्रति आगाह करते हुए देशवासियों से एकजुट होने और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर अग्रसर होने का आह्वान किया।
'विभाजक ताकतों के खिलाफ एकजुट हो समाज'
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समय के साथ देश और समाज के समक्ष नई प्रकार की चुनौतियाँ और कुरीतियाँ उभरी हैं, जिनसे सामूहिक शक्ति के साथ निपटना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया, "हमें समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना होगा और नागरिकों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करना होगा। प्रत्येक नागरिक को वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ना अनिवार्य है।"
संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा का संकल्प
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक भूभाग नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का उद्गम स्थल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रखते हुए ही देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। इन राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अधिक सक्रिय और सजग भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
क्या आप इस खबर के लिए सोशल मीडिया पर शेयर करने योग्य केवल हेडलाइन टेक्स्ट या यूट्यूब थंबनेल के लिए संक्षिप्त बुलेटिन्स तैयार करवाना चाहते हैं?

No comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.