30 लाख दस्तावेजों में बिल गेट्स से जुड़े चौंकाने वाले दावे, ईमेल्स ने बढ़ाई हलचल


 अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) की ओर से जारी की गई जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़ी 30 लाख से अधिक नई फाइलों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। इन दस्तावेजों में दुनिया के बड़े उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स को लेकर भी गंभीर दावे किए गए हैं।

जारी फाइलों में जिन ईमेल्स का उल्लेख है, उनके मुताबिक एपस्टीन और बिल गेट्स के बीच संवाद हुआ था। इन ईमेल्स में गेट्स से जुड़ी निजी जानकारियों का जिक्र बताया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर उनके निजी संबंधों और स्वास्थ्य से जुड़े दावे शामिल हैं। दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने एक आंतरिक ईमेल में दावा किया था कि गेट्स ने उनसे कुछ संवेदनशील ईमेल हटाने का अनुरोध किया था।

फाइलों में यह भी कहा गया है कि जुलाई 2013 के आसपास, जब गेट्स ने एपस्टीन से दूरी बनानी शुरू की, उसी दौरान एपस्टीन ने अपने एक ईमेल में नाराजगी जाहिर की और कुछ कथित राजों का जिक्र किया। इन दावों में विदेशी महिलाओं और निजी संबंधों से जुड़े संदर्भ भी शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन दस्तावेजों में किए गए दावे अभी आरोपों के स्तर पर हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न ही इस मामले में बिल गेट्स की ओर से किसी नए आधिकारिक बयान की पुष्टि सामने आई है। DOJ द्वारा जारी फाइलों को लेकर जांच और कानूनी समीक्षा जारी है, जिसके बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो पाएगी।

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद डेक्सोना इंजेक्शन पर उठे सवाल, जानिए क्या है इसकी सच्चाई


 साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत के बाद DEXONA इंजेक्शन चर्चा और सवालों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इंजेक्शन लगते ही उनकी मौत हो गई, वहीं एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। हालांकि मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले तथ्यों और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।

DEXONA इंजेक्शन, जिसका जेनेरिक नाम Dexamethasone है, एक शक्तिशाली स्टेरॉइड दवा है। इसका इस्तेमाल शरीर में तेज सूजन, गंभीर एलर्जी, दमा के अटैक, ऑटोइम्यून बीमारियों, ब्रेन सूजन, शॉक और कुछ गंभीर संक्रमणों में किया जाता है। सही मरीज और सही डोज़ में यह दवा जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गलत इस्तेमाल या बिना डॉक्टर की सलाह DEXONA लेना खतरनाक हो सकता है। खासतौर पर अगर मरीज को पहले से शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी या कोई गंभीर संक्रमण हो, तो इसके दुष्प्रभाव जानलेवा साबित हो सकते हैं। इसके साइड इफेक्ट्स में ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना, बीपी असंतुलन, इम्यून सिस्टम कमजोर होना और हार्ट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं।

फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक इंजेक्शन को मौत का कारण बताना जल्दबाजी होगी। यह मामला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि स्टेरॉइड इंजेक्शन का उपयोग केवल डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए

आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे ज्यादा छेड़छाड़ च्यवनप्राश के साथ, मूल स्वरूप से दूर होता जा रहा है बाजारू उत्पाद

 

नई दिल्ली: आयुर्वेद में च्यवनप्राश को एक संपूर्ण रसायन औषधि माना गया है, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता में मिलता है। खासकर सर्दियों के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसका सेवन सदियों से किया जाता रहा है। लेकिन समय के साथ बाजार में मिलने वाले च्यवनप्राश के स्वरूप में व्यापक बदलाव और छेड़छाड़ देखने को मिल रही है।

आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि आज बाजार में उपलब्ध अधिकांश च्यवनप्राश अपने मूल आयुर्वेदिक स्वरूप से काफी दूर हो चुके हैं। पारंपरिक च्यवनप्राश में आंवला, दशमूल, अश्वगंधा, पिप्पली, शतावरी, गिलोय समेत दर्जनों जड़ी-बूटियों का संतुलित मिश्रण होता है। वहीं आजकल के उत्पादों में स्वाद और मार्केटिंग के लिए चीनी, फ्लेवर और प्रिज़र्वेटिव्स की मात्रा बढ़ा दी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे ज्यादा प्रयोग और बदलाव च्यवनप्राश के साथ ही हुआ है। इसके कारण इसके औषधीय गुणों पर भी असर पड़ता है। कई बार लोग यह समझ ही नहीं पाते कि वे जिस च्यवनप्राश का सेवन कर रहे हैं, वह आयुर्वेदिक है या सिर्फ एक हेल्थ सप्लीमेंट।

आयुर्वेदाचार्य सलाह देते हैं कि यदि संभव हो तो चरक संहिता में वर्णित विधि के अनुसार घर पर च्यवनप्राश बनाना सबसे बेहतर विकल्प है। घर पर बनाया गया च्यवनप्राश न केवल शुद्ध होता है, बल्कि शरीर को शक्ति, ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता भी प्रदान करता है।

TRP गेम में ‘नागिन’ ने मारी बाज़ी, ‘तारक मेहता’ टॉप 10 से बाहर

 

नई दिल्ली: टीवी के टीआरपी चार्ट में इस हफ्ते बड़ा बदलाव देखने को मिला है. एकता कपूर के सुपरनेचुरल शो ‘नागिन’ ने नंबर 1 की पोज़िशन पर कब्जा कर लिया है और दर्शकों का जबरदस्त प्यार पा रहा है.

प्रियंका चहर चौधरी और ईशा सिंह स्टारर यह शो, ‘सास भी कभी बहू थी’ और ‘अनुपमा’ को पीछे छोड़ते हुए सबसे ऊपर आ गया है. इस बार की रेटिंग से कई पुराने शो चौकन्ने रह गए, जिसमें लंबे समय से चल रहा ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ भी शामिल है. यह लोकप्रिय कॉमेडी शो अब 12वें नंबर पर खिसक गया और टॉप 10 से बाहर हो गया.

टीआरपी चार्ट में इस हफ्ते स्थिति इस प्रकार रही:

टीआरपी की इस नई रेस ने साबित कर दिया कि सुपरनेचुरल और रोमांच से भरपूर कंटेंट अभी भी दर्शकों का सबसे पसंदीदा विकल्प है.


अनन्या पांडे-लक्ष्य की ‘चांद मेरा दिल’ की रिलीज़ तय, सामने आया बड़ा अपडेट


 

नई दिल्ली: धर्मा प्रोडक्शंस की रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ के फैन्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने जानकारी दी है कि फिल्म 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.

फिल्म में अनन्या पांडे और लक्ष्य मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे. इसका निर्देशन विवेक सोनी ने किया है और निर्माता करण जौहर हैं. तरण आदर्श ने  बताया कि यह फिल्म एक इंटेंस और म्यूजिकल लव स्टोरी है.

‘चांद मेरा दिल’ लक्ष्य के करियर की अगली बड़ी रिलीज मानी जा रही है. लक्ष्य ने साल 2023 में एक्शन फिल्म ‘किल’ से फीचर डेब्यू किया था, जिसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी. इसके अलावा, वह हाल ही में आर्यन खान की वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में भी नजर आए, जिससे उनकी पहचान और मजबूत हुई.

फिल्म का ऐलान साल 2024 में हुआ था, और पहले खबरें थीं कि इसे 2025 में रिलीज़ किया जाएगा. लेकिन अब तय हो गया है कि इस साल मई में दर्शक इसे बड़े पर्दे पर देख सकेंगे.

सलमान खान से पंगा पड़ा भारी, अभिनव कश्यप पर मानहानि केस, कोर्ट ने लगाई बयानबाजी पर रोक


 नई दिल्ली: ‘दबंग’ के डायरेक्टर अभिनव कश्यप के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. उन्होंने सलमान खान और उनके परिवार को लेकर सार्वजनिक तौर पर कई आरोप लगाए थे, अब भाईजान ने उन पर मानहानि का केस दर्ज करवा दिया है.

कोर्ट ने अभिनव कश्यप को आदेश दिया है कि वे सलमान खान और उनके परिवार के खिलाफ कोई भी बयान सार्वजनिक रूप से न दें. अभिनव ने पहले दावा किया था कि सलमान खान ने उन्हें ‘दबंग’ फ्रेंचाइजी की दूसरी फिल्म से बाहर करवा दिया, जिससे उनका करियर प्रभावित हुआ. उन्होंने कई बार खुलासा किया था कि इस कारण उन्हें इंडस्ट्री में काम नहीं मिल रहा.

सलमान खान के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि अभिनव के बयान उनके प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसलिए उन्हें रोकना जरूरी है. अदालत ने भी इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि सार्वजनिक बयानबाजी से और नुकसान न हो.

अब अभिनव कश्यप के लिए यह मामला सिर्फ कानूनी लड़ाई बनकर रह गया है, और वे किसी भी तरह का विवादास्पद बयान देने से बचेंगे.

हैदराबाद में हॉर्स सफारी का नया रोमांच, गांव के बीच मिलेगा अनोखा अनुभव


 हैदराबाद: अब वीकेंड पर शहर की भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति और रोमांच का मज़ा लेना आसान हो गया है. कोकापेट से सिर्फ 40 मिनट की दूरी पर स्थित HYD हॉर्स एडवेंचर तेलंगाना का पहला ऐसा ग्रामीण क्लब है, जो पर्यटकों को शहर से दूर खुली हरियाली और घुड़सवारी का अनोखा अनुभव देता है.

यह 25 एकड़ के फार्महाउस में 10 किलोमीटर लंबी निर्देशित हॉर्स सफारी का आनंद लिया जा सकता है. यह सफर जंगलों, झील किनारों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है. सफारी नौसिखियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, और सुरक्षा के लिए हेलमेट, बूट और प्रशिक्षित गाइड की सुविधा दी जाती है. दो घंटे के इस पैकेज में एक घंटा घुड़सवारी और एक घंटा जीप सफारी शामिल है, जिससे रोमांच दोगुना हो जाता है.

फार्म के घोड़े अर्जुन ने अपनी उत्कृष्टता साबित की है. दिसंबर 2025 के चेतक महोत्सव में नुक्रा श्रेणी में दूसरा स्थान और जनवरी 2026 में इंदौर के सेंट्रल इंडिया हॉर्स शो में राष्ट्रीय स्तर की मान्यता अर्जुन की और फार्म में घोड़ों के उच्च स्तर के रख-रखाव को दर्शाती है.

छात्रों से कारोबारियों तक, नोएडा की निगाहें वित्त मंत्री पर टिकी


 नोएडा: 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 हर वर्ग की उम्मीदों का केंद्र बन गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवीं बार सदन में बजट पेश करेंगी, और यह पहली बार होगा कि रविवार को बजट पेश किया जाएगा. छात्रों, एजुकेशन एक्सपर्ट्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, व्यापारियों और आम लोगों की नजरें इस बजट पर हैं, जो सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करेगा.

छात्र और युवा चाहते हैं AI और स्टार्टअप्स पर फोकस
छात्र मेधांश का कहना है कि स्टार्टअप्स पर जीएसटी का बोझ कम किया जाना चाहिए और देश में पूंजी स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कराई जाए. AI 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.7 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है, इसलिए बजट में इस सेक्टर को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. एजुकेशनलिस्ट अरुण मौर्य और छात्रा सनाया सेठ का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में AI-ओरिएंटेड शॉर्ट-टर्म कोर्सेज लाने चाहिए, ताकि युवा सीधे रोजगार से जुड़ सकें.


व्यापारी समीर सेठ का कहना है कि बीते साल लोकल बिजनेस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. बजट में टैक्स और रेगुलेटरी बोझ कम, छोटे व्यापारियों के लिए ग्रांट्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सपोर्ट होना जरूरी है.

अनस्टॉप के फाउंडर अंकित अग्रवाल का कहना है कि स्टार्टअप्स पर टैक्स तभी लगाया जाए जब बिक्री हो. स्किल अपग्रेडेशन कोर्स और सर्टिफिकेट पर जीएसटी हटाने की मांग भी उठाई गई है.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट डेवलपर्स चाहते हैं कि बजट स्थिर नीतियों और वित्तीय सपोर्ट के जरिए खरीदारों का भरोसा बनाए. जेवर एयरपोर्ट, मेट्रो और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी ने इलाके को हाई-ग्रोथ कॉरिडोर बनाया है.

कुल मिलाकर, बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्टार्टअप्स, स्किल डेवलपमेंट और रियल एस्टेट को बढ़ावा देकर भविष्य की मजबूत नींव रखे.

बच्चे के PTM में टीचर से पूछें ये 5 सवाल, पढ़ाई और व्यवहार दोनों में सुधार


 नई दिल्ली: पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) सिर्फ नंबर या रैंक देखने का मौका नहीं है, बल्कि यह बच्चे की पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक विकास को समझने का सही समय है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वासी और संतुलित बने, तो PTM में टीचर से ये 5 सवाल जरूर पूछें:

1. मेरा बच्चा क्लास में पढ़ाई को कितना समझ पा रहा है?
सिर्फ रटने की बजाय बच्चे को विषयों की असली समझ है या नहीं, यह जानना जरूरी है. क्या वह सवाल पूछता है? क्या वह कॉन्सेप्ट को समझकर जवाब देता है? इससे घर पर पढ़ाई में सही दिशा मिलती है.

टीचर से जानें कि कौन-से विषय या टॉपिक में बच्चा पीछे है और किस तरह की मदद की जरूरत है.

क्या बच्चा क्लास में ध्यान लगाता है, ग्रुप एक्टिविटीज़ में भाग लेता है या दोस्तों के साथ सहयोग करता है?

समय पर काम पूरा करना और समझदारी से असाइनमेंट करना, बच्चे की जिम्मेदारी और अनुशासन को दर्शाता है.

क्या वह साथी छात्रों के साथ मेलजोल में है? किसी तरह की चिंता या तनाव है तो टीचर से सलाह लें.

इन सवालों से न सिर्फ पढ़ाई में सुधार होता है, बल्कि बच्चे का आत्मविश्वास और समग्र विकास भी बेहतर बनता है.

.किसान ध्यान दें! फरवरी में दलहनी फसलों के लिए कीटों का खतरा, ऐसे करें बचाव

 

फरवरी का महीना चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस दौरान फली बेधक और सेमिलूपर जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं, जो पत्तियों और फलियों को काटकर पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर कीट नियंत्रण अपनाने की सलाह दी है.

कृषि विज्ञान केंद्र, नियामतपुर के डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि इन कीटों से निपटने के लिए इज़ादिरैक्टिन (Azadirachtin 0.03%) या नीम तेल का छिड़काव प्रभावी है. एक हेक्टेयर खेत के लिए 5 लीटर दवा को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें. यदि फली बेधक का प्रकोप अधिक हो, तो फेनवेलरेट (Fenvalerate) डस्ट 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करना चाहिए.

दवा के असर को बढ़ाने के लिए स्प्रे में स्टीकर (Sticker) मिलाना जरूरी है, ताकि दवा पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक जाए और कीटों का प्रभावी खात्मा हो. किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की निगरानी नियमित रखें और समय पर छिड़काव कर अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित बनाएं, ताकि आने वाले मौसम में अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सके.

डिलीवरी बॉय होने पर लड़की ने कथित स्कूल फ्रेंड का उड़ाया मजाक, सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा


  जिसमें एक लड़की अपने कथित स्कूल फ्रेंड का वीडियो बनाकर उसके पेशे का मजाक उड़ाती नजर आ रही है। वीडियो में युवक एक डिलीवरी कंपनी का बैग पहने दिखाई देता है, जबकि लड़की कैमरे के सामने हंसते हुए उसे डिलीवरी बॉय बताकर तंज कसती है। इस दौरान युवक असहज और चुप नजर आता है।

वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने लड़की के इस व्यवहार को असंवेदनशील और घमंडी बताया। यूजर्स का कहना है कि मेहनत करके रोजी-रोटी कमाने वाला कोई भी काम छोटा नहीं होता, बल्कि ऐसे लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए। कई लोगों ने कमेंट करते हुए लिखा कि “डिलीवरी बॉय हमारे लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, उनका मजाक उड़ाना शर्मनाक है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए इस तरह का कंटेंट बनाना गलत सोच को दर्शाता है। वहीं, कई लोगों ने युवक के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि ईमानदारी से किया गया काम किसी भी डिग्री या स्टेटस से कम नहीं होता।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो कब और कहां का है, और दोनों की पहचान भी सामने नहीं आई है। हालांकि, वीडियो ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि समाज में आज भी पेशे के आधार पर लोगों को जज किया जाता है।

पढ़ाई करने बैठते जरूर हैं लेकिन मन नहीं लगता? अपनाएं ये उपाय


  किताबें खोलते हैं, स्टडी टेबल पर बैठते हैं, लेकिन 5–10 मिनट में ही मन भटकने लगता है। याद किया हुआ तुरंत भूल जाना, स्मरण शक्ति कमजोर होना और एकाग्रता की कमी — यह समस्या आजकल ज्यादातर छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में देखी जा रही है।

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, पढ़ाई में मन न लगने का संबंध बृहस्पति ग्रह, शुक्र ग्रह और मन की कमजोरी से होता है। यदि सही दिशा, वातावरण और कुछ सरल उपाय अपनाए जाएं तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार पढ़ाई में मन लगाने के असरदार उपाय—वास्तु के अनुसार पढ़ाई करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना सबसे शुभ माना जाता है।

इससे ज्ञान बढ़ता है और स्मरण शक्ति मजबूत होती है।
 दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पढ़ाई करने से मन जल्दी भटकता है।

हृदय रोगी बिना डरे खा सकेंगे अंडा, अपनाएं ये 5 तरीके, नहीं बढ़ेगा कोलेस्ट्रॉल


 अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग से जूझ रहे लोग अक्सर इसे खाने से डरते हैं। लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि अंडा खाने से कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ता है। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो अंडे को डाइट से पूरी तरह हटाने की जरूरत नहीं, बल्कि इसे खाने का सही और स्मार्ट तरीका अपनाना जरूरी है।

वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अग्रवाल के अनुसार, “अंडे में मौजूद प्रोटीन, विटामिन-D और ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, बशर्ते इन्हें सही तरीके से खाया जाए।”

आइए जानते हैं 5 ऐसे स्मार्ट तरीके, जिनसे हृदय रोगी भी बिना डरे अंडा खा सकते हैं—

रिकॉर्ड हाई से फिसली चांदी, MCX पर 10% तक टूटी कीमत


 एमसीएक्स (MCX) पर चांदी की कीमत में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। ताज़ा कारोबार में चांदी करीब 6% टूटकर 3,75,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह स्तर 29 जनवरी को बनाए गए इसके रिकॉर्ड उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलो से लगभग 10% यानी करीब 44,000 रुपये नीचे है।

बाजार जानकारों के मुताबिक, चांदी में यह गिरावट मुनाफावसूली, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और डॉलर में मजबूती के कारण आई है। बीते सत्रों में चांदी ने तेज रैली दिखाई थी, जिसके बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों पर दबाव देखा गया, जिसका सीधा असर घरेलू वायदा बाजार पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

 कुल मिलाकर, रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद चांदी में आई यह तेज गिरावट बताती है कि कमोडिटी बाजार में तेजी के साथ जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है

मूंगफली खाकर छिलका फेंकने की आदत कर दें बंद, इन 6 तरीकों से कर लें इस्तेमाल

सर्दियों में मूंगफली खाना लगभग हर घर में आम है। लेकिन अक्सर लोग मूंगफली खाने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो आज से यह आदत बदल लीजिए। दरअसल, मूंगफली के छिलके कई काम के होते हैं और इन्हें घर में 6 स्मार्ट तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है।

मूंगफली के छिलकों को सुखाकर मिट्टी में मिला दें। ये धीरे-धीरे गलकर ऑर्गेनिक खाद बन जाते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है।

छिलकों को पौधों की जड़ों के आसपास बिछा दें। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं।

घर में सब्जियां उगाते हैं तो मूंगफली के छिलके मिट्टी को हल्का और पोषक बनाने में मदद करते हैं।

किचन वेस्ट की कम्पोस्ट बनाते समय मूंगफली के छिलके मिलाने से कम्पोस्ट जल्दी और बेहतर तैयार होती है।

कुछ लोग इन्हें पालतू जानवरों की बिछावन में भी इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि ये नमी सोखने में मददगार होते हैं (साफ और सूखे होने चाहिए)

गांव या ठंडे इलाकों में लोग सूखे मूंगफली के छिलकों को आग जलाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि ये आसानी से जल जाते हैं।

तुर्किये में जनसंख्या संकट के संकेत, प्रजनन दर में तेज गिरावट


  तुर्किये की कुल प्रजनन दर (Fertility Rate) में बीते कुछ वर्षों में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। जहां 2017 में यह दर 2.08 थी, वहीं 2024 तक घटकर 1.48 पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा न सिर्फ जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी 2.1 के स्तर से काफी नीचे है, बल्कि वैश्विक औसत 2.25 से भी कम है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रजनन दर में यह गिरावट तुर्किये के लिए दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है। कम होती जन्म दर का सीधा असर भविष्य में वर्कफोर्स की कमीबुजुर्ग आबादी के बढ़ते बोझ और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर पड़ सकता है।

इस गिरावट के पीछे शहरीकरण, बढ़ती महंगाई, करियर प्राथमिकताएं, देर से शादी और जीवनशैली में बदलाव जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। खासकर युवा वर्ग में परिवार बढ़ाने को लेकर झिझक और आर्थिक अनिश्चितता बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है।

जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले दशकों में तुर्किये को भी उन देशों की सूची में गिना जा सकता है, जहां जनसंख्या सिकुड़ने लगी है। ऐसे में सरकार के सामने अब परिवार-प्रोत्साहन नीतियां और सामाजिक सुधारों को तेज करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

अभी हों लोकसभा चुनाव तो किसकी बनेगी सरकार? NDA को बंपर बढ़त, BJP को 287 सीटों का अनुमान


 अगर इस वक्त लोकसभा चुनाव करा दिए जाएं, तो केंद्र की सत्ता में एक बार फिर NDA की वापसी होती नजर आ रही है। एक नए ताज़ा सर्वे के मुताबिक, एनडीए को भारी बढ़त मिलने का अनुमान है और इसमें सबसे बड़ा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को होता दिख रहा है।

सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, अकेले बीजेपी को 287 सीटें मिल सकती हैं, जो कि बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है। सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए की कुल सीटें और भी मजबूत स्थिति में पहुंच सकती हैं, जिससे सरकार गठन में किसी तरह की दिक्कत नहीं दिखती।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़त के पीछे मजबूत नेतृत्व, संगठित चुनावी मशीनरी और राष्ट्रव्यापी मुद्दे अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं विपक्षी गठबंधन को लेकर अभी भी सीट शेयरिंग, नेतृत्व और एजेंडा जैसे मुद्दों पर स्पष्टता की कमी नजर आ रही है।

हालांकि, राजनीतिक जानकार यह भी कहते हैं कि चुनाव अभी दूर हैं और महंगाई, रोजगार, क्षेत्रीय समीकरण और आखिरी चरण का माहौल नतीजों को प्रभावित कर सकता है। भारत की राजनीति में कई बार चुनाव से पहले के सर्वे और वास्तविक नतीजों में फर्क भी देखा गया है।

कुल मिलाकर, यह ताजा सर्वे संकेत देता है कि अगर अभी मतदान हुआ, तो एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलते हैं।

मधुमक्खियों के बीच मौत से खेलते हैं ये लोग! बिना सुरक्षा ऐसे निकालते हैं शहद, वायरल वीडियो देख दंग रह जाएंगे


 इन दिनों एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ सकते हैं। वीडियो में अफ्रीका की एक आदिवासी जनजाति के लोग बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मधुमक्खियों के छत्ते से सीधे हाथ डालकर शहद निकालते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान सैकड़ों मधुमक्खियां उन्हें लगातार काटती रहती हैं, लेकिन उनके चेहरे पर डर या दर्द का कोई भाव तक नहीं दिखता।

आमतौर पर मधुमक्खी का छत्ता छेड़ना बेहद खतरनाक माना जाता है। एक-दो डंक भी किसी आम इंसान के लिए गंभीर साबित हो सकते हैं, लेकिन यह जनजाति सदियों से चली आ रही अपनी परंपरा और अनुभव के दम पर इस काम को बेहद सहज तरीके से करती है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जनजाति के लोग बिना दस्ताने, बिना कपड़े ढके और बिना किसी सुरक्षा के छत्ते को तोड़ते हैं और आराम से शहद निकाल लेते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस जनजाति के लोगों ने समय के साथ मधुमक्खियों के व्यवहार को समझ लिया है। माना जाता है कि उनके शरीर में मधुमक्खी के ज़हर को सहन करने की क्षमता विकसित हो चुकी है। इसके अलावा, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि वे पारंपरिक तरीकों और प्राकृतिक संकेतों की मदद से मधुमक्खियों को आक्रामक होने से पहले ही संभाल लेते हैं।

यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई इसे साहस की मिसाल बता रहा है तो कोई इसे सीधा मौत से खेलने जैसा बता रहा है। एक बात तो तय है—यह नजारा देखकर आम इंसान ऐसा करने की हिम्मत शायद ही जुटा पाए।

बिजनौर में जनसेवा केंद्र बना मौत का अड्डा, चिकन-शराब पार्टी के बाद एक युवक की मौत, तीन की हालत नाज़ुक


 उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक जनसेवा केंद्र (CSC) में आयोजित चिकन और शराब पार्टी जानलेवा साबित हो गई। संदिग्ध हालात में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नजीबाबाद क्षेत्र स्थित एक जनसेवा केंद्र पर कुछ युवक देर रात पार्टी कर रहे थे। पार्टी के दौरान शराब और चिकन का सेवन किया गया। कुछ ही देर बाद सभी युवकों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। एक युवक की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि अन्य तीन को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, आबकारी विभाग और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। टीम ने जनसेवा केंद्र को सील कर दिया है और खाने-पीने के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रारंभिक जांच में दूषित भोजन या नकली शराब से मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। वहीं, आबकारी विभाग यह भी जांच कर रहा है कि शराब कहां से लाई गई थी और क्या वह अवैध या नकली थी।

इस घटना ने जनसेवा केंद्रों की कार्यप्रणाली और वहां हो रही अवैध गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

सुल्तानपुरी अमन विहार इलाके से 55 वर्षीय व्यक्ति लापता, 11 दिन बाद भी सुराग नहीं

 


नई दिल्ली।
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके से एक 55 वर्षीय व्यक्ति के लापता होने का मामला सामने आया है। अमन विहार थाना पुलिस ने इस संबंध में गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, लापता व्यक्ति की पहचान ओमवीर पुत्र खेमचंद के रूप में हुई है, जो सुल्तानपुरी के निवासी हैं। परिजनों ने बताया कि ओमवीर 15 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे दुकान से निकले थे, जबकि उनका मोबाइल फोन रात 9:30 बजे से ही बंद आ रहा था। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका है।

काफी तलाश के बावजूद जब कोई जानकारी नहीं मिली तो परिजनों ने अमन विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में जनरल डायरी दर्ज कर आसपास के इलाकों में तलाश शुरू कर दी है।

लापता व्यक्ति की पहचान के अनुसार उनकी लंबाई लगभग 5 फीट 7 इंच, रंग गेहुआ, शरीर मध्यम, बाल काले बताए गए हैं। लापता होने के समय उन्होंने सफेद शर्ट और भूरे रंग की पैंट पहन रखी थी।

पुलिस और परिजनों ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को ओमवीर के बारे में कोई भी जानकारी मिले तो मोबाइल नंबर 8512890519 पर तुरंत संपर्क करें।

IND vs PAK U19: भारत को हराकर सेमीफाइनल में पहुंच सकता है पाकिस्तान, समझिए पूरा समीकरण


 अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुका है, जबकि ग्रुप-बी से अब भी तीन टीमें—भारत, इंग्लैंड और पाकिस्तान—दौड़ में बनी हुई हैं। ऐसे में IND vs PAK U19 मुकाबला बेहद अहम हो गया है, क्योंकि इसी मैच से सेमीफाइनल की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

पाकिस्तान अगर भारत को हराता है, तो उसके अंक और नेट रन रेट (NRR) सेमीफाइनल की दौड़ में उसे मजबूत स्थिति में पहुंचा सकते हैं। ऐसी जीत के बाद पाकिस्तान की निगाहें इंग्लैंड के अगले मैच के नतीजे और NRR पर होंगी। अगर इंग्लैंड फिसलता है या पाकिस्तान का NRR बेहतर रहता है, तो पाकिस्तान अंतिम-चार में जगह बना सकता है।

भारत के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जीत उसे सीधे सेमीफाइनल के बेहद करीब ले जा सकती है। हार की स्थिति में भी भारत का भविष्य दूसरे मुकाबलों के नतीजों और NRR पर निर्भर करेगा। यानी भारत के लिए भी यह मैच “करो या मरो” जैसा ही है।

इंग्लैंड का एक मैच भी समीकरण बदल सकता है। अगर इंग्लैंड जीत दर्ज करता है और उसका NRR मजबूत रहता है, तो भारत-पाकिस्तान मुकाबले का असर अलग दिशा ले सकता है।

ग्रुप-बी से सेमीफाइनल की रेस पूरी तरह ओपन है। भारत-पाकिस्तान का यह मुकाबला सिर्फ प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की चाबी भी अपने हाथ में रखता है।

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सर्दियों का देसी स्वाद: लहसुन के पत्तों की चटनी क्यों है सेहत और स्वाद का परफेक्ट मेल


 सर्दियों का मौसम आते ही खाने की थाली में देसी और पारंपरिक स्वाद अपने आप जगह बना लेते हैं। इन्हीं में से एक खास और बेहद लोकप्रिय व्यंजन है लहसुन के पत्तों की चटनी। गुनगुनी धूप, ठंडी हवा और साथ में हरे-हरे लहसुन के पत्तों से बनी यह चटनी सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि सर्दियों की पूरी अनुभूति है।

लहसुन के पत्तों की चटनी की सबसे बड़ी खासियत इसकी तीखी खुशबू और सोंधा स्वाद है, जो सादे खाने में भी जान फूंक देता है। बाजरे या मक्के की रोटी, दाल-चावल या साधारण सब्जी—इस चटनी के साथ हर भोजन खास बन जाता है। उत्तर भारत और खासकर ग्रामीण इलाकों में यह चटनी सर्दियों के दिनों में लगभग हर घर में बनाई जाती है।

स्वाद के साथ-साथ यह चटनी सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लहसुन के पत्तों में इम्युनिटी बढ़ाने वाले तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो सर्दियों में सर्दी-खांसी और संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग इसे “दवा जैसा खाना” भी कहते हैं।

आज के फास्ट फूड के दौर में लहसुन के पत्तों की चटनी जैसे पारंपरिक स्वाद हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। यह चटनी न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सर्दियों की थाली को पूरी तरह से मुकम्मल बना देती है।

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यूपी के लाखों शिक्षकों के लिए योगी सरकार का बड़ा तोहफा, कैबिनेट बैठक में मिली अहम मंजूरी


 उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर सरकार ने उनके लिए नए अवसरों और सुविधाओं का पिटारा खोल दिया है।

कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल के सामने कुल 32 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन फैसलों का सीधा लाभ शिक्षा विभाग और प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों को मिलने वाला है।

सरकार के इस कदम को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। मंजूर किए गए प्रस्तावों से न केवल शिक्षकों की कार्य स्थितियों में सुधार होगा, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

योगी सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश के शिक्षक वर्ग में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में और भी बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।

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14 साल के करियर में हिट्स की झड़ी, ‘बॉर्डर 2’ से वरुण धवन ने बॉक्स ऑफिस पर काटा बवाल


 बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन इन दिनों हर तरफ छाए हुए हैं। अपने 14 साल लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं और अब उनकी नई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है। फिल्म को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और कमाई के मामले में भी यह लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है।

वरुण धवन ने साल 2012 में ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘मैं तेरा हीरो’, ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’, ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, ‘जुड़वा 2’ और ‘ABCD 2’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी फिल्मों ने यूथ के साथ-साथ फैमिली ऑडियंस को भी खूब एंटरटेन किया।

हालांकि करियर में उतार-चढ़ाव भी आए। ‘कलंक’ और ‘भेड़िया’ जैसी कुछ फिल्मों से उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं मिला, लेकिन वरुण की लोकप्रियता पर इसका खास असर नहीं पड़ा। उन्होंने हर बार खुद को नए अवतार में पेश करने की कोशिश की।

अब ‘बॉर्डर 2’ के जरिए वरुण धवन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ रोमांटिक या कॉमेडी ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और गंभीर किरदारों में भी दमदार परफॉर्मेंस दे सकते हैं। फिल्म की ओपनिंग से लेकर वीकेंड कलेक्शन तक आंकड़े मजबूत बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, वरुण धवन का करियर इस वक्त एक बार फिर पीक मोड में नजर आ रहा है और ‘बॉर्डर 2’ उनकी हिट लिस्ट में एक और बड़ा नाम जोड़ती दिख रही है।

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जयपुर में सर्व किन्नर समाज की एकजुट आवाज़, भाईचारे और समरसता की परंपरा की रक्षा का संकल्प


 राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से आपसी भाईचारे, समरसता और विविधता के सम्मान की प्रतीक रही है। इसी विरासत को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से बुधवार को राजधानी जयपुर में सर्व किन्नर समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरा और अपनी आवाज़ बुलंद की।

किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर सामाजिक सौहार्द, सम्मान और समान अधिकारों की बात कही। उनका कहना था कि राजस्थान की पहचान गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी स्वीकार्यता से बनी है, जिसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में फैली गलत धारणाओं और भेदभाव पर चिंता जताई और सरकार व समाज से किन्नर समुदाय को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और समान अवसर देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजस्थान की धरती पर भाईचारा और समरसता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीने की परंपरा है—जिसे हर वर्ग मिलकर आगे बढ़ाएगा।Hashtags

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आ रहा वंदे भारत स्लीपर का ‘बाप’, रेलवे बनाएगी खास सुपर ट्रेन, लुक होगा तेजस-राजधानी जैसा


  देश के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय रेलवे अब इसे और भी विशाल और दमदार बनाने जा रही है। गुवाहाटी से हावड़ा के बीच चल रही देश की पहली सेमी-हाईस्पीड स्लीपर वंदे भारत को यात्रियों से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। बुकिंग खुलते ही कुछ ही घंटों में ट्रेन फुल हो जाना इस बात का सबूत है।

इसी बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब तक 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर को जल्द ही 24 कोच की ट्रेन में बदला जाएगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ज्यादा सीटें जुड़ने से कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर के संचालन के महज 10 दिनों के भीतर इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला कर लिया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। रेलवे का मकसद ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ तेज़, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का लुक तेजस और राजधानी एक्सप्रेस जैसा प्रीमियम होगा, जबकि सुविधाओं के मामले में इसे ‘रेलवे का पुष्पक विमान’ कहा जा रहा है। इसमें आरामदायक स्लीपर बर्थ, आधुनिक इंटीरियर, बेहतर सस्पेंशन और हाई-स्पीड सफर का शानदार मेल मिलेगा।

रेलवे संकेत दे चुका है कि आने वाले समय में ऐसी और भी हाई-कैपेसिटी, प्रीमियम स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत की जा सकती है। यानी वंदे भारत स्लीपर अब सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा का नया स्टैंडर्ड बनने जा रही है।

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भारत ने कैसे बचाई थी एक विदेशी राष्ट्रपति की जान? ऑपरेशन कैक्टस की साहसिक कहानी


 साल 1988 में भारत ने अपनी सैन्य ताकत और तेज़ फैसले से मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी भारत की सबसे सफल विदेशी सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

दरअसल, नवंबर 1988 में मालदीव की राजधानी माले में तख्तापलट की साजिश रची गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को मारने या बंदी बनाने की योजना थी, लेकिन वे किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

हालात बेकाबू होते देख राष्ट्रपति गयूम ने सीधे भारत से मदद मांगी। उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैरा कमांडो को रातों-रात माले भेजा गया।

भारतीय सैनिकों ने लैंड करते ही एयरपोर्ट को अपने कब्जे में लिया और दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे। कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को काबू में कर लिया गया और राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पूरा ऑपरेशन 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और ताकतवर शक्ति के रूप में स्थापित किया।

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कैसे हुई, कौन थीं यह कथावाचक और क्या है पूरा मामला


 राजस्थान के जोधपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब कुछ महीने पहले उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर बड़े विवाद की वजह बना था। साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर स्थित उनके आरती नगर आश्रम से गंभीर हालत में प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित करते हुए मृत बताया।

मौत के बाद मामला तब और रहस्यमयी हो गया, जब उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई। इस पोस्ट में लिखा था—
“जीते जी नहीं, जाने के बाद मिलेगा न्याय।”
इस संदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दावा किया जा रहा है कि यह पोस्ट उनकी मौत के बाद अपलोड की गई। इसी बिंदु पर पुलिस की जांच अब केंद्रित है।

साध्वी प्रेम बाईसा धार्मिक कथाओं और प्रवचनों के लिए जानी जाती थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके प्रवचनों से जुड़े हुए थे। कुछ समय पहले वायरल हुए वीडियो को लेकर वे मानसिक दबाव में थीं—ऐसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। परिवार और समर्थकों की ओर से हाई लेवल जांच की मांग की जा रही है। साध्वी की मौत ने धार्मिक और सामाजिक जगत में हलचल मचा दी है और सभी की नजरें अब जांच के नतीजों पर टिकी हैं।#SadhviPremBaisa #PremBaisaDeath #JodhpurNews #SadhviDeathMystery #ReligiousNews #ViralVideoCase #RajasthanNews #BreakingNews

अजित पवार के बहाने मोदी-विरोध की राजनीति, क्या लाशों पर सियासत ही विपक्ष का नया हथियार बन गई है?


 बारामती एयरपोर्ट पर हुए दर्दनाक विमान हादसे में एनसीपी नेता अजित पवार की असमय मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं। ऐसे समय में उम्मीद थी कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हर दल शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा होगा। लेकिन अफसोस, इस त्रासदी को भी राजनीतिक हथियार बना लिया गया।

विपक्षी खेमे के कुछ बड़े नेताओं ने बिना किसी ठोस सबूत के इस हादसे को “साजिश” करार देना शुरू कर दिया। ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधे-सीधे केंद्र सरकार पर संदेह जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर दी। सवाल यह नहीं है कि जांच हो या नहीं—जांच हर हादसे में होती है। सवाल यह है कि शोक की घड़ी में शक और आरोपों की राजनीति क्यों?

दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार के अपने चाचा और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने इस घटना को एक दुखद दुर्घटना बताते हुए साफ कहा है कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जब परिवार का सबसे अनुभवी नेता संयम और संवेदना की बात कर रहा है, तब विपक्ष का एक वर्ग इस त्रासदी को मोदी-विरोध की स्क्रिप्ट में क्यों ढाल रहा है?

यह पहली बार नहीं है जब किसी हादसे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन सवाल यह है कि क्या अब विपक्ष के पास लाशों पर राजनीति के अलावा कोई नैतिक रास्ता नहीं बचा? जनता सब देख रही है और शायद अब फैसला भी वही करेगी—कि संवेदना बड़ी है या सियासत

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भारत ने कैसे बचाई थी मालदीव के राष्ट्रपति की जान? ऑपरेशन कैक्टस की पूरी कहानी


  1988 में भारत ने एक साहसिक सैन्य कार्रवाई के ज़रिये मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह मिशन इतिहास में ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से दर्ज है। उस समय मालदीव की राजधानी माले में तख़्तापलट की कोशिश की गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर सरकारी इमारतों, रेडियो स्टेशन और एयरपोर्ट पर कब्ज़ा कर लिया था।

राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम किसी तरह जान बचाकर छिपने में सफल रहे, लेकिन हालात बेहद ख़तरनाक थे। मालदीव की सेना छोटी थी और विद्रोहियों के सामने टिक नहीं पा रही थी। ऐसे संकट के समय राष्ट्रपति गयूम ने भारत से तत्काल मदद की गुहार लगाई।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बिना देरी किए सैन्य हस्तक्षेप का फैसला लिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैराशूट रेजिमेंट के जवानों को रातों-रात माले भेजा गया। भारतीय कमांडो ने एयरपोर्ट पर नियंत्रण हासिल किया और कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को पीछे धकेल दिया।

भारतीय सैनिक दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस पूरे ऑपरेशन को 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। विद्रोही या तो मारे गए या गिरफ्तार कर लिए गए।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य क्षमता और विश्वसनीयता को भी साबित किया। यह मिशन आज भी भारत की तेज़, निर्णायक और जिम्मेदार विदेश नीति का प्रतीक माना जाता है।

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IND vs PAK U19: भारत को हराकर सेमीफाइनल में पहुंच सकता है पाकिस्तान, समझिए पूरा समीकरण


  अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुका है, जबकि ग्रुप-बी से अब भी तीन टीमें—भारत, इंग्लैंड और पाकिस्तान—दौड़ में बनी हुई हैं। ऐसे में IND vs PAK U19 मुकाबला बेहद अहम हो गया है, क्योंकि इसी मैच से सेमीफाइनल की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

पाकिस्तान अगर भारत को हराता है, तो उसके अंक और नेट रन रेट (NRR) सेमीफाइनल की दौड़ में उसे मजबूत स्थिति में पहुंचा सकते हैं। ऐसी जीत के बाद पाकिस्तान की निगाहें इंग्लैंड के अगले मैच के नतीजे और NRR पर होंगी। अगर इंग्लैंड फिसलता है या पाकिस्तान का NRR बेहतर रहता है, तो पाकिस्तान अंतिम-चार में जगह बना सकता है।

भारत के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जीत उसे सीधे सेमीफाइनल के बेहद करीब ले जा सकती है। हार की स्थिति में भी भारत का भविष्य दूसरे मुकाबलों के नतीजों और NRR पर निर्भर करेगा। यानी भारत के लिए भी यह मैच “करो या मरो” जैसा ही है।

इंग्लैंड का एक मैच भी समीकरण बदल सकता है। अगर इंग्लैंड जीत दर्ज करता है और उसका NRR मजबूत रहता है, तो भारत-पाकिस्तान मुकाबले का असर अलग दिशा ले सकता है।

ग्रुप-बी से सेमीफाइनल की रेस पूरी तरह ओपन है। भारत-पाकिस्तान का यह मुकाबला सिर्फ प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की चाबी भी अपने हाथ में रखता है।

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सर्दियों का देसी स्वाद: लहसुन के पत्तों की चटनी क्यों है सेहत और स्वाद का परफेक्ट मेल


  सर्दियों का मौसम आते ही खाने की थाली में देसी और पारंपरिक स्वाद अपने आप जगह बना लेते हैं। इन्हीं में से एक खास और बेहद लोकप्रिय व्यंजन है लहसुन के पत्तों की चटनी। गुनगुनी धूप, ठंडी हवा और साथ में हरे-हरे लहसुन के पत्तों से बनी यह चटनी सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि सर्दियों की पूरी अनुभूति है।

लहसुन के पत्तों की चटनी की सबसे बड़ी खासियत इसकी तीखी खुशबू और सोंधा स्वाद है, जो सादे खाने में भी जान फूंक देता है। बाजरे या मक्के की रोटी, दाल-चावल या साधारण सब्जी—इस चटनी के साथ हर भोजन खास बन जाता है। उत्तर भारत और खासकर ग्रामीण इलाकों में यह चटनी सर्दियों के दिनों में लगभग हर घर में बनाई जाती है।

स्वाद के साथ-साथ यह चटनी सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लहसुन के पत्तों में इम्युनिटी बढ़ाने वाले तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो सर्दियों में सर्दी-खांसी और संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग इसे “दवा जैसा खाना” भी कहते हैं।

आज के फास्ट फूड के दौर में लहसुन के पत्तों की चटनी जैसे पारंपरिक स्वाद हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। यह चटनी न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सर्दियों की थाली को पूरी तरह से मुकम्मल बना देती है।

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यूपी के लाखों शिक्षकों के लिए योगी सरकार का बड़ा तोहफा, कैबिनेट बैठक में मिली अहम मंजूरी


उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर सरकार ने उनके लिए नए अवसरों और सुविधाओं का पिटारा खोल दिया है।

कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल के सामने कुल 32 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन फैसलों का सीधा लाभ शिक्षा विभाग और प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों को मिलने वाला है।

सरकार के इस कदम को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। मंजूर किए गए प्रस्तावों से न केवल शिक्षकों की कार्य स्थितियों में सुधार होगा, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

योगी सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश के शिक्षक वर्ग में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में और भी बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।

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14 साल के करियर में हिट्स की झड़ी, ‘बॉर्डर 2’ से वरुण धवन ने बॉक्स ऑफिस पर काटा बवाल


 


 बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन इन दिनों हर तरफ छाए हुए हैं। अपने 14 साल लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं और अब उनकी नई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है। फिल्म को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और कमाई के मामले में भी यह लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है।

वरुण धवन ने साल 2012 में ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘मैं तेरा हीरो’, ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’, ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, ‘जुड़वा 2’ और ‘ABCD 2’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी फिल्मों ने यूथ के साथ-साथ फैमिली ऑडियंस को भी खूब एंटरटेन किया।

हालांकि करियर में उतार-चढ़ाव भी आए। ‘कलंक’ और ‘भेड़िया’ जैसी कुछ फिल्मों से उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं मिला, लेकिन वरुण की लोकप्रियता पर इसका खास असर नहीं पड़ा। उन्होंने हर बार खुद को नए अवतार में पेश करने की कोशिश की।

अब ‘बॉर्डर 2’ के जरिए वरुण धवन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ रोमांटिक या कॉमेडी ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और गंभीर किरदारों में भी दमदार परफॉर्मेंस दे सकते हैं। फिल्म की ओपनिंग से लेकर वीकेंड कलेक्शन तक आंकड़े मजबूत बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, वरुण धवन का करियर इस वक्त एक बार फिर पीक मोड में नजर आ रहा है और ‘बॉर्डर 2’ उनकी हिट लिस्ट में एक और बड़ा नाम जोड़ती दिख रही है।

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जयपुर में सर्व किन्नर समाज की एकजुट आवाज़, भाईचारे और समरसता की परंपरा की रक्षा का संकल्प


  राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से आपसी भाईचारे, समरसता और विविधता के सम्मान की प्रतीक रही है। इसी विरासत को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से बुधवार को राजधानी जयपुर में सर्व किन्नर समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरा और अपनी आवाज़ बुलंद की।

किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर सामाजिक सौहार्द, सम्मान और समान अधिकारों की बात कही। उनका कहना था कि राजस्थान की पहचान गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी स्वीकार्यता से बनी है, जिसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में फैली गलत धारणाओं और भेदभाव पर चिंता जताई और सरकार व समाज से किन्नर समुदाय को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और समान अवसर देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजस्थान की धरती पर भाईचारा और समरसता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीने की परंपरा है—जिसे हर वर्ग मिलकर आगे बढ़ाएगा।Hashtags

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आ रहा वंदे भारत स्लीपर का ‘बाप’, रेलवे बनाएगी खास सुपर ट्रेन, लुक होगा तेजस-राजधानी जैसा


  देश के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय रेलवे अब इसे और भी विशाल और दमदार बनाने जा रही है। गुवाहाटी से हावड़ा के बीच चल रही देश की पहली सेमी-हाईस्पीड स्लीपर वंदे भारत को यात्रियों से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। बुकिंग खुलते ही कुछ ही घंटों में ट्रेन फुल हो जाना इस बात का सबूत है।

इसी बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब तक 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर को जल्द ही 24 कोच की ट्रेन में बदला जाएगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ज्यादा सीटें जुड़ने से कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर के संचालन के महज 10 दिनों के भीतर इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला कर लिया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। रेलवे का मकसद ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ तेज़, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का लुक तेजस और राजधानी एक्सप्रेस जैसा प्रीमियम होगा, जबकि सुविधाओं के मामले में इसे ‘रेलवे का पुष्पक विमान’ कहा जा रहा है। इसमें आरामदायक स्लीपर बर्थ, आधुनिक इंटीरियर, बेहतर सस्पेंशन और हाई-स्पीड सफर का शानदार मेल मिलेगा।

रेलवे संकेत दे चुका है कि आने वाले समय में ऐसी और भी हाई-कैपेसिटी, प्रीमियम स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत की जा सकती है। यानी वंदे भारत स्लीपर अब सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा का नया स्टैंडर्ड बनने जा रही है।

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भारत ने कैसे बचाई थी एक विदेशी राष्ट्रपति की जान? ऑपरेशन कैक्टस की साहसिक कहानी


 साल 1988 में भारत ने अपनी सैन्य ताकत और तेज़ फैसले से मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी भारत की सबसे सफल विदेशी सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

दरअसल, नवंबर 1988 में मालदीव की राजधानी माले में तख्तापलट की साजिश रची गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को मारने या बंदी बनाने की योजना थी, लेकिन वे किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

हालात बेकाबू होते देख राष्ट्रपति गयूम ने सीधे भारत से मदद मांगी। उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैरा कमांडो को रातों-रात माले भेजा गया।

भारतीय सैनिकों ने लैंड करते ही एयरपोर्ट को अपने कब्जे में लिया और दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे। कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को काबू में कर लिया गया और राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पूरा ऑपरेशन 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और ताकतवर शक्ति के रूप में स्थापित किया।