google.com, pub-7314354026449841, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Aaj Ki Delhi: ₹10,000 के PUCC जुर्माने पर पुनर्विचार की मांग: पूर्व डिप्टी कमिश्नर ने उठाया अनुपातिक दंड का मुद्दा

₹10,000 के PUCC जुर्माने पर पुनर्विचार की मांग: पूर्व डिप्टी कमिश्नर ने उठाया अनुपातिक दंड का मुद्दा


सिर्फ कागज की चूक और असल धुएं को एक तराजू में तौलना नाइंसाफी' — पी. एस. बहल

योगराज शर्मा, नई दिल्ली । दिल्ली-एनसीआर में गंभीर रूप से बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच वाहनों के पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) पर कटने वाले भारी-भरकम 10,000 रुपये के चालान को लेकर नई बहस छिड़ गई है। परिवहन विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर और सजग नागरिक पी. एस. बहल ने एक जनहित प्रतिनिधित्व के जरिए इस बात पर जोर दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण सख्त होना चाहिए, लेकिन इसके तहत लगने वाला आर्थिक दंड व्यावहारिक, न्यायसंगत और अनुपातिक (Proportionate) होना बेहद जरूरी है।

पूर्व डिप्टी कमिश्नर बहल का कहना है कि वर्तमान मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ₹10,000 का चालान एक कड़ा नीतिगत फैसला हो सकता है, लेकिन हर मामले में समान दंड लगाना तार्किक नहीं दिखता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी वाहन चालक की पीयूसीसी की वैधता समाप्त हो गई है, लेकिन मौके पर किसी वास्तविक एमिशन टेस्ट (Emission Test) से यह साबित नहीं हुआ कि वाहन तय मानकों से ज्यादा धुआं फेंक रहा है—तो केवल प्रमाणपत्र की चूक (Certificate-related lapse) और वास्तविक अत्यधिक प्रदूषण (Actual excessive emission) दोनों को एक ही स्तर पर रखकर ₹10,000 वसूलना कितना उचित है?

प्रतिनिधित्व में इस बात को रेखांकित किया गया है कि कई पुराने दोपहिया वाहनों की मौजूदा बाजार कीमत 10,000 रुपये से भी कम होती है। ऐसे में पहली बार या अनजाने में हुई चूक पर सीधे ₹10,000 का दंड वाहन मालिक पर भारी आर्थिक संकट पैदा करता है, जबकि उस समय उसका वास्तविक प्रदूषण स्तर भी निर्धारित नहीं हुआ होता। नीति-निर्माताओं को इस तरह की व्यावहारिक कठिनाइयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।


रोडसाइड टेस्टिंग शुरू हो, आदतन उल्लंघनकर्ताओं पर कसे नकेल'


पी. एस. बहल ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पीयूसी नियमों को कमजोर करने या प्रदूषण फैलाने वालों को राहत देने की नहीं है। इसके विपरीत, उन्होंने मांग की है कि:

सड़क पर औचक जांच (Surprise Roadside Testing):** केवल अधिकृत पीयूसी केंद्रों पर निर्भर रहने के बजाय प्रदूषण प्रवर्तन टीमों (Enforcement Staff) को आधुनिक उपकरणों के साथ सड़कों पर नियमित औचक जांच के लिए उतारा जाए, ताकि वास्तविक रूप से धुआं छोड़ने वाले वाहनों की मौके पर पहचान हो सके।

पहली भूल और आदतन उल्लंघन में फर्क:** पहली बार हुई चूक और जानबूझकर बार-बार बिना पीयूसी वाहन चलाने वाले habitual defaulters के बीच अंतर तय हो।

फर्जी पीयूसी पर सख्त एक्शन:** फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वालों और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल व प्राइवेट वाहनों पर ज्यादा कड़ी कार्रवाई हो।


केवल वाहनों पर चालान से साफ नहीं होगी हवा


बहल के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा के लिए केवल वाहन जिम्मेदार नहीं हैं। धूल, औद्योगिक धुआं, कंस्ट्रक्शन, कचरा व बायोमास जलाना जैसे अनेक बड़े स्रोत हैं। प्रदूषण नियंत्रण का वैज्ञानिक और समग्र समाधान तभी संभव है जब सभी स्रोतों पर समान रूप से वार किया जाए, न कि केवल वाहन चालकों पर भारी आर्थिक बोझ डालकर जिम्मेदारी पूरी समझी जाए।

स्वच्छ हवा और न्यायसंगत प्रवर्तन दोनों एक साथ चलने चाहिए। जुर्माना ऐसा हो जो उल्लंघन की गंभीरता, वास्तविक प्रदूषण और जनहित के अनुपात में हो।"**

पी. एस. बहल**, पूर्व डिप्टी कमिश्नर (परिवहन विभाग)

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